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    आपराधिक रिकॉर्ड छिपाने पर बर्खास्तगी हर मामले में नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने तय किए नियम

    Updated: Wed, 12 Aug 2026 12:02 AM (IST)

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नौकरी के दौरान आपराधिक रिकॉर्ड छिपाने पर कर्मचारी की बर्खास्तगी स्वतः नहीं होगी, नियोक्ता को मामले की गंभीरता और परिस्थितियों ...और पढ़ें

    सुप्रीम कोर्ट ने लागू किए नए नियम (फोटो-पीटीआई)

    सुप्रीम कोर्ट ने लागू किए नए नियम (फोटो-पीटीआई)

    HighLights

    1. बर्खास्तगी से पहले नियोक्ता को परिस्थितियों का आकलन करना होगा।

    2. कर्मचारी को जानकारी थी या नहीं, यह जांचना जरूरी।

    3. शत्रुघ्न यादव को बहाल कर 50% बकाया वेतन मिलेगा।

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि नौकरी के दौरान या नियुक्ति के समय आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी नहीं देने पर कर्मचारी को बर्खास्त करना अपने-आप होने वाली कार्रवाई नहीं है। नियोक्ता को फैसला लेने से पहले यह देखना होगा कि जानकारी छिपाने की परिस्थितियां क्या थीं, अपराध कितना गंभीर था और कर्मचारी जिस पद पर था, उसकी प्रकृति क्या थी।

    सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

    जस्टिस संजय करोल और एजी मसीह की बेंच ने कहा कि आपराधिक रिकॉर्ड का खुलासा न करने के मामले में प्रत्येक कर्मचारी के मामले पर अलग से विचार किया जाना चाहिए। नियोक्ता को पहले यह तय करना होगा कि कर्मचारी ने जानबूझकर जानकारी छिपाई या गलत जानकारी दी थी।

    यह फैसला फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स त्रावणकोर लिमिटेड से बर्खास्त किए गए शत्रुघ्न यादव की याचिका पर आया। यादव को अपने खिलाफ दर्ज एक गैर-संज्ञेय अपराध के मामले की जानकारी नहीं देने के आधार पर नौकरी से निकाल दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी बर्खास्तगी को गलत ठहराते हुए नौकरी बहाल करने का आदेश दिया।

    पीठ ने कहा कि नियोक्ता को यह भी जांचना होगा कि घोषणा करते समय कर्मचारी को अपने खिलाफ दर्ज मामले की जानकारी थी या नहीं। इसके अलावा आरोपों की प्रकृति, अपराध की गंभीरता, कर्मचारी की भूमिका, जानकारी छिपाने का तरीका, पद की जिम्मेदारियां और यदि मामला खत्म हो चुका है तो उसके नतीजे पर भी विचार करना होगा।

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    अदालत ने कहा कि यदि यह साबित नहीं होता कि उम्मीदवार को आपराधिक मामले की जानकारी थी, तो यह नहीं माना जा सकता कि उसने जानबूझकर कोई तथ्य छिपाया या गलत जानकारी दी। हालांकि, मामले की जानकारी नहीं होने का दावा साबित करने की जिम्मेदारी कर्मचारी की ही होगी।

    पीठ ने कहा कि यादव लगातार यह दावा करते रहे कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं थी। रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों से भी उनका दावा साबित होता है। इसलिए उनकी बर्खास्तगी को कानूनी रूप से सही नहीं माना जा सकता।

    सुप्रीम कोर्ट ने यादव को तत्काल नौकरी पर बहाल करने और संबंधित सेवा लाभ देने का आदेश दिया। हालांकि, पिछली बकाया सैलरी का भुगतान पूरी तरह नहीं किया जाएगा। अदालत ने अधिकतम 50 प्रतिशत बकाया वेतन आठ सप्ताह के भीतर देने का निर्देश दिया।

    (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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