UAPA मामलों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, कहा- एक साल में पूरा करें ट्रायल
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की विशेष अदालत को आइसिस जैसे आतंकी संगठनों द्वारा साइबर स्पेस के इस्तेमाल से युवाओं को कट्टरपंथी बनाने के यूएपीए मामले का ट्रा ...और पढ़ें
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UAPA मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिए निर्देश (फोटो-पीटीआई)
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने यूएपीए ट्रायल एक साल में पूरा करने को कहा।
मामला आइसिस द्वारा युवाओं को कट्टरपंथी बनाने से जुड़ा है।
मोहम्मद हिदायतुल्ला की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली की एक विशेष अदालत को आइसिस जैसे आतंकी संगठनों द्वारा साइबर स्पेस का इस्तेमाल करके युवाओं को कट्टरपंथी बनाने से जुड़े मामले का ट्रायल एक साल के अंदर पूरा करने का निर्देश दिया। यह मामला गैर कानूनी गतिविधियां निवारण अधिनियम (यूएपीए) के तहत दर्ज है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने मोहम्मद हिदायतुल्ला की ओर से दाखिल याचिका पर यह आदेश पारित किया।
हिदायतुल्ला ने दिल्ली हाई कोर्ट के जनवरी, 2025 के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उसे इस मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया गया था।
एनआइए द्वारा अक्टूबर, 2022 में गिरफ्तार हिदायतुल्ला पर आरोप है कि वह साइबर स्पेस के जरिये आइसिस की विचारधारा का प्रसार कर रहा था और जांच के दौरान उससे बरामद इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में कई आपत्तिजनम सामग्री मिली थी।
मंगलवार को सुनवाई के दौरान एनआइए की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने शीर्ष अदालत को बताया कि इस मामले में आठ आरोपितों के खिलाफ आरोप तय हो चुके हैं।
यह मामला विशेष अदालत में है और मामले में 14 गवाह हैं। कुल 12 आरोपित हैं, जिनमें से चार फरार हैं। जबकि याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने पीठ को बताया कि हिदायतुल्ला करीब चार साल से हिरासत में है।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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