सरकारी विभागों के बीच RTI की नौबत, केंद्रीय सूचना आयोग ने एनडीएमसी को लगाई फटकार
केंद्रीय सूचना आयोग ने केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग को अपने ही सिक्योरिटी डिपॉजिट की जानकारी के लिए नई दिल्ली नगरपालिका परिषद के खिलाफ आरटीआई का सहा ...और पढ़ें

केंद्रीय सूचना आयोग ने एनडीएमसी को लगाई फटकार
HighLights
सीईआरसी को एनडीएमसी से जानकारी के लिए आरटीआई लगानी पड़ी।
दो साल बाद मिली जानकारी, सिक्योरिटी डिपॉजिट में हुई कटौती।
सीआईसी ने एनडीएमसी की प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर नाराजगी जताई।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश की प्रशासनिक व्यवस्था का एक बेहद चिंताजनक और हैरान करने वाला मामला सामने आया है।
केंद्रीय सूचना आयोग (सीआइसी) ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई है कि केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग (सीईआरसी) जैसे एक महत्वपूर्ण संवैधानिक निकाय को नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) से अपने ही सिक्योरिटी डिपाजिट से जुड़ी बुनियादी जानकारी हासिल करने के लिए सूचना का अधिकार (आरटीआइ) कानून का सहारा लेना पड़ा।
यह पूरा मामला मई 2024 का है, जब सीईआरसी ने अपने कार्यालय को चंद्रलोक बिल्डिंग से बदलकर नौरोजी नगर स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में स्थानांतरित किया था।
कार्यालय बदलने के बाद सीईआरसी अपने सिक्योरिटी डिपाजिट के मिलान और रिफंड से जुड़ी जानकारी चाहती थी। इसके लिए कई बार आधिकारिक पत्र लिखे गए और व्यक्तिगत रूप से भी संपर्क किया गया, लेकिन एनडीएमसी की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। हारकर सीईआरसी के एक अधिकारी को आरटीआइ लगानी पड़ी।
दो साल का लंबा इंतजार और अजीबोगरीब दलीलें
हद तो तब हो गई जब आरटीआइ आवेदन और प्रथम अपील पर एनडीएमसी के अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया। आखिरकार, जब सीआइसी ने इस मामले में सुनवाई का नोटिस जारी किया, तब जाकर आठ जुलाई 2026 को यानी दो साल से अधिक समय के बाद सीईआरसी को जानकारी उपलब्ध कराई गई।
एनडीएमसी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, कुल 4.86 करोड़ रुपये के सिक्योरिटी डिपाजिट में से 3.48 करोड़ रुपये लौटाए गए, जबकि 1.38 करोड़ रुपये पुराने बकाये और ब्याज के नाम पर काट लिए गए। वहीं, सीईआरसी का साफ कहना था कि कोई बकाया नहीं था और यह मांग किराये में मनमाने संशोधन का परिणाम है।
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सीआइसी की कड़ी फटकार और कारण बताओ नोटिस
मुख्य सूचना आयुक्त विनोद कुमार तिवारी ने इस स्थिति को "अत्यंत परेशान करने वाला" और "गंभीर चिंता का विषय" करार दिया। आयोग ने कहा कि यह बेहद दुखद है कि एक सरकारी आयोग को मामूली आधिकारिक जानकारी के लिए दूसरे आयोग के दरवाजे पर आना पड़ा।
सीआइसी ने स्पष्ट किया कि आरटीआइ कानून का उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही तय करना है, न कि रोजमर्रा के प्रशासनिक कामकाज का विकल्प बनना।
प्रशासनिक लापरवाही और उदासीनता के इस मामले में सीआइसी ने एनडीएमसी के तत्कालीन जन सूचना अधिकारी और प्रथम अपीलीय प्राधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
साथ ही, एनडीएमसी के चेयरमैन को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि भविष्य में इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना हरकतें न दोहराई जाएं।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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