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    कावेरी जल विवाद: कर्नाटक को बड़ा झटका, अब तमिलनाडु को मिलेगा रोजाना 3500 क्यूसेक पानी

    Updated: Thu, 30 Jul 2026 05:49 PM (IST)

    कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण ने कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए अगले 15 दिनों तक प्रतिदिन 3500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया है। इस आदेश से कर्नाटक मे ...और पढ़ें

    कावेरी जव विवाद।

    कावेरी जव विवाद।

    HighLights

    1. CWMA ने कर्नाटक को 3500 क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश दिया।

    2. तमिलनाडु को अगले 15 दिनों तक मिलेगा कावेरी का पानी।

    3. मांड्या में आदेश के खिलाफ भारी विरोध प्रदर्शन, फिल्म पोस्टर फाड़े।

    डिजिटल डेस्क, बेंगुलुरु। कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) ने कर्नाटक को एक बड़ा झटका देते हुए कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) की सिफारिश को बरकरार रखा है। प्राधिकरण ने कर्नाटक को निर्देश दिया है कि वह तमिलनाडु के लिए अगले 15 दिनों तक प्रतिदिन 3500 क्यूसेक पानी छोड़े। प्राधिकरण का यह आदेश 29 जुलाई से ही लागू माना जाएगा, भले ही इसे आज जारी किया गया हो।

    तमिलनाडु ने क्या मांग की थी?

    बता दें कि तमिलनाडु सरकार ने 15 दिनों के लिए रोजाना 7000 क्यूसेक पानी छोड़ने की मांग की थी, जिसे प्राधिकरण ने खारिज कर दिया। इसके अलावा प्राधिकरण ने कर्नाटक की इस दलील को भी ठुकरा दिया कि राज्य में खुद पानी की कमी है और वह पानी छोड़ने की स्थिति में नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस आदेश के बाद कर्नाटक के पास अब केवल सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का ही कानूनी विकल्प बचा है।

    मांड्या में फूटा गुस्सा, फिल्म के पोस्टर फाड़े गए

    प्रधिकरण के आदेश के बाद कर्नाटक के मांड्या जिले में भारी आक्रोश देखने को मिला। प्रदर्शनकारियों ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसफ विजय की फिल्म 'जना नायकन' के पोस्टर फाड़ दिए और गुरुश्री सिनेमा हॉल में फिल्म की स्क्रीनिंग तुरंत रोकने की मांग की। हालात को देखते हुए थिएटर प्रबंधन ने फिल्म की स्क्रीनिंग रद्द कर दी।

    इतना ही नहीं कन्नड़ कार्यकर्ताओं ने जिला कलेक्टर के माध्यम से राज्य सरकार को एक ज्ञापन सौंपा है। इसमें मांग की गई है कि तमिलनाडु को कावेरी का पानी बिल्कुल न छोड़ा जाए और मांड्या के किसानों के आंदोलन का समर्थन किया जाए।

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    जनता ने क्या अपील की?

    प्रदर्शन के दौरान एक स्थानीय नागरिक ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से गुहार लगाते हुए कहा कि शिवकुमार जी, कृपया उन्हें बताइए कि हमारे पास पीने के लिए पानी नहीं है और न ही हमारे मवेशियों के लिए पानी बचा है। लोग बहुत लाचार हैं।

    सरकार से अनुरोध है कि हमें कुछ और समय दिलाया जाए। उन्होंने आगे कहा कि मांड्या के लोगों ने हमेशा कर्नाटक के हितों के लिए लड़ाई लड़ी है, इसलिए सरकार व्यक्तिगत रूप से इस मामले में हस्तक्षेप करे और समस्या का समाधान निकाले।