कैसे चुने जाते हैं देश के सबसे खतरनाक फाइटर पायलट? जानिए कैसे तय होता है एयरफोर्स में 'टॉप गन' बनने का सफर
स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ ग्वालियर में TACDE से प्रतिष्ठित फाइटर कॉम्बैट लीडर कोर्स पूरा करने वाली पहली महिला पायलट बन गई हैं। उन्होंने भारतीय वायु से ...और पढ़ें

स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ(फोटो: Indian Air Force/ X)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बिहार की बेटी स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ ने ग्वालियर में टैक्टिक्स एंड एयर कॉम्बैट डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (TACDE) में प्रतिष्ठित फाइटर कॉम्बैट लीडर (FCL) कोर्स पूरा करने वाली पहली महिला पायलट बन गई हैं। स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ ने भारतीय वायु सेना में वो मुकाम हासिल किया है, जो आज तक किसी महिला ने नहीं किया।
भारतीय वायु सेना के बहुत कम पायलटों को ही इस मुश्किल 20-हफ्ते के प्रोग्राम के लिए चुना जाता है, जिसमें अधिकारियों को एडवांस्ड कॉम्बैट टैक्टिक्स की ट्रेनिंग दी जाती है।
जून 2016 में भारतीय वायु सेना को जब पहली बार तीन महिला फाइटर पायलट मिली थीं, तब भावना कंठ का नाम भी उन तीन पायलट की लिस्ट में शामिल था। इसमें भावना कंठ, अवनी चतुर्वेदी और मोहना सिंह को भारतीय वायु सेना की पहली महिला फाइटर पायलटों के रूप में कमीशन किया गया था।
इसके बाद, मार्च 2018 में भावना कंठ ने मिग-21 बाइसन फाइटर जेट में अपनी पहली सफल सोलो उड़ान पूरी की। मई 2019 में वे दिन के समय लड़ाकू मिशनों के लिए योग्यता हासिल करने वाली देश की पहली महिला फाइटर पायलट बनीं।
भावना कंठ के ये मुकाम हासिल करने से पहले स्क्वाड्रन लीडर शिवांगी सिंह को क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर (QFI) का बैज हासिल किया। स्क्वाड्रन लीडर शिवांगी सिंह ने पिछले साल अक्टूबर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को राफेल विमान में उड़ाया भी था।
खबरें और भी
वहीं, इस साल की शुरुआत में, स्क्वाड्रन लीडर सान्या भारतीय वायु सेना में प्रतिष्ठित कैटेगरी-A क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर क्वालिफिकेशन हासिल करने वाली पहली महिला अधिकारी बनीं।

कौन है भावना कंठ?
बिहार के दरभंगा की रहने वाले इं. तेजनारायण कंठ एवं राधा देवी की बेटी की उपलब्धि से मिथिलांचल ही नहीं पूरे प्रदेश का सिर गर्व से ऊंचा हो गया है। भावना ने प्रारंभिक शिक्षा बेगूसराय से प्राप्त की। वहीं से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की। आगे की पढ़ाई के लिए कोटा चली गई।

कोटा से भावना ने अपनी लगन मेहनत कठिन तपस्या तथा माता-पिता की प्रेरणा से भारतीय वायुसेना के लिए चुनी गई। वायुसेना में कठिन परिश्रम तथा छह माह के प्रशिक्षण के बाद महिला फाइटर पायलट बनीं।
स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ वर्ष 2016 में भारतीय वायुसेना में शामिल पहली महिला फाइटर पायलटों के पहले बैच का हिस्सा थीं। उन्होंने मिग-21 बाइसन और बाद में अत्याधुनिक सुखोई-30 एमकेआई जैसे लड़ाकू विमानों का संचालन किया। मार्च 2020 में उन्हें दिन के समय युद्ध अभियानों के लिए पूर्ण रूप से ऑपरेशनल घोषित किया गया था।
-1786183368013.webp)
बताते चलें कि घनश्यामपुर प्रखंड के बाउर की बेटी बतौर प्लाइंग ऑफिसर 2016 में वायुसेना में शामिल हुईं। वर्ष 2015 में सरकार ने पहली बार महिलाओं के लिए फायटर स्ट्रीम खोला। जून 2016 में वह महिला फायटर बैच का हिस्सा बनीं।
मार्च 2018 में मिग-21 से उड़ान भरी। मई 2019 में मिग-21 बाइसन पर डे आपरेशन कोर्स को पूरा किया। भावना की हालिया उपलब्धि से बाउर गांव में खुशी का माहौल है।

क्या है TACDE?
TACDE का अपना एक शानदार और गौरवशाली इतिहास रहा है। 1971 में इसे टैक्टिक्स एंड कॉम्बैट डेवलपमेंट एंड ट्रेनिंग स्क्वाड्रन के तौर पर स्थापित किया गया था, लेकिन 1972 में TACDE का नया नाम दिया गया।
इस संस्थान के काम में विमानों के लिए टैक्टिकल प्रक्रियाएं विकसित करना, स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर तैयार करना और फाइटर, ट्रांसपोर्ट विमान, हेलीकॉप्टर, कंट्रोलर और गाइडेड हथियारों से जुड़े सिद्धांतों पर पायलटों को ट्रेनिंग देना शामिल है। यह संस्थान नए शामिल किए गए विमानों, रडार और हथियार प्रणालियों का सर्विस में शामिल होने से पहले मूल्यांकन भी करता है।

TACDE की तुलना अक्सर अमेरिकी नौसेना के स्ट्राइक फाइटर टैक्टिक्स इंस्ट्रक्टर प्रोग्राम से की जाती है, जिसे टॉप गन के नाम से भी जाना जाता है। TACDE में इंस्ट्रक्टरों को उनकी पेशेवर उत्कृष्टता के आधार पर चुना जाता है और वे फाइटर और हेलीकॉप्टर स्ट्रीम के साथ-साथ रडार कंट्रोलर से जुड़े मिशन के लिए भी लिए जाते हैं।
इस कोर्स में ट्रेनिंग के आने वाले फाइटर पायलट को हवा और जमीन दोनों तरह के ऑपरेशन में एडवांस्ड कॉम्बैट ट्रेनिंग दी जाती है, जिससे वह ग्रेजुएट जटिल ऑपरेशनल माहौल में नेतृत्व करने के लिए तैयार हों।

क्या है भारतीय वायुसेना का टॉप गन टाइटल?
स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ ने ग्वालियर स्थित टैक्टिक्स एंड एयर कॉम्बैट डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट से प्रतिष्ठित फाइटर कॉम्बैट लीडर कोर्स पूरा करके इतिहास रच दिया है। वह भारतीय वायुसेना की पहली महिला टॉप गन बन गई हैं। सैन्य हलकों में टॉप गन शब्द काफी चर्चा में रहता है, लेकिन इसके सही अर्थ, चयन प्रक्रिया और इसकी भूमिका को आसान और विस्तृत भाषा में समझना जरूरी है।
भारतीय वायुसेना में टॉप गन कोई औपचारिक सैन्य पद, रैंक या आधिकारिक ओहदा नहीं है। यह वायुसेना के सबसे कठिन और प्रतिष्ठित फाइटर कॉम्बैट लीडर (FCL) कोर्स को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले चुनिंदा फाइटर पायलटों को मिलने वाली एक अनौपचारिक लेकिन बेहद सम्मानित पहचान है।
इस कोर्स की तुलना अमेरिकी नौसेना के मशहूर स्ट्राइक फाइटर टैक्टिक्स इंस्ट्रक्टर प्रोग्राम से की जाती है, जिसे वैश्विक स्तर पर टॉप गन के नाम से जाना जाता है।

कौन और कैसे चुना जाता है टॉप गन?
TACDE के फाइटर कॉम्बैट लीडर कोर्स में चयन की प्रक्रिया बेहद कठोर और पारदर्शी होती है। इस कोर्स के लिए केवल वही फाइटर पायलट चुने जाते हैं जो असाधारण उड़ान कौशल, उत्कृष्ट रणनीतिक सोच और युद्ध कला में अव्वल दर्जा प्रदर्शित करते हैं।
पायलटों का चयन तब होता है जब वे लड़ाकू विमानों पर कई वर्षों का अनुभव हासिल कर लेते हैं और दिन व रात के जटिल युद्ध अभियानों के लिए पूरी तरह क्वालिफाइड हो जाते हैं। पूरी वायुसेना के फाइटर पायलटों में से केवल शीर्ष 1 से 2 प्रतिशत पायलट ही इस 20-हफ्ते यानी लगभग 5 महीने के चुनौतीपूर्ण ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए शॉर्टलिस्ट हो पाते हैं।

कहां होती है टॉप गन की ट्रेनिंग?
इस प्रतिष्ठित कोर्स की ट्रेनिंग मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित टैक्टिक्स एंड एयर कॉम्बैट डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (TACDE) में आयोजित की जाती है। यह संस्थान भारतीय वायुसेना का सर्वोच्च फाइटर टैक्टिक्स केंद्र है, जिसे वायुसेना का मुख्य थिंक टैंक और युद्ध रणनीति निखारने की नर्सरी माना जाता है।
इस संस्थान की स्थापना 1 फरवरी 1971 को पंजाब के आदमपुर में हुई थी, जिसे 1972 में TACDE नाम देकर बाद में ग्वालियर स्थानांतरित कर दिया गया। देश की सुरक्षा में इसके अप्रतिम योगदान के लिए वर्ष 2009 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा इस संस्थान को प्रेसिडेंट्स स्टैंडर्ड से सम्मानित किया जा चुका है।

Source: Indian Air Force/X
क्या है टॉप गन की भूमिका?
इस 20-हफ्तों के कठिन प्रशिक्षण के दौरान पायलटों को हवा से हवा और हवा से जमीन दोनों तरह के अभियानों में उन्नत युद्धक रणनीतियों का गहन अभ्यास कराया जाता है। कोर्स पूरा करने के बाद एक टॉप गन पायलट की मुख्य जिम्मेदारी जटिल और उच्च-जोखिम वाले परिचालन माहौल में हवाई हमलों का नेतृत्व करना होता है।
इसके अलावा, ये अधिकारी अपनी-अपनी स्क्वाड्रन में वापस लौटकर नए युद्धक तरीके और मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOP) तैयार करते हैं, वायुसेना के अन्य फाइटर पायलटों को एडवांस कॉम्बैट ट्रेनिंग देते हैं और बेड़े में शामिल होने वाले नए लड़ाकू विमानों, रडार व मिसाइल प्रणालियों का सर्विस में आने से पहले परीक्षण एवं मूल्यांकन करते हैं।