Independence Day Poem: इन कविताओं को सुनकर तालियों की गूंज से झूम उठेगा हॉल, यहां देखें मिनटों में याद हो जाने वाली कविताएं
अगर आप भी 15 अगस्त को कविता प्रतियोगिता में भाग लेने वाले हैं, तो आपकी मदद के लिए यहां 5 ऐसी आसान कविताएं दी गई है। जिसे आप आसानी से याद कर सकते हैं।

Independence Day Poem in Hindi: यहां पढ़ें आसान कविता।
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भारत इस वर्ष 80वां स्वतंत्रता दिवस सेलिब्रेट कर रहा है।
यहां देखें 5 आसान कविताएं।
एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली। 15 अगस्त का दिन प्रत्येक भारतवासी के लिए बेहद ही खास होता है। भारत में इस दिन को राष्ट्रीय पर्व के रूप में सेलिब्रेट किया जाता है। इस दिन को खास व यादगार बनाने के लिए स्कूलों, कॉलेजों व अन्य संस्थानों में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है।
ऐसे में अगर आप या आपके बच्चे कविता प्रतियोगिता में भाग लेने वाले हैं और अपनी कविता से देशभक्ति का जादू पूरे होल में बिखेरना चाहते हैं, तो यहां 5 ऐसी आसान कविताएं दी गई है। जिसे कुछ ही मिनटों में आसानी से याद किया जा सकता है। साथ ही इन कविताओं को सुनकर पूरा हॉल तालियों की गूंज से झूम उठेगा।
आदरणीय प्रिंसिपल, शिक्षक और मेरे प्यारे दोस्तों। आज पूरा भारत 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। 15 अगस्त के अवसर पर मैं आप सभी के समक्ष एक कविता सुनाना चाहती/चाहती हूं।
कविता-1
नन्हा-मुन्ना राही हूं, देश का सिपाही हूं।
बोलो मेरे संग जय हिंद, जय हिंद, जय हिंद।
बड़ा होकर देश का सहारा बनूंगा।
दुनिया की आंखों का तारा बनूंगा।
रखूंगा ऊंचा तिरंगा परचम।
आगे ही आगे बढ़ाऊंगा कदम
दहने बाएं, दहने बाएं, थम।
नन्हा-मुन्ना राही हूं, देश का सिपाही हूं।
बोलो मेरे संग जय हिंद- जय हिंद- जय हिंद।

कविता-2
सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा
हम बुलबुलें हैं इस की ये गुलसितां हमारा
ग़ुर्बत में हों अगर हम रहता है दिल वतन में
समझो वहीं हमें भी दिल हो जहां हमारा
पर्बत वो सब से ऊंचा हम-साया आसमां का
वो संतरी हमारा वो पासबां हमारा
गोदी में खेलती हैं इस की हजारों नदियां
गुलशन है जिन के दम से रश्क-ए-जिनां हमारा
ऐ आब-रूद-ए-गंगा वो दिन है याद तुझ को
उतरा तिरे किनारे जब कारवां हमारा
मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना
हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्तां हमारा
यूनान ओ मिस्र ओ रूमा सब मिट गए जहां से
अब तक मगर है बाक़ी नाम-ओ-निशां हमारा
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी
सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
'इक़बाल' कोई महरम अपना नहीं जहां में
मालूम क्या किसी को दर्द-ए-निहां हमारा
कविता-3
हम नन्हे-नन्हे बच्चे हैं,
नादान उमर के कच्चे हैं,
पर अपनी धुन के सच्चे हैं!
जननी की जय-जय गाएंगे,
भारत की ध्वजा उड़ाएंगे!
अपना पथ कभी न छोड़ेंगे,
अपना प्रण कभी न तोड़ेंगे,
हिम्मत से नाता जोड़ेंगे!
हम हिम गिर पर चढ़ जाएंगे,
भारत की ध्वजा उड़ाएँगे!
हम भय से कभी न डोलेंगे,
अपनी ताकत को तोलेंगे,
माता के बंधन खोलेंगे!
हम इसकी शान बढ़ाएंगे,
भारत की ध्वजा उड़ाएंगे!

कविता-4
चाह नहीं मैं सुरबाला के
गहनों में गूंथा जाऊं
चाहत नहीं, प्रेमी-माला में
बिंध-मित्र को ललचाऊं
इच्छा नहीं, सम्राटों के शव
पर हे हरि, सम्मिलित जाऊं
चाह नहीं, देवों के सिर पर
चढ़ूँ भाग्य पर इठलाऊं
मुझे तोड़ना वनमाली
उस पथ पर दे दो
जिस पर
जावें वीर अनेक
कविता-5
विजयी विश्व तिरंगा प्यारा,
झंडा ऊंचा रहे हमारा।
सदा शक्ति बरसाने वाला,
प्रेम सुधा सरसाने वाला,
वीरों को हरषाने वाला,
मातृभूमि का तन-मन सारा।।
झंडा ऊंचा रहे हमारा।
स्वतंत्रता के भीषण रण में,
लखकर बढ़े जोश क्षण-क्षण में,
कांपे शत्रु देखकर मन में,
मिट जाए भय संकट सारा।।
झंडा ऊंचा रहे हमारा।
इस झंडे के नीचे निर्भय,
लें स्वराज्य यह अविचल निश्चय,
बोलें भारत माता की जय,
स्वतंत्रता हो ध्येय हमारा।।
झंडा ऊंचा रहे हमारा।
आओ! प्यारे वीरो, आओ।
देश-धर्म पर बलि-बलि जाओ,
एक साथ सब मिलकर गाओ
प्यारा भारत देश हमारा।।
झंडा ऊंचा रहे हमारा।
इसकी शान न जाने पाए,
चाहे जान भले ही जाए,
विश्व-विजय करके दिखलाएं,
तब होवे प्रण पूर्ण हमारा।।
झंडा ऊंचा रहे हमारा।
विजयी विश्व तिरंगा प्यारा,
झंडा ऊंचा रहे हमारा।
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