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कारगिल से पहली महिला आर्मी ऑफिसर बनीं स्टैंजिन त्सांगयांग, इंडियन आर्मी ने जर्नी को 'पहाड़ों से ऑलिव ग्रींस' दिया नाम

Published: Tue, 08 Sep 2026 12:39 PM (IST)Updated: Tue, 08 Sep 2026 12:59 PM (IST)

लद्दाख के कारगिल जिले से स्टैनजिन त्सांगयांग भारतीय सेना में शामिल होने वाली पहली महिला ऑफिसर बनी हैं। इंडियन आर्मी ...और पढ़ें

Stanzin Tsangyang की कहानी।

Stanzin Tsangyang की कहानी।

HighLights

  1. लद्दाख के कारगिल की पहली आर्मी ऑफिसर बनीं स्टैनजिन त्सांगयांग।

  2. माता-पिता के समर्थन और पहाडों को दिया श्रेय।

करियर डेस्क, नई दिल्ली। पहाड़ी क्षेत्रों की जिंदगी दूसरों से अलग मानी जाती है। उसमें भी अगर देश की सबसे बर्फीली जगह लद्दाख की बात आती है तो परेशानी और बाधाएं और भी ज्यादा होती हैं। लेकिन, यहीं से एक 24 वर्षीय लड़की ने वो कर दिखाया जो आज तक उस जगह से कोई नहीं कर सका। वो लड़की हैं स्टैंजिन त्सांगयांग जिन्होंने केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के कारगिल जिले से भारतीय सेना में पहली महिला अफसर बनने का गौरव हासिल किया है।

इंडियन आर्मी ने ट्वीट कर शेयर की जर्नी

सेना प्रशिक्षण कमान, भारतीय सेना (Army Training Command, Indian Army) ने भी उनकी जर्नी X पर ट्वीट कर शेयर किया है। इंडियन आर्मी ने उनकी जर्नी को नाम दिया "पहाड़ों से ओलिव ग्रीन्स (सेना की वर्दी) तक: ऑफिसर कैडेट (महिला) स्टैंजिन त्सांगयांग की कहानी"

स्टैंजिन त्सांगयांग की कहानी

इंडियन आर्मी की ओर से शेयर की गई जर्नी के अनुसार लद्दाख की जंस्कार घाटी में, ऊंचे पहाड़ों और कड़ाके की ठंड के बीच जन्मीं ऑफिसर कैडेट (महिला) स्टैनजिन त्सांगयांग ने कम उम्र से ही सहनशक्ति और दृढ़ता सीखी। परिवार की सबसे छोटी संतान होने के नाते, वह सबकी आंखों के सामने बड़ी हुईं; उन्हें परिवार के प्यार और अपनी मातृभूमि की मजबूती का सहारा मिला।

बेहतर भविष्य के लिए कम उम्र में छोड़ा घर

अच्छी शिक्षा और बेहतर भविष्य की चाह में, उन्होंने कम उम्र में ही अपने घर और गांव का आराम छोड़ दिया। उन्होंने लेह के लैमडॉन मॉडल स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की, जहां उन्होंने अपने परिवार से दूर हॉस्टल में लगभग चौदह साल बिताए। अपनी बेहतरीन पढ़ाई-लिखाई के कारण उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप मिली, जिसके बाद उन्होंने असम की तेजपुर यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।

NCC ज्वाइन करने के बाद सेना में जाने का सपना बुना

Indian Army में शामिल होने का उनका सफर कॉलेज के दिनों में NCC से जुड़ने के साथ शुरू हुआ, जहां उन्हें पहली बार आर्मी ऑफिसर बनने के अलग-अलग तरीकों के बारे में पता चला। पूरी तरह से आम नागरिक बैकग्राउंड से होने और परिवार या समुदाय में मिलिट्री सर्विस का कोई इतिहास न होने के बावजूद, ऑलिव-ग्रीन यूनिफॉर्म पहनने का सपना देखना एक अनोखी बात थी। फिर भी, उनके मन में देश की सेवा करने और अपने परिवार व समुदाय की पहली ऑफिसर बनकर वह यूनिफॉर्म पहनने की जबरदस्त इच्छा पैदा हुई।

माता-पिता के समर्थन और पहाड़ों से मिली हिम्मत

उनके लिए यह सफर मुश्किलों, चुनौतियों, त्याग और डाउट के पलों से भरा था, लेकिन उनके माता-पिता के अटूट समर्थन और पहाड़ों से मिली हिम्मत ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी।
5 सितंबर 2026 को OC (W) स्टैनजिन त्सांगयांग ने गर्व के साथ परेड ग्राउंड पर कारगिल जिले की पहली महिला अधिकारी और अपनी पीढ़ी की पहली ऐसी महिला बनी हैं जिन्होंने यह करने का कारनामा किया है। यह इस बात का सबूत है कि देश के सबसे दूर-दराज इलाकों में देखे गए सपने भी सबसे ऊंची चोटियों तक पहुंच सकते हैं।

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