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अब अदालत में गवाही देगा डेटा, नहीं जब्त होगा आपका फोन...MP में इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड रूल्स लागू करने की तैयारी

By Surendra DubeyEdited By: Ravindra Soni
Updated: Tue, 02 Jun 2026 07:14 PM (IST)

मध्य प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स रूल्स-2026 लागू करने की तैयारी में है, जिससे डिजिटल साक्ष्य अदालतों में बिना फोन जब्त किए प्रस्तुत किए जा सकेंगे। यह नियम डिजिटल साक्ष्यों की प्रामाणिकता सुनिश्चित करेगा और मध्य प्रदेश को ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बना सकता है।

डिजिटल साक्ष्य (प्रतीकात्म्क चित्र)

डिजिटल साक्ष्य (प्रतीकात्म्क चित्र)

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समय कम है?

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संक्षेप में पढ़ें

सुरेंद्र दुबे, जबलपुर। समय के साथ न्यायालयों की चौखट पर आने वाले साक्ष्यों का स्वरूप भी बदल रहा है। कभी सच की तलाश कागजों के पुलिंदों, दस्तावेजों और प्रत्यक्षदर्शियों की स्मृतियों में की जाती थी। आज वही सच मोबाइल की स्क्रीन पर चमकते संदेशों, सीसीटीवी कैमरों की निगाहों, वीडियो क्लिपों और डिजिटल लेन-देन के अदृश्य पदचिह्नों में दर्ज मिलता है। न्याय व्यवस्था भी इस परिवर्तन को स्वीकारते हुए तकनीक के साथ कदमताल कर रही है।

मध्य प्रदेश इस दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की दहलीज पर खड़ा है। प्रदेश में इलेक्ट्रानिक रिकॉर्ड्स रूल्स-2026 लागू होने की तैयारी अंतिम चरण में है। यह अधिसूचित हो जाता है, तो मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बन सकता है, जहां डिजिटल साक्ष्यों को अदालतों में प्रस्तुत करने, संरक्षित रखने और प्रमाणित करने की सुव्यवस्थित व्यवस्था कानूनी रूप ले लेगी।

मोबाइल जमा किए बिना पेश हो सकेंगे डिजिटल साक्ष्य

इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ आम नागरिक को मिलेगा। अब किसी व्यक्ति को अपनी वाट्सएप चैट, वीडियो रिकॉर्डिंग या अन्य डिजिटल साक्ष्य अदालत में पेश करने के लिए अपना मोबाइल फोन जमा नहीं कराना पड़ेगा। सच को साबित करने के लिए पूरा उपकरण नहीं, बल्कि उसका प्रमाणित डिजिटल स्वरूप पर्याप्त होगा।

नए नियमों के तहत डिजिटल साक्ष्य पोर्टल पर अपलोड होते ही उन्हें एक विशिष्ट पहचान संख्या और हैश वैल्यू प्रदान की जाएगी। यह हैश वैल्यू किसी डिजिटल दस्तावेज की उंगलियों के निशान जैसी होगी। वीडियो में एक कामा, एक डाट अथवा एक पिक्सेल का भी परिवर्तन हुआ तो उसकी पहचान बदल जाएगी और छेड़छाड़ तुरंत पकड़ में आ जाएगी। तकनीक यहां केवल सुविधा नहीं, बल्कि सत्य की प्रहरी बनकर खड़ी दिखाई देती है।

जांच व सुनवाई में बढ़ी डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका

दरअसल, नए आपराधिक कानूनों के लागू होने के बाद अदालतों में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का प्रवाह तेजी से बढ़ा है। तलाशी और जब्ती की अनिवार्य वीडियोग्राफी, सीसीटीवी फुटेज, काल डिटेल रिकार्ड, बैंकिंग ट्रेल और इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म के संवाद अब जांच और सुनवाई का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। सिविल विवादों में भी वाट्सएप संदेश और ई-मेल बातचीत अदालतों के सामने तथ्य प्रस्तुत कर रहे हैं। ऐसे में डिजिटल साक्ष्यों की विश्वसनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करना समय की मांग बन गया।

नए नियमों की एक और विशेषता यह है कि साक्ष्य केवल वीडियो या दस्तावेज के रूप में नहीं, बल्कि एक संपूर्ण डिजिटल पैकेज के रूप में सुरक्षित रहेगा। अपलोड का समय, हैश वैल्यू और अन्य तकनीकी विवरणों सहित तैयार की गई फाइल ही मूल इलेक्ट्रानिक रिकार्ड मानी जाएगी। इससे साक्ष्य की श्रृंखला और उसकी प्रामाणिकता पर अनावश्यक विवादों की संभावना कम होगी।

दरअसल, यह केवल नए नियमों की कहानी नहीं है। यह उस युग परिवर्तन का संकेत है, जहां अदालतों में अब केवल इंसान नहीं, डेटा भी बोलता है। जहां सच कागज के पन्नों से निकलकर डिजिटल फाइलों में बसता है; और जहां न्याय की यात्रा तकनीक के हाथ थामकर भविष्य की ओर बढ़ रही है। मध्य प्रदेश यदि इस पहल को सबसे पहले अमलीजामा पहनाता है, तो यह केवल प्रशासनिक उपलब्धि नहीं होगी, बल्कि न्याय व्यवस्था के डिजिटल युग में प्रवेश का एक महत्वपूर्ण अध्याय भी होगा।

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