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MP की ‘जामवंत गुफा’ से निकला मानव विकास का बड़ा रहस्य, मिली विशाल खोपड़ी और लंबी हड्डियां; अब होगी वैज्ञानिक जांच

Published: Sun, 23 Aug 2026 05:31 PM (IST)Updated: Sun, 23 Aug 2026 11:40 PM (IST)

मध्य प्रदेश के डिंडौरी की घोड़ामाड़ा गुफा में 8-10 लाख साल पुराने मानव अवशेष मिले हैं, जिनमें विशाल खोपड़ी और ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।

-प्रतीकात्मक चित्र।

HighLights

  1. डिंडौरी की घोड़ामाड़ा गुफा में मिले प्राचीन मानव अवशेष।

  2. विशाल खोपड़ी और लंबी हड्डियां 8-10 लाख साल पुरानी।

  3. वैज्ञानिक जांच से खुलेगा मानव विकास का बड़ा रहस्य।

शशिकांत तिवारी, भोपाल। मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले की घोड़ामाड़ा गुफा, जिसे स्थानीय बैगा आदिवासी जामवंत गुफा के नाम से भी जानते हैं, अब मानव विकास के इतिहास में एक अहम कड़ी साबित हो सकती है। गुफा से मिली बड़े आकार की खोपड़ी, लंबी पैर की हड्डियों और विशेष प्रकार की वोर्मियन बोन ने शोधकर्ताओं का ध्यान खींचा है। प्रारंभिक अध्ययन में इन अवशेषों को करीब 8 से 10 लाख वर्ष पुराने मानव विकास काल से जोड़कर देखा जा रहा है।

पुरातत्व और जीवाश्मों पर लंबे समय से अध्ययन कर रहीं गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. प्रियंका घोष को डिंडौरी भ्रमण के दौरान स्थानीय लोगों ने यह खोपड़ी दिखाई थी। खोपड़ी में वोर्मियन बोन की संरचना दिखाई देने के बाद उन्होंने फोरेंसिक विशेषज्ञों और एंथ्रोपोलॉजिस्ट से इसका परीक्षण कराया। शोध पत्रों और विशेषज्ञों के अध्ययन के आधार पर खोपड़ी के आकार, पैर की हड्डियों और जबड़े की बनावट को असामान्य बताया गया है।

होमो इरेक्टस से होमो सेपियंस के संक्रमण काल से जोड़ा

डॉ. प्रियंका घोष के अनुसार, वोर्मियन बोन की ऐसी संरचना मानव विकास के 8 से 10 लाख वर्ष पुराने काल में पाई जाती थी। यह वह दौर माना जाता है, जब मानव विकास की कड़ी होमो इरेक्टस से आगे बढ़ते हुए आधुनिक मानव होमो सेपियंस की दिशा में विकसित हो रही थी।

गुफा में मिली पैर की हड्डियों और खोपड़ी के आकार के आधार पर प्रारंभिक अनुमान है कि यह मानव आठ से 10 फीट तक लंबा हो सकता था। हालांकि, अवशेषों की वास्तविक उम्र और उनकी प्रजाति की पुष्टि के लिए वैज्ञानिक परीक्षण अभी बाकी हैं।

इसलिए नाम दिया ‘डिंडौरी मैन’

डॉ. घोष ने इस संभावित प्रागैतिहासिक मानव को ‘डिंडौरी मैन’ नाम दिया है। हालांकि यह अभी वैज्ञानिक रूप से स्थापित नाम नहीं है और आगे होने वाले परीक्षण ही इस खोज की वास्तविकता और महत्व स्पष्ट करेंगे।

यदि खोपड़ी और अन्य अवशेषों की उम्र 8 से 10 लाख वर्ष के आसपास प्रमाणित होती है, तो यह मध्य प्रदेश में मानव उपस्थिति के इतिहास को कई लाख वर्ष पीछे ले जा सकती है। वर्तमान में प्रदेश में प्रागैतिहासिक मानव की मौजूदगी का प्रमुख प्रमाण भीमबेटका के शैलचित्र हैं, जिन्हें लगभग 10 हजार वर्ष पुराना माना जाता है।

बड़े मानव समूह के आश्रय की संभावना

घोड़ामाड़ा गुफा काफी बड़ी और गहरी है। यहां पत्थर से बने हथियार मिलने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में विशेषज्ञों के लिए यह संभावना भी महत्वपूर्ण है कि प्राचीन समय में यह गुफा किसी बड़े मानव समूह के आश्रय स्थल के रूप में इस्तेमाल होती रही हो।

डिंडौरी पहले से ही जीवाश्मों के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है। नर्मदा नदी के आसपास डायनासोर और मूंगे के जीवाश्मों के साथ ऑस्ट्रेलिया में पाए जाने वाले नीलगिरी के पेड़ से मिलते-जुलते जीवाश्म भी मिलने की जानकारी है। जबलपुर से डिंडौरी तक की लमेटा भूगर्भीय संरचना भी क्षेत्र के वैज्ञानिक महत्व को बढ़ाती है।

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क्या होती है वोर्मियन बोन?

वोर्मियन बोन खोपड़ी की हड्डियों के जोड़ यानी स्यूचर के बीच बनने वाली छोटी, अतिरिक्त हड्डी होती है। सामान्य खोपड़ी में प्रमुख सपाट हड्डियों के बीच निर्धारित जोड़ होते हैं, जबकि वोर्मियन बोन इन जोड़ों के बीच अतिरिक्त हड्डी के रूप में दिखाई देती है। इसका आकार निश्चित नहीं होता।

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह संरचना आधुनिक मानव में भी दुर्लभ रूप से पाई जा सकती है। इसलिए केवल वोर्मियन बोन की मौजूदगी से किसी अवशेष की उम्र या प्रजाति तय नहीं की जा सकती। डिंडौरी में मिले अवशेषों में खोपड़ी के बड़े आकार, लंबी पैर की हड्डियों और बड़े जबड़े के कारण इनकी वैज्ञानिक जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कार्बन डेटिंग समेत होंगे कई वैज्ञानिक परीक्षण

राज्य पुरातत्व संचालनालय के आयुक्त एवं अभिलेखागार मदन कुमार नागरगोजे के अनुसार, घोड़ामाड़ा गुफा से मिली सामग्री को राज्य संग्रहालय में प्रदर्शित करने के लिए अलग गैलरी विकसित की जाएगी। इसके साथ ही ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति के माध्यम से भी इसके महत्व को बताया जाएगा।

खोपड़ी और अन्य अवशेषों की उम्र निर्धारित करने के लिए कार्बन डेटिंग समेत अन्य वैज्ञानिक परीक्षण कराए जाएंगे। इन परीक्षणों के परिणाम आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि अवशेष वास्तव में कितने पुराने हैं और मानव विकास के इतिहास में इनका क्या स्थान है।

अगर वैज्ञानिक जांच प्रारंभिक संकेतों की पुष्टि करती है, तो बैगा समाज की आस्था से जुड़ी जामवंत गुफा केवल धार्मिक और स्थानीय विरासत स्थल नहीं रहेगी, बल्कि प्रागैतिहासिक मानव विकास के अध्ययन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकती है।