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    बरगी क्रूज हादसा: चश्मदीद का बड़ा दावा- 'एम्बुलेंस में नहीं था मेडिकल स्टाफ', जांच आयोग को सौंपे वीडियो साक्ष्य

    Updated: Sun, 31 May 2026 04:31 PM (IST)

    बरगी बांध क्रूज हादसे की न्यायिक जांच में नए और गंभीर सवाल सामने आए हैं। प्रत्यक्षदर्शी नीरज मिश्रा ने आयोग को वीडियो और शिकायत सौंपकर दावा किया है कि ...और पढ़ें

    बरगी हादसे में डूबा क्रूज (फाइल फोटो)

    बरगी हादसे में डूबा क्रूज (फाइल फोटो)

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    डिजिटल डेस्क, जबलपुर। बरगी बांध क्रूज हादसे की न्यायिक जांच में अब नए और गंभीर सवाल सामने आने लगे हैं। हादसे के प्रत्यक्षदर्शी तथा बचाव अभियान में शामिल रहे बरगी निवासी नीरज मिश्रा ने न्यायिक जांच आयोग के समक्ष ऐसे तथ्य रखे हैं, जिनसे राहत एवं बचाव कार्यों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।

    आयोग को सौंपे वीडियो, पेन ड्राइव

    नीरज मिश्रा ने आयोग को वीडियो, पेन ड्राइव और 14 बिंदुओं पर आधारित विस्तृत शिकायत सौंपते हुए दावा किया है कि दुर्घटना के बाद मौके पर पहुंची 108 एम्बुलेंस में चालक के अलावा कोई मेडिकल स्टाफ मौजूद नहीं था। उनके अनुसार, इस वजह से कई घायलों को समय पर प्राथमिक उपचार नहीं मिल पाया, जबकि कुछ लोगों को स्थानीय नागरिकों ने पानी से बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया था।

    नहीं मिली त्वरित चिकित्सा सहायता

    आयोग के अध्यक्ष जस्टिस संजय द्विवेदी के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों में नीरज मिश्रा ने कहा है कि हादसे के बाद कई घायल तत्काल चिकित्सकीय सहायता के मोहताज थे, लेकिन मौके पर पर्याप्त चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी। उन्होंने एक वीडियो भी जांच आयोग को सौंपा है, जिसमें कथित रूप से एम्बुलेंस चालक स्वयं यह स्वीकार करता दिखाई दे रहा है कि वह अकेले घटनास्थल पर पहुंचा था।

    बचाव अभियान की सुस्ती पर सवाल

    शिकायत में राहत एवं बचाव अभियान की गति पर भी सवाल उठाए गए हैं। नीरज मिश्रा का आरोप है कि हादसे के बाद प्रशासनिक तंत्र अपेक्षित तत्परता नहीं दिखा सका। उनके मुताबिक घटना के बाद आपदा प्रबंधन से जुड़े संसाधन, मोटर बोट और प्रशिक्षित गोताखोर समय पर सक्रिय नहीं हो पाए, जिससे बचाव कार्य प्रभावित हुआ। उनका मानना है कि यदि आपदा राहत दल तत्काल मौके पर पहुंच जाता, तो जनहानि को कम किया जा सकता था।

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    सुरक्षा मानकों की अनदेखी

    शिकायत में सुरक्षा मानकों और बीमा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं। उन्होंने आयोग का ध्यान इस ओर दिलाया है कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के दिशा-निर्देशों के तहत जल पर्यटन गतिविधियों में बीमा और सुरक्षा उपकरणों की व्यवस्था अनिवार्य मानी जाती है। आरोप है कि दुर्घटनाग्रस्त क्रूज और उसमें सवार यात्रियों के लिए पर्याप्त बीमा सुरक्षा उपलब्ध नहीं थी। साथ ही लाइफ जैकेट, लाइफ बॉय, आपातकालीन संचार प्रणाली और मौसम संबंधी सुरक्षा प्रोटोकॉल के पालन की भी विस्तृत जांच की मांग की गई है।

    हादसे में 13 लोगों ने गंवाई थी जान

    उल्लेखनीय है कि 30 अप्रैल की शाम बरगी बांध के बैकवॉटर क्षेत्र में 41 यात्रियों को लेकर निकला क्रूज अचानक पानी में डूब गया था। इस हादसे में 13 लोगों की जान चली गई थी, जबकि 28 यात्रियों को बचा लिया गया था। घटना के बाद राज्य सरकार ने मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए थे।

    दो माह में सौंपनी है रिपोर्ट

    जांच आयोग अब तक पर्यटन विभाग के अधिकारियों, रिसॉर्ट प्रबंधन और क्रूज चालक सहित कई पक्षों के बयान दर्ज कर चुका है। आयोग को 60 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपनी है। प्रत्यक्षदर्शी द्वारा प्रस्तुत नए साक्ष्यों और आरोपों के बाद जांच का दायरा और व्यापक हो गया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आयोग की अंतिम रिपोर्ट हादसे के कारणों, सुरक्षा चूक और जिम्मेदारियों को लेकर क्या निष्कर्ष सामने लाती है।

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