विश्व बाघ दिवस पर बालाघाट से बुरी खबर: बाघिन गौरा के शावक का शव मिला, आपसी संघर्ष में मौत की आशंका
विश्व बाघ दिवस पर बालाघाट के सोनेवानी कंजर्वेशन रिजर्व में बाघिन गौरा के डेढ़ वर्षीय शावक 'सूखा' का शव मिला। प्रारंभिक जांच में आपसी संघर्ष को मौत का ...और पढ़ें

बाघ शावक का शव मिला।
HighLights
विश्व बाघ दिवस पर बालाघाट में शावक 'सूखा' का शव मिला।
डेढ़ वर्षीय शावक की मौत आपसी संघर्ष में होने की आशंका।
सोनेवानी रिजर्व में एक साल में दूसरी बाघ मौत से उठे सवाल।
डिजिटल डेस्क, जबलपुर। विश्व बाघ दिवस के अवसर पर बुधवार को बालाघाट जिले के सोनेवानी कंजर्वेशन रिजर्व लालबर्रा से निराशाजनक खबर सामने आई। दक्षिण वन मंडल बालाघाट सामान्य के अंतर्गत बहियाटिकुर सर्किल के कक्ष क्रमांक-443 में बुधवार को एक डेढ़ वर्षीय बाघ शावक का शव मिला। मृत बाघ की पहचान चर्चित बाघिन 'गौरा' के शावक 'सूखा' के रूप में की गई है। प्रारंभिक जांच में बाघ की मौत आपसी संघर्ष में होने की आशंका जताई गई है।
वन विभाग के अनुसार गश्त के दौरान अंबा माई रोड नाके के आगे बाघ शावक मृत अवस्था में मिला। उसके शरीर पर कई स्थानों पर गंभीर चोटों के निशान पाए गए। अधिकारियों का अनुमान है कि उसकी मौत करीब दो दिन पहले हुई है।
मां से बिछड़ने के बाद कमजोर हो गया था शावक
जानकारी के मुताबिक, 'सूखा' पिछले करीब दस महीने से अपनी मां 'गौरा' से बिछड़ा हुआ था। वन विभाग की टीमें लगातार उसकी तलाश कर रही थीं, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला था। अधिकारियों का मानना है कि मां से अलग होने के बाद पर्याप्त शिकार न मिलने के कारण वह कमजोर हो गया था और संभवतः दूसरे बाघ के साथ संघर्ष में अपनी जान गंवा बैठा।
विशेषज्ञ बताते हैं कि सामान्यतः बाघिन अपने शावकों को करीब तीन वर्ष तक अपने साथ रखती है, ताकि वे शिकार और जंगल में जीवित रहने की कला सीख सकें।
प्रोटोकॉल के तहत हुआ पोस्टमार्टम
घटना की सूचना मिलते ही मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) गौरव चौधरी सहित वन विभाग का अमला मौके पर पहुंचा। पूरे क्षेत्र को सील कर दिया गया। निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत पटवारी, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और कान्हा से पहुंचे तीन सदस्यीय पशु चिकित्सक दल की मौजूदगी में पोस्टमार्टम कराया गया।
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प्रारंभिक जांच में शरीर पर मिले गहरे घावों के आधार पर वन विभाग ने आपसी संघर्ष को मौत की संभावित वजह माना है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष पोस्टमार्टम और अन्य जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
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वन प्रबंधन पर उठे सवाल
सोनेवानी कंजर्वेशन रिजर्व में पिछले एक वर्ष के भीतर यह दूसरी बाघ मौत है। इससे पहले भी एक बाघिन की मौत के मामले में प्रोटोकॉल का पालन नहीं किए जाने को लेकर विवाद हुआ था। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बाद क्षेत्र में बाघ संरक्षण और वन प्रबंधन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि संरक्षण व्यवस्था और निगरानी मजबूत नहीं हुई तो इसका असर क्षेत्र में बाघों की संख्या के साथ-साथ भविष्य में पर्यटन पर भी पड़ सकता है।
बहियाटिकुर के कक्ष क्रमांक 443 में एक शावक मृत हालत में मिला है। जिसके शरीर पर गहने चोट के निशान पाए गए है। प्रथमदृष्टया आपसी संघर्ष में बाघ शावक की मौत होना प्रतीत हो रहा है। बाघ का पोस्टमार्टम कराकर अंतिम संस्कार कर दिया गया। वर्षाकाल प्रारंभ रहने से सोनेवानी में मानसून गश्ती लगातार की जा रही है।
- गौरव चौधरी, सीसीएफ, बालाघाट।