सावन के दूसरे सोमवार उज्जैन में आस्था का सैलाब, 'सुमा' पर सवार होकर नगर भ्रमण को निकले भगवान महाकाल
सावन के दूसरे सोमवार को उज्जैन में भगवान महाकाल की शाही सवारी निकली, जिसमें पहली बार मादा हाथी 'सुमा' शामिल हुई। यह सवारी चांदी की पालकी में चंद्रमौले ...और पढ़ें

सुमा हाथी पर मनमहेश रूप में सवार भगवान महाकाल, दर्शनों के लिए उमड़े भक्त। (सौजन्य: मंदिर समिति)
HighLights
रिमझिम फुहारों के बीच निकली श्रावण मास की दूसरी सवारी।
मादा हाथी 'सुमा' पहली बार महाकाल की सवारी में शामिल हुई।
46 साल बाद थमा रामू-श्यामू हाथी की सेवा का सफर।
डिजिटल डेस्क, उज्जैन। सावन के पावन सोमवार को उज्जैन एक बार फिर बाबा महाकाल की भक्ति में सराबोर नजर आया। ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर से भगवान महाकाल की दूसरी सवारी शाही ठाठ-बाट के साथ निकली। अवंतिकानाथ चांदी की पालकी में चंद्रमौलेश्वर स्वरूप और सुमा हाथी पर सवार मनमहेश स्वरूप में नगर भ्रमण पर निकले।
सावन की रिमझिम फुहारों के बीच निकली सवारी में शिवभक्ति के साथ लोक संस्कृति के रंग भी देखने को मिले। मार्ग में लोक कलाकारों के नृत्य और धार्मिक जयकारों ने माहौल को भक्तिमय बना दिया।
कलेक्टर ने पूजन कर रवाना की सवारी
कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने दोपहर 3:30 बजे भगवान महाकाल के रजत मुखारविंदों का विधिवत पूजन किया। इसके बाद सवारी को नगर भ्रमण के लिए रवाना किया गया।
सवारी शाम करीब 5:10 बजे शिप्रा तट पहुंची। यहां पुजारियों ने भगवान महाकाल की पूजा-अर्चना की। इसके बाद सवारी निर्धारित मार्ग से होते हुए शाम करीब 7 बजे वापस महाकाल मंदिर पहुंची।
पहली बार सवारी में शामिल हुई सुमा
इस बार महाकाल की सवारी में एक खास बदलाव देखने को मिला। करीब एक दशक से सवारी का हिस्सा रहे हाथी श्यामू के बीमार होने के कारण पशु चिकित्सा और वन विभाग ने इस बार मादा हाथी सुमा को शामिल करने का निर्णय लिया।
सुमा पहली बार भगवान महाकाल की सवारी में शामिल हुई। वह पूरे रास्ते शांत और सहज भाव से चलती रही। सवारी में सुमा के शामिल होने को लेकर श्रद्धालुओं में भी खास उत्साह नजर आया।

46 साल पुरानी सेवा पर लगा विराम
महाकाल की सवारी में हाथियों की सेवा का सिलसिला करीब 46 वर्षों से चला आ रहा था। रामू और श्यामू हाथी परिवार लंबे समय से भगवान महाकाल की सवारी में अपनी सेवाएं देते रहे हैं।
हालांकि, इस बार श्यामू की तबीयत खराब होने के कारण सुमा को शामिल करने का निर्णय लिया गया। इस फैसले की जानकारी सरमन गिरि महाराज को पहले नहीं थी। वह सोमवार सुबह श्यामू को लेकर मंदिर पहुंचे, जहां उन्हें बताया गया कि इस बार सवारी में सुमा शामिल होगी।
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इस बदलाव के साथ रामू-श्यामू हाथी परिवार की भगवान महाकाल की सेवा का 46 साल पुराना सिलसिला फिलहाल थम गया। श्रद्धालुओं के बीच श्यामू की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय रही।
सवारी में यह खास
- 5 किलो मीटर लंबा सवारी मार्ग
- 4 घंटे तक छाया रहा भक्ति का उल्लास
- 15 से अधिक दल शामिल हुए
- 1200 जवानों ने संभाली सुरक्षा व्यवस्था