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MP Food Safety: हर 56वां खाद्य नमूना गुणवत्ता में फेल, दूध-पनीर से मिठाई तक उठे सवाल

Updated: Thu, 13 Aug 2026 11:35 PM (IST)

एफएसएसएआई के आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में देशभर में जांचे गए हजारों खाद्य नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे, जिनमें मध्य प्रदेश में हर 56वां नम ...और पढ़ें

दूध में मिलावट (प्रतीकात्मक चित्र)

दूध में मिलावट (प्रतीकात्मक चित्र)

HighLights

  1. देशभर में हजारों खाद्य नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे।

  2. मध्य प्रदेश में हर 56वां खाद्य नमूना गुणवत्ता में फेल।

  3. असुरक्षित भोजन से 200 से अधिक बीमारियों का खतरा।

डिजिटल डेस्क, इंदौर। देशभर में खाद्य पदार्थों में मिलावट के साथ-साथ गुणवत्ता मानकों की अनदेखी भी बड़ी चिंता बनती जा रही है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के आंकड़े इस स्थिति की गंभीर तस्वीर पेश करते हैं। वर्ष 2024-25 में देशभर में जांचे गए खाद्य नमूनों में हजारों नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। मध्य प्रदेश में भी स्थिति चिंताजनक रही, जहां हर 56वां नमूना गुणवत्ता मानक से कम पाया गया।

एफएसएसएआई के अनुसार, वर्ष 2024-25 में देशभर में कुल 6,47,408 खाद्य नमूनों की जांच की गई। इनमें से 34,388 नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिले। इनमें 22,516 नमूने यानी करीब 65.5 प्रतिशत गुणवत्ता मानक से कम पाए गए। वहीं 7,945 नमूने असुरक्षित मिले, जबकि 3,931 नमूनों में लेबलिंग और अन्य अनुपालन संबंधी खामियां सामने आईं।

मिलावट ही नहीं, घटिया गुणवत्ता भी बड़ा खतरा

खाद्य सुरक्षा का मुद्दा केवल जहरीले या सीधे स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित खाद्य पदार्थों तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञों के मुताबिक, निर्धारित गुणवत्ता से कम उत्पाद भी लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं।

दूध, पनीर, मावा, मिठाई और अन्य रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में खाद्य पदार्थों की नियमित जांच और मानकों का सख्ती से पालन कराना उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है।

MP में 1,012 नमूने गुणवत्ता में कमजोर

खराब गुणवत्ता वाले खाद्य नमूनों के मामले में मध्य प्रदेश देश के प्रमुख राज्यों में शामिल रहा। आंकड़ों के मुताबिक विभिन्न राज्यों में गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले नमूनों की संख्या इस प्रकार रही

उत्तर प्रदेश --- 12,693
राजस्थान --- 2,832
मध्य प्रदेश --- 1,012
गुजरात --- 763
महाराष्ट्र --- 555
पंजाब --- 480

उत्तर प्रदेश में ऐसे नमूनों की संख्या सबसे अधिक रही, जबकि मध्य प्रदेश में 1,012 नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों से कम पाए गए।

असुरक्षित भोजन से 200 से ज्यादा बीमारियों का खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार दूषित या असुरक्षित भोजन का असर तत्काल भी हो सकता है और लंबे समय में भी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी और रसायनों से दूषित भोजन 200 से अधिक बीमारियों का कारण बन सकता है।

इनमें दस्त, उल्टी और पेट के संक्रमण जैसी सामान्य बीमारियों से लेकर गंभीर रोगों तक का खतरा शामिल है। बच्चों को इसका जोखिम विशेष रूप से अधिक माना जाता है।

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बच्चों के स्वास्थ्य पर ज्यादा असर

असुरक्षित भोजन में मौजूद कुछ रसायन बच्चों के विकास को प्रभावित कर सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सीसा और अकार्बनिक आर्सेनिक जैसे तत्वों का लंबे समय तक संपर्क हृदय रोग और कैंसर जैसे गंभीर स्वास्थ्य जोखिम बढ़ा सकता है। बच्चों में रासायनिक पदार्थों का संपर्क उनके मस्तिष्क के विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

ऐसे में खाद्य पदार्थों की जांच केवल मिलावट पकड़ने तक सीमित रखने के बजाय गुणवत्ता, सुरक्षा और लेबलिंग मानकों की सख्त निगरानी पर भी जोर देना जरूरी है। एफएसएसएआई के आंकड़े संकेत देते हैं कि उपभोक्ताओं को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने के लिए निगरानी तंत्र को और मजबूत करने की जरूरत है।