Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    भोजशाला केस की हाईकोर्ट में सुनवाई : ASI ने कहा- 124 वर्ष में कई बार सर्वे, हर बार मिलीं मूर्तियां व पत्थरों पर संस्कृत में उकेरे श्लोक

    Updated: Mon, 20 Apr 2026 09:01 PM (IST)

    धार जिले की भोजशाला मामले में हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। एएसआई ने कोर्ट को बताया कि सर्वे में मूर्तियां और संस्कृत में लिखे श्लोक मिले हैं। ...और पढ़ें

    धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला (फाइल फोटो)

    धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला (फाइल फोटो)

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    डिजिटल डेस्क, इंदौर। मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला मामले में चल रही नियमित सुनवाई में हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के समक्ष सोमवार से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने तर्क रखने प्रारंभ कर दिए। एएसआई की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील जैन ने हाई कोर्ट को बताया कि पिछले 124 वर्ष में भोजशाला का कई बार सर्वे हो चुका है।

    1902-03 में हुआ था पहला सर्वे

    एएसआई ने वर्ष 1902-03 में भोजशाला का सर्वे किया था। इसके अलावा भी निजी स्तर पर कई अन्य सर्वे हुए। एएसआई सहित सभी सर्वे में भोजशाला से मूर्तियां और पत्थरों पर संस्कृत में उकेरे श्लोक मिले हैं। कोर्ट ने वर्ष 2024 में एएसआई को अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए सर्वे के लिए आदेशित किया गया था। इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत की जा चुकी है। पूर्व के सर्वे की तरह इस बार भी सर्वे में मूर्तियां और संस्कृत में लिखे श्लोक मिले हैं। एडवोकेट जैन ने उन पुस्तकों का उल्लेख भी किया, जिनमें भोजशाला के इतिहास की जानकारी दी गई है।

    1908 में पुरातत्व महत्व की इमारत में किया था शामिल

    एएसआई की ओर से बताया गया कि भोजशाला को वर्ष 1908 में ही पुरातत्व महत्व की इमारतों की सूची में शामिल कर लिया गया था। वर्ष 1958 में इसे संरक्षित भवन की सूची में शामिल किया गया। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह सवाल भी उठाया कि भोजशाला और कमाल मौला मस्जिद का नाम किस दस्तावेज में सबसे पहले आया, क्या इस बारे में कभी कोई नोटिफिकेशन जारी हुआ था।

    इस पर आनलाइन जुड़े हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के वकील ने बताया कि वर्ष 2003 में प्रस्तुत एक याचिका में इसका उल्लेख किया गया था। एएसआई की ओर से इस संबंध में वर्ष 1958 में जारी गजट का उल्लेख किया।

    खबरें और भी

    98 दिन चले सर्वे पर रखेंगे तर्क

    वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील जैन मंगलवार को एएसआई द्वारा हाल ही में किए गए 98 दिन लंबे सर्वे की रिपोर्ट के बारे में तर्क रखेंगे। वे कोर्ट को बताएंगे कि 98 दिन चले सर्वे में एएसआई को भोजशाला में क्या-क्या मिला। एएसआई की ओर से तर्क पूरे होने के बाद मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद तर्क रखेंगे।

    इंटरविनर ने कहा- मस्जिद होने के हैं प्रमाण

    याचिकाओं में इंटरविनर बने धार निवासी जिब्रान अंसारी, फिरोज और अयाज की ओर से शनिवार को तर्क अधूरे रहे थे। सोमवार को उनके वकील सैयद अशहर अली वारसी ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मंदिर के लिए सबसे ज्यादा जरूरी होता है शिखर, गोपुरम, मंडप, गर्भगृह, लेकिन भोजशाला निर्माण में ये हैं ही नहीं। मस्जिद के लिए जरूरी किबला जिसकी दीवार मक्का की ओर हो वह यहां मौजूद है। इसके अलावा मेहराब, सहन यानी वो खुला आंगन जहां नमाज पढ़ी जाती है वह भी मौजूद है। वजू करने के लिए जरूरी पानी के सोते सहित इमाम का मिंबर भी यहां हैं, जो बताते हैं कि यह मस्जिद ही थी।

    यह भी पढ़ें- धार भोजशाला केस : हाई कोर्ट में मंदिर पक्ष ने दिया इस्लामी सिद्धांत का हवाला, कहा- जबरन कब्जे की जमीन पर मस्जिद मान्य नहीं

    उन्होंने कहा कि यहां पूर्व में भी नमाज होती रही है। पुराने दस्तावेजों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यहां मस्जिद होने का उल्लेख है। उन्होंने कहा कि पूर्व में राजा भोज द्वारा मंदिर का निर्माण करने के लिए जो तथ्य कोर्ट के सामने रखे गए हैं उनका कोई प्रमाणित दस्तावेज या शपथ पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया है। उन्होंने वर्ष 1935 में धार रियासत के गजट के साथ ही 1952 में जारी एएसआई कमिश्नर की रिपोर्ट का हवाला भी दिया।