छतरपुर में सड़क-पुल-बिजली के लिए 40 किमी पैदल चले बच्चे, 18 घंटे चला आंदोलन; देर रात विधायक के आश्वासन पर माने
छतरपुर के टटम गांव में सड़क, पुल और बिजली की मांग को लेकर स्कूली बच्चों और ग्रामीणों ने 40 किलोमीटर ...और पढ़ें

बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर आंदोलन करती स्कूली छात्राएं व ग्रामीण। (फोटो- जागरण)
HighLights
टटम गांव के बच्चों-ग्रामीणों ने 40 किमी पैदल मार्च किया।
सड़क, पुल और बिजली की मांग को लेकर आंदोलन।
विधायक के आश्वासन पर 18 घंटे बाद प्रदर्शन समाप्त।
डिजिटल डेस्क, ग्वालियर। स्वतंत्रता दिवस पर छतरपुर जिले के महाराजपुर क्षेत्र के टटम गांव से सामने आई तस्वीर ने ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए। सड़क, पुल और बिजली की मांग को लेकर स्कूली बच्चे और ग्रामीण करीब 40 किलोमीटर पैदल चलते हुए आंदोलन पर निकल पड़े। करीब 18 घंटे तक चले इस प्रदर्शन का देर रात नौगांव सर्किट हाउस में विधायक कामाख्या प्रताप सिंह से बातचीत के बाद समाधान हुआ।
रात करीब 1:30 बजे विधायक ने ग्रामीणों की तीनों प्रमुख मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया और तीन-चार दिन में टेंडर प्रक्रिया शुरू कराने की बात कही। इसके बाद आंदोलन समाप्त कर दिया गया। बच्चे और ग्रामीण रविवार देर रात करीब 2:30 बजे वापस गांव लौटे।
तीन मांगों को लेकर सड़क पर उतरे बच्चे व ग्रामीण
टटम गांव के लोगों की मुख्य मांगों में मढ़ापुरवा से टटम तक सड़क, टपरन पुरवा से टटम तक पुल और टटम के वार्ड नंबर 20 में बिजली की सुविधा शामिल है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और पुल के अभाव में बारिश के दौरान गांव का संपर्क बेहद कठिन हो जाता है। नालों और खराब रास्तों के कारण बच्चों को स्कूल पहुंचने में भी परेशानी होती है।
ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से इन समस्याओं को अधिकारियों के सामने रखा जा रहा है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हुआ। इसी वजह से इस बार बच्चों को भी साथ लेकर पैदल आंदोलन करने का फैसला लिया गया।

तहसील से शुरू हुआ पैदल मार्च, बारिश में भी डटे रहे
शनिवार शाम करीब सात बजे बच्चे और ग्रामीण महाराजपुर तहसील पहुंचे। अधिकारियों से बातचीत के बाद जब उन्हें मांगों पर ठोस आश्वासन नहीं मिला तो उन्होंने छतरपुर की ओर पैदल मार्च शुरू कर दिया।
महाराजपुर थाना क्षेत्र की सीमा के पास उन्हें विधायक से मुलाकात की सूचना मिली। प्रदर्शनकारी एक पेट्रोल पंप पर रुक गए और विधायक का इंतजार करने लगे। विधायक के तत्काल नहीं पहुंचने पर कुछ लोगों ने नारेबाजी भी की। तेज बारिश के बावजूद ग्रामीण और बच्चे कई घंटे तक मौके पर डटे रहे।
रात करीब 11 बजे प्रदर्शनकारियों को विधायक के आलीपुरा स्थित निजी आवास पर बुलाए जाने की सूचना मिली। हालांकि, ग्रामीणों ने निजी घर पर जाने से इंकार करते हुए सार्वजनिक स्थान पर बातचीत की मांग रखी।
रात 1:30 बजे सर्किट हाउस में हुई बातचीत
इसके बाद प्रशासन ने वाहनों की व्यवस्था की और पांच-छह बच्चियों सहित ग्रामीणों के प्रतिनिधिमंडल को अधिकारियों के साथ नौगांव सर्किट हाउस भेजा गया। यहां रात करीब 1:30 बजे विधायक कामाख्या प्रताप सिंह के साथ बातचीत हुई।
ग्रामीण प्रतिनिधि सूरज अहिरवार के मुताबिक, विधायक ने सड़क, पुल और बिजली से जुड़ी तीनों मांगों पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया। साथ ही तीन-चार दिन में टेंडर प्रक्रिया शुरू कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने आंदोलन समाप्त करने का फैसला लिया।

किताबों की जगह हाथों में दिखे मांगों के सवाल
आंदोलन के दौरान बच्चे और ग्रामीण बारिश में भीगते हुए महाराजपुर से गढ़ीमलहरा के बीच तक पहुंचे। उनका कहना था कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई का भरोसा नहीं मिलता, वे वापस नहीं लौटेंगे। जिन हाथों में किताबें और स्कूल बैग होने चाहिए थे, उन्हीं हाथों में सड़क, पुल और बिजली की मांगों से जुड़े सवाल थे। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार उपेक्षा के बाद उन्हें बच्चों के साथ सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा।
यह भी पढ़ें- ग्वालियर में मीटर चेक करने पहुंचे बिजली कर्मचारी को बंधक बनाकर कुत्तों से कटवाया, बंदूक दिखाकर धमकाया; 17 जगह जख्म
अब आश्वासन को अमल में बदलने की चुनौती
करीब 18 घंटे बाद आंदोलन तो खत्म हो गया, लेकिन ग्रामीणों की नजर अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के अगले कदम पर है। तीन-चार दिन में टेंडर प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन मिला है। अब देखना होगा कि यह आश्वासन कितनी जल्दी कागज से निकलकर जमीन पर दिखाई देता है और टटम गांव के लोगों को सड़क, पुल और बिजली की सुविधाएं कब तक मिल पाती हैं।
