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'मंदिर में अखंड ज्योति जल रही...' यह कहकर पुजारी ने बाढ़ राहत टीम के साथ जाने से किया इनकार; झमाझम बारिश से मुरैना पानी-पानी

Published: Mon, 07 Sep 2026 08:14 PM (IST)

मुरैना के डाबरीपुरा स्थित सिद्ध बाबा मंदिर पानी से घिरा, पुजारी तीन दिन से अकेले। मनफूल का पुरा गांव में भी बाढ़ में फंसे ग्रामीणों ने एसडीईआरएफ टीम को लौटाया।

पानी से घिरे मंदिर में मौजूद पुजारी से चर्चा करती एसडीईआरएफ की टीम। (वीडियो ग्रैब)

पानी से घिरे मंदिर में मौजूद पुजारी से चर्चा करती एसडीईआरएफ की टीम। (वीडियो ग्रैब)

HighLights

  1. पुजारी ने अखंड ज्योति के लिए बाढ़ में मंदिर नहीं छोड़ा।

  2. मनफूल का पुरा के 14 ग्रामीणों ने रेस्क्यू से इनकार किया।

  3. हजारों बीघा बाजरा फसल पानी में डूबी, किसानों को चिंता।

डिजिटल डेस्क, मुरैना। ग्वालियर-चंबल अंचल में सोमवार को बारिश थमने से नदियों का जलस्तर नीचे आने लगा है, लेकिन बाढ़ का संकट अभी पूरी तरह टला नहीं है। कई गांव अब भी पानी से घिरे हुए हैं, जबकि क्वारी और आसन नदियों के किनारे खेतों में करीब 12 फीट तक पानी भरा हुआ है। हजारों बीघा में खड़ी बाजरा की फसल पिछले चार दिनों से पानी में डूबी है।

सिविल लाइन थाना क्षेत्र के डाबरीपुरा गांव स्थित सिद्ध बाबा मंदिर भी पिछले तीन दिनों से चारों ओर पानी से घिरा है। इसके बावजूद मंदिर के पुजारी नरसिंह दास ने वहां से निकलने से इनकार कर दिया। सोमवार को आपदा प्रबंधन की टीम उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए पहुंची, लेकिन पुजारी ने साफ कह दिया कि मंदिर में अखंड ज्योति जल रही है और वह उसे छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे।

‘अखंड ज्योति नहीं छोड़ूंगा’... रेस्क्यू टीम को लौटना पड़ा

आपदा प्रबंधन की टीम ने पुजारी को काफी समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह मंदिर छोड़ने के लिए तैयार नहीं हुए। इसके बाद टीम ने उन्हें मंदिर में ही खाद्य सामग्री और जरूरत का अन्य सामान पहुंचाया, ताकि वे वहां सुरक्षित रह सकें।

ग्रामीणों के मुताबिक, पिछले साल भी बाढ़ के दौरान सिद्ध बाबा मंदिर पानी से घिरकर टापू में तब्दील हो गया था। उस समय भी पुजारी को काफी मशक्कत के बाद रेस्क्यू किया जा सका था।

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मनफूल का पुरा में भी 14 लोग बाढ़ में फंसे

मनफूल का पुरा गांव में भी 14 ग्रामीण बाढ़ के पानी में फंस गए। सूचना मिलने पर एसडीईआरएफ की टीम उन्हें सुरक्षित निकालने पहुंची, लेकिन ग्रामीणों ने भी गांव छोड़ने से इनकार कर दिया।

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ग्रामीणों के नहीं मानने पर एसडीईआरएफ टीम ने उन्हें खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई और वापस लौट गई। प्रशासन की टीमें लगातार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए हैं।

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चंबल का जलस्तर 130 से घटकर 127.4 मीटर

चंबल नदी का जलस्तर अब 130 मीटर से घटकर 127.4 मीटर पर आ गया है। इससे राहत के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन निचले इलाकों में पानी अभी भी जमा है। खेतों में पानी भरे रहने से किसानों की चिंता बढ़ गई है और हजारों बीघा बाजरा की फसल को नुकसान की आशंका है।

मौसम विज्ञानी डॉ. हरवेंद्र सिंह के अनुसार जिले में अगले दो दिनों के दौरान कुछ स्थानों पर तेज वर्षा हो सकती है। ऐसे में प्रशासन और ग्रामीणों को अभी पूरी तरह सतर्क रहने की जरूरत है।