अमेरिकी नागरिकों से ठगी का मास्टरमाइंड 47 दिन बाद भी फरार, यूपी-गुजरात तक तलाश में जुटी ग्वालियर पुलिस
ग्वालियर पुलिस अमेरिकी नागरिकों से ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर के सरगना प्रबल परिहार को 47 दिन बाद भी ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।
HighLights
फर्जी कॉल सेंटर का सरगना प्रबल परिहार 47 दिन से फरार।
ग्वालियर पुलिस गुजरात, यूपी में लगातार दे रही दबिश।
अमेरिकी नागरिकों से बैंक ऋण दिलाने के नाम पर ठगी।
डिजिटल डेस्क, ग्वालियर। बैंक ऋण दिलाने का झांसा देकर अमेरिकी नागरिकों से ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर गिरोह का पर्दाफाश हुए 47 दिन बीत चुके हैं, लेकिन इसका सरगना प्रबल परिहार अब भी पुलिस की गिरफ्त से दूर है। उसकी तलाश में पुलिस की विशेष टीमें गुजरात के अहमदाबाद से लेकर उत्तर प्रदेश के कई जिलों तक लगातार दबिश दे रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी से बचने के लिए प्रबल लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा है। इसी वजह से पुलिस की कई टीमों की लगातार कोशिशों के बावजूद वह पकड़ में नहीं आ सका है।
होटल के कमरे से चल रहा था फर्जी कॉल सेंटर
मोहना थाना पुलिस ने 26 जुलाई को होटल के एक कमरे में छापेमारी कर फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया था। यहां से चार युवकों को गिरफ्तार किया गया था। जांच में सामने आया कि आरोपित खुद को एक लेंडिंग क्लब का सदस्य बताकर अमेरिकी नागरिकों को अपने जाल में फंसाते थे।
गिरोह लोगों को बैंक ऋण दिलाने का भरोसा देता था और इसके बदले कमीशन के नाम पर विभिन्न कंपनियों के गिफ्ट वाउचर हासिल करता था। बाद में इन वाउचरों को रुपये में बदल लिया जाता था।
ये चार आरोपित हुए थे गिरफ्तार
पुलिस ने मामले में अभिषेक राजपूत, आर्यन राजपूत, नरेंद्र सिंह परिहार और शुभोम घोष को गिरफ्तार किया था। इनमें एक आरोपित अहमदाबाद, एक झांसी, एक नागालैंड और अन्य गुजरात से जुड़े बताए गए हैं।
पूरी रकम लेकर फरार हुआ सरगना
जांच में पुलिस के सामने यह भी आया कि गिरोह प्रतिदिन औसतन करीब 50 हजार रुपये की ठगी कर रहा था। ठगी से मिलने वाली रकम मुख्य रूप से सरगना प्रबल परिहार के खाते तक पहुंचती थी।
बताया जा रहा है कि गिरोह का राजफाश होने से पहले ही प्रबल रकम लेकर फरार हो गया। गिरफ्तार आरोपितों के खातों से पुलिस को केवल करीब 23 हजार रुपये ही मिले हैं।
यह भी पढ़ें- पहले सस्ते लोन का ऑफर, फिर AI से अश्लील फोटो का खौफ; ग्वालियर में गृहिणी से 4 लाख की साइबर ठगी
वैतनिक कर्मचारी थे बाकी सदस्य
जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी कॉल सेंटर में काम करने वाले गिरफ्तार युवकों को करीब 20 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाता था। उनके रहने और खाने का खर्च भी गिरोह की ओर से उठाया जाता था, जबकि ठगी से होने वाली बाकी रकम सरगना प्रबल परिहार के पास पहुंचती थी।
अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती गिरोह के मुख्य सरगना तक पहुंचना और ठगी से अर्जित रकम का पूरा हिसाब खंगालना है। विशेष टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं, लेकिन 47 दिन बाद भी मास्टरमाइंड का पुलिस की पकड़ से बाहर रहना जांच के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
अमेरिकी नागरिकों से ठगी के मामले में अभी गिरोह का सरगना नहीं पकड़ा है। उसके गुजरात और उप्र के तीन ठिकानों पर दबिश भी दी, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
-विनय सिंह तोमर, थाना प्रभारी, मोहना
