कूनो में फिर 'गायब' हुई मादा चीता निर्वा: सेटेलाइट सिग्नल बंद, ड्रोन से लेकर 100 वनकर्मी तलाश में जुटे
कूनो नेशनल पार्क में मादा चीता निर्वा एक बार फिर लापता हो गई है, जिसकी सैटेलाइट कॉलर आईडी से लोकेशन ...और पढ़ें

HighLights
मादा चीता निर्वा की सैटेलाइट कॉलर आईडी से लोकेशन नहीं मिल रही।
उसकी तलाश में पांच टीमें, ड्रोन और 100 से अधिक वनकर्मी जुटे।
जुलाई 2023 में भी निर्वा 22 दिनों तक निगरानी से बाहर रही थी।
डिजिटल डेस्क, ग्वालियर। श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में मादा चीता निर्वा एक बार फिर वन विभाग की निगरानी से बाहर हो गई है। पिछले चार-पांच दिनों से उसकी सैटेलाइट कॉलर आईडी से लोकेशन नहीं मिल रही है। इसके बाद कूनो प्रबंधन ने उसकी तलाश के लिए पांच टीमें मैदान में उतारी हैं। 100 से अधिक वनकर्मी जंगल की खाक छान रहे हैं, जबकि संभावित इलाकों पर नजर रखने के लिए ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों की भी मदद ली जा रही है।
अधिकारियों के मुताबिक निर्वा के बीएचएफ सिग्नल जरूर मिल रहे हैं, लेकिन इसकी प्रभावी रेंज करीब 500 मीटर तक ही सीमित है। ऐसे में जंगल के बड़े क्षेत्र में उसकी सटीक लोकेशन तलाशना चुनौती बना हुआ है।
बारिश से सैटेलाइट सिग्नल प्रभावित होने की आशंका
पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ डॉ. समीता राजौरा ने बताया कि निर्वा की सैटेलाइट कॉलर आईडी से पिछले चार-पांच दिनों से सिग्नल प्राप्त नहीं हो रहे हैं। उन्होंने बारिश के कारण सैटेलाइट सिग्नल प्रभावित होने की आशंका भी जताई है। उन्होंने बताया कि निर्वा की तलाश के लिए पांच टीमें लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। जैसे ही उसके संबंध में कोई ठोस जानकारी मिलती है, उसे साझा किया जाएगा।
2023 में भी 22 दिन तक लापता रही थी निर्वा
निर्वा के सिग्नल गायब होने का यह पहला मामला नहीं है। जुलाई 2023 में भी वह करीब 22 दिनों तक वन विभाग की निगरानी से बाहर रही थी। उस दौरान उसकी कॉलर आईडी से सैटेलाइट लोकेशन मिलना बंद हो गई थी। बाद में करीब छह घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद उसे सुरक्षित पकड़ लिया गया था।
अब एक बार फिर सिग्नल बंद होने से कूनो प्रबंधन की चिंता बढ़ गई है और उसकी तलाश तेज कर दी गई है।
शावक मां से अलग होकर जी रहे स्वतंत्र जीवन
यहां पर यह बता दें कि निर्वा के साथ उसके नर और मादा शावक भी थे। अधिकारियों के अनुसार दोनों शावक अब उससे अलग हो गए हैं। वन विभाग इसे चीतों के जीवनचक्र की स्वाभाविक प्रक्रिया बता रहा है। जब शावक शिकार करने और खुद जीवनयापन करने में सक्षम हो जाते हैं, तो वे मां से अलग होकर स्वतंत्र क्षेत्र तलाशने लगते हैं।
वहीं, वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने निर्वा के सिग्नल नहीं मिलने को लेकर कूनो प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कूनो में तेंदुओं के शिकार और चीतों को बार-बार बेहोश किए जाने जैसे मुद्दों का हवाला देते हुए वन विभाग के सुरक्षा एवं निगरानी संबंधी दावों पर सवाल खड़े किए हैं।
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500 मीटर की बीएचएफ रेंज बनी चुनौती
सैटेलाइट कॉलर से लोकेशन नहीं मिलने की स्थिति में फिलहाल वन विभाग बीएचएफ सिग्नल के सहारे निर्वा तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है। हालांकि इसकी सीमित रेंज के कारण टीमों को बड़े इलाके में सर्चिंग करनी पड़ रही है।
ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के जरिए भी संभावित क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है। वन विभाग का कहना है कि तलाश अभियान लगातार जारी है और निर्वा का जल्द पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
