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ग्वालियर में बिना जमीन आवंटन FCI ने तान दिए गोदाम, तहसीलदार ने भेजा 121 करोड़ का नोटिस; HC ने दिया अहम निर्देश

Published: Tue, 25 Aug 2026 11:55 AM (IST)

1976 में ग्वालियर के लक्ष्मीगंज सब्जी मंडी के पीछे एफसीआई ने नौ बीघा जमीन पर कर लिया था निर्माण। माफी ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।

-प्रतीकात्मक चित्र।

डिजिटल डेस्क, ग्वालियर। फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) ने बिना जमीन आवंटन के नौ बीघा सरकारी जमीन पर गोदाम बना लिए और जब माफी के मंदिरों को लेकर प्रशासन ने जांच की तो इस जमीन का खुलासा हुआ। राजस्व की ओर से एफसीआई को एक अरब 21 करोड़ से ज्यादा का डिमांड नोटिस दिया गया।

50 साल पहले किया था निर्माण

इसको लेकर एफसीआई ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई, जिस पर कोर्ट ने निर्धारित समय अवधि में आधी राशि जमा करने के निर्देश दिए हैं। आधी राशि जमा करने के बाद ही शेष राशि पर स्थगन माना जाएगा। इस जमीन पर 1976 में एफसीआई ने निर्माण कर लिया था और ऐसा आवंटन की प्रत्याशा में करना बताया। अब इस मामले में एफसीआई की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

एफसीआई ने मांगा स्थगन

जानकारी के अनुसार, एफसीआई द्वारा एक अरब 21 करोड 56 लाख 12 हजार 27 रुपये का डिमांड नोटिस जारी करने पर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई। डिमांड नोटिस के विरुद्ध स्थगन आदेश की मांग की, जिसमें उच्च न्यायालय द्वारा अपने आदेश में एफसीआई को निर्देशित किया कि वह तहसीलदार द्वारा जारी किए गए डिमांड नोटिस की नियत राशि की 50 प्रतिशत यानी 60 करोड 78 लाख छह हजार 163 मात्र आदेश तिथि से चार सप्ताह में जमा कराया जाना सुनिश्चित करें तो शेष राशि पर स्थगन आदेश माना जावेगा, अन्यथा की दशा में एफसीआई पूरी राशि जमा करे।

यह है पूरा मामला

एफसीआई ने 1976 में मंदिर माफी भूमि सर्वे क्रमांक 945, 951,952,953,954,968,969 कुल नौ बीघा 13 विस्वा स्थित कोटा लश्कर पर आवंटन की प्रत्याशा में केंद्रीय भंडार निगम के गोदामों का निर्माण कर लिया। वर्ष 1988 में राशि 3,19,174 रूपये निश्चित की गई और 7.5 प्रतिशत की दर से ब्याज देय था, जिसमें से कुछ राशि एफसीआई द्वारा जमा कर दी गई लेकिन शेष राशि जमा नहीं की गई।

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अतः 1999 में शेष राशि और ब्याज राशि सहित कुल राशि 33,16,922 रूपये तय की गई, जिसके बाद 2005 में एफसीआई द्वारा पांच लाख 98 हजार राशि जमा की गई और शेष राशि के लिए उच्च न्यायालय में डब्ल्यूपी प्रकरण क्रमांक दायर किया गया। इसमें प्रमुख सचिव धर्मस्व को साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लेने के लिए निर्देशित किया गया।

प्रमुख सचिव द्वारा 1999 में तय की गई राशि और उसके बाद 15 प्रतिशत ब्याज राशि सहित आकलन कर एफसीआई से राशि वसूले जाने और एक माह में राशि जमा न करने पर कब्जा प्राप्त कर माफी विभाग को सौंपने का आदेश दिया, जिस पर आयुक्त ग्वालियर संभाग द्वारा कुल राशि का आकलन कराते हुए कलेक्टर ग्वालियर द्वारा उस आकलित राशि की आरआरसी जारी कराई गई, जिसके आधार पर तहसीलदार लश्कर मनीष जैन द्वारा उक्त डिमांड नोटिस जारी किया गया था।