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MP में जाली दस्तावेजों से बौद्ध अनुयायी बताकर बनवाए 70 बांग्लादेशियों के पासपोर्ट; STF ने सरगना समेत दो को दबोचा

Published: Mon, 07 Sep 2026 08:43 PM (IST)

एसटीएफ ने ग्वालियर में एक गिरोह का पर्दाफाश किया है जिसने बौद्ध विहार के पते पर 70 बांग्लादेशी नागरिकों के ...और पढ़ें

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HighLights

  1. एसटीएफ ने 70 बांग्लादेशियों के फर्जी पासपोर्ट मामले का खुलासा किया।

  2. ग्वालियर के बौद्ध विहार पते पर जाली दस्तावेज बनाए गए।

  3. सरगना रियाल चौधरी और विप्लव अधिकारी गिरफ्तार किए गए।

डिजिटल डेस्क, ग्वालियर। मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय सुरक्षा और पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया को चुनौती देने वाला गंभीर मामला सामने आया है। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने एक गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने ग्वालियर जिले की डबरा तहसील स्थित बौद्ध विहार के पते का उपयोग कर 70 बांग्लादेशी नागरिकों के भारतीय पासपोर्ट बनवाए।

फर्जीवाड़े के लिए स्थानीय स्तर पर तैयार आधार कार्ड, वोटर आईडी, निवास प्रमाण पत्र और 10वीं की अंकसूची का इस्तेमाल किया गया। जांच में पता चला है कि सभी ने खुद को भारतीय नागरिक और बौद्ध धर्म का अनुयायी बताया।

गवाह के तौर पर एक ही नाम ने बढ़ाया संदेह

यह पासपोर्ट पांच साल पहले बनवाए गए थे, लेकिन बांग्लादेशियों की तलाश के दौरान इनका राजफाश हुआ तो पता चला कि सभी के पासपोर्ट में गवाह के तौर पर रियाल चौधरी उर्फ रियाल बरूआ का नाम है, इसलिए पुलिस ने उसे पकड़ा तो पता चला कि वह इस गिरोह का सरगना है। उसके साथी विप्लव अधिकारी को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।

सरगना व साथी ने भी अपनाया बौद्ध धर्म

एसटीएफ की पूछताछ में राजफाश हुआ है कि रियाल चौधरी खुद बांग्लादेश का रहने वाला है। वह असम के रास्ते मध्य प्रदेश के बैतूल पहुंचा। यहां बौद्ध धर्म अपनाकर रह रहा था। उसका साथी विप्लव अधिकारी भी बांग्लादेशी है। वह बंगाल के रास्ते भारत आया। फिर यहां बौद्ध धर्म अपना लिया और ग्वालियर के सिकरिया टेकरी में रह रहा था।

रियाल ने पूछताछ में बताया कि वह वर्ष 1971 से पहले असम के रास्ते बांग्लादेश से भारत आ गया था, लेकिन एसटीएफ को इसमें संदेह है। इसके चलते एसटीएफ की एक टीम असम और एक टीम बंगाल भी पहुंची है।

ग्वालियर में जाली दस्तावेजों से बने 22 पासपोर्ट

एसटीएफ की जांच में पता चला है कि ग्वालियर के पते पर कुल 22 पासपोर्ट जारी हुए, जबकि मध्य प्रदेश के अन्य जिलों के पते पर 48 पासपोर्ट और जारी हुए। इस तरह अब तक 70 पासपोर्ट का खुलासा हुआ है, जो जाली दस्तावेजों के आधार पर बनाए गए। फर्जी तरीके से भारतीय पासपोर्ट हासिल करने वाले कुछ लोगों ने थाईलैंड, चीन और भूटान सहित अन्य देशों की यात्रा की है।

देशभर में 10 टीमें जांच में जुटीं

इस मामले में पुलिस के वेरिफिकेशन और पासपोर्ट कार्यालय में दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। एसटीएफ ने देशभर में करीब 10 टीमें लगाई हैं। छह टीमें असम, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में नेटवर्क से जुड़े लोगों की जानकारी जुटा रही हैं।

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जिन्हें बौद्ध धर्म का अनुयायी बताया, वे बांग्लादेशी

ग्वालियर के डबरा में आंबेडकर कालोनी स्थित बौद्ध विहार के पते पर यह पासपोर्ट बने हैं। इन सभी को बौद्ध धर्म का अनुयायी बताया गया। पता लगा है कि यह लोग चीवर वस्त्र पहनते थे। चीवर वस्त्र पहनकर ही यह लोग चाइना, थाईलैंड, जापान, भूटान, वर्मा, मलेशिया गए थे।

इसमें से अब भी कुछ लोग बौद्ध भिक्षु बनकर विदेश में ही हैं। कुछ भारत लौट आए, जो देश के अलग-अलग राज्यों में होने की जानकारी पुलिस को मिली है। दरअसल, यह बड़ा षड्यंत्र है। बगैर नागरिकता के भारत व यहां से पासपोर्ट बनवाकर दूसरे देशों तक पहुंचे बांग्लादेशी नागरिकों ने बौद्ध धर्म अपनाकर खुद को बचा लिया। यहां नाम बदल लिया। नए पते पर पासपोर्ट बनवा लिए।

जाली दस्तावेजों से पासपोर्ट बनाने का राजफाश हुआ है। सरगना सहित दो लोग पकड़े गए हैं। बौद्ध धर्म अपनाकर यह रह रहे थे। अब तक 70 पासपोर्ट ऐसे सामने आए हैं, जिन्हें बनवाने के लिए जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ। टीमें अभी असम-बंगाल गई हैं। अभी और लोग पकड़े जाएंगे।
- डी. श्रीनिवास वर्मा, एडीजी, एसटीएफ (मप्र)