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Independence Day 2026: लाल किले से 18 राज्यों तक लहराएगा ग्वालियर के कारीगरों का तिरंगा, 196 हुनरमंदों ने तैयार किए राष्ट्रीय ध्वज

Updated: Fri, 14 Aug 2026 06:03 PM (IST)

स्वतंत्रता दिवस पर ग्वालियर के मध्य भारत खादी संघ द्वारा निर्मित राष्ट्रीय ध्वज लाल किले सहित 18 राज्यों और विभिन्न रक्षा प्रतिष्ठानों में फहराए जाएंगे। 196 कुशल कारीगरों ने दिन-रात मेहनत कर इन प्रामाणिक खादी तिरंगों को तैयार किया है, जो कई गुणवत्ता जांच चरणों से गुजरे हैं।

-प्रतीकात्मक चित्र।

-प्रतीकात्मक चित्र।

HighLights

  1. ग्वालियर के खादी तिरंगे लाल किले सहित 18 राज्यों में फहरेगा।

  2. मध्य भारत खादी संघ ने 196 कारीगरों से बनवाए ध्वज।

  3. प्रत्येक ध्वज 20-25 गुणवत्ता जांच चरणों से गुजरता है।

डिजिटल डेस्क, ग्वालियर। इस स्वतंत्रता दिवस देश के कोने-कोने में जब तिरंगा शान से लहराएगा, तो उसमें ग्वालियर के कारीगरों के हुनर की भी झलक होगी। दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले से लेकर 18 राज्यों और विभिन्न रक्षा प्रतिष्ठानों तक ग्वालियर में तैयार किए गए खादी के राष्ट्रीय ध्वज फहराए जाएंगे।

सरकारी मानकों के अनुरूप खादी के प्रामाणिक तिरंगे बनाने का अधिकार देश में केवल दो संस्थाओं को प्राप्त है। इनमें कर्नाटक का हुबली केंद्र और उत्तर भारत में ग्वालियर का मध्य भारत खादी संघ शामिल है। इस वर्ष संघ से जुड़े 196 कुशल कारीगरों ने दिन-रात मेहनत कर तिरंगे तैयार किए हैं। प्रत्येक ध्वज को आपूर्ति से पहले 20 से 25 चरणों की गुणवत्ता जांच से गुजरना पड़ा है।

हुबली के बाद ग्वालियर का अहम स्थान

स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर सरकारी स्तर पर इस्तेमाल होने वाले खादी के तिरंगे की आपूर्ति में ग्वालियर की अहम भूमिका है। ISI मानकों के अनुरूप प्रामाणिक खादी तिरंगे तैयार करने का लाइसेंस देश में केवल दो केंद्रों के पास है।

ग्वालियर में निर्मित ध्वज मध्य प्रदेश के अलावा दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात सहित दक्षिण भारत के कई राज्यों में भेजे जाते हैं।

1925 में चरखा संघ से हुई थी शुरुआत

मध्य भारत खादी संघ की विरासत करीब एक सदी पुरानी है। वर्ष 1925 में ‘चरखा संघ’ के रूप में इसकी शुरुआत हुई थी। शुरुआती वर्षों में यहां हर साल करीब 10 से 12 हजार तिरंगे ही तैयार होते थे। मांग बढ़ने के साथ उत्पादन भी बढ़ता गया और अब प्रतिवर्ष करीब 20 से 30 हजार राष्ट्रीय ध्वज तैयार किए जाते हैं। इस वर्ष संस्था ने 70 लाख रुपये से अधिक मूल्य के तिरंगों की आपूर्ति की है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 25 प्रतिशत अधिक है।

एक तिरंगा तैयार होने में लगते हैं 5-6 दिन

ग्वालियर में एक मानक खादी तिरंगा तैयार करना कई चरणों वाली प्रक्रिया है। धागा कातने से लेकर कपड़े की बुनाई, रंगाई, कटिंग और सिलाई तक का काम कारीगर पारंपरिक हस्तनिर्मित पद्धति से करते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में करीब पांच से छह दिन लग जाते हैं।

कपड़ा तैयार होने के बाद ध्वज के तीनों रंगों के अनुपात, लंबाई-चौड़ाई, सिलाई की मजबूती और अन्य मानकों की बारीकी से जांच की जाती है। करीब 20 से 25 गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरने के बाद ही तिरंगे पर ISI की मुहर लगाई जाती है।

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वीआईपी वाहनों के झंडे से लेकर 6x4 फीट के तिरंगे तक

मध्य भारत खादी संघ में 9 से 10 अलग-अलग आकारों में राष्ट्रीय ध्वज तैयार किए जाते हैं। इनमें 2x3 फीट और 6x4 फीट आकार के तिरंगों की मांग सबसे अधिक रहती है। इसके अलावा मंत्रियों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के वाहनों के लिए इस्तेमाल होने वाले छोटे आकार के विशेष तिरंगे भी यहीं तैयार किए जाते हैं।

उत्पादन की प्रक्रिया भले ही समय लेने वाली हो, लेकिन कारीगरों के लिए यह महज काम नहीं, बल्कि राष्ट्रध्वज की गरिमा से जुड़ी जिम्मेदारी है। यही वजह है कि हर तिरंगे को पूरी सावधानी और निर्धारित मानकों के साथ तैयार कर देशभर में भेजा जाता है।