विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

ग्वालियर में सड़क निर्माण में धांधली की खुलेंगी परतें... हाई कोर्ट ने तलब किया पांच साल का रिकॉर्ड, अब खोदकर होगी जांच

Updated: Tue, 11 Aug 2026 05:49 PM (IST)

ग्वालियर हाई कोर्ट ने नगर निगम द्वारा पिछले पांच वर्षों में कराए गए सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने पूर्व सिटी प्ल ...और पढ़ें

ग्वालियर हाई कोर्ट (फाइल फोटो)

ग्वालियर हाई कोर्ट (फाइल फोटो)

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने पांच साल के सड़क निर्माण रिकॉर्ड तलब किए।

  2. पूर्व सिटी प्लानर प्रदीप वर्मा के आपराधिक प्रकरण की प्रति मांगी।

  3. तकनीकी टीम द्वारा सड़कों की खुदाई कर गुणवत्ता की जांच होगी।

डिजिटल डेस्क, ग्वालियर। ग्वालियर शहर में नगर निगम द्वारा पिछले पांच वर्षों में कराए गए सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से जुड़ी जनहित याचिका पर हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाया है। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने रिश्वत लेते पकड़े गए पूर्व सिटी प्लानर प्रदीप वर्मा के आपराधिक प्रकरण की प्रमाणित प्रति भी तलब कर ली। इसके साथ ही नगर निगम से पांच वर्षों में सड़क निर्माण पर खर्च की गई पूरी राशि का रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ कर रही है। यह जनहित याचिका कैलाश चंद अग्रवाल की ओर से दायर की गई है।

सिटी प्लानर की भूमिका पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी

10 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान सिटी प्लानर सुरेश अहिरवार भी न्यायालय के समक्ष उपस्थित हुए। कोर्ट के आदेश में सिटी प्लानर के रवैये पर नाराजगी जताते हुए टिप्पणी की गई कि वह न्यायालय को गुमराह करने का प्रयास कर रहे थे। इसके बाद कोर्ट ने नगर निगम की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता गौरव मिश्रा को पिछले पांच वर्षों में सड़क निर्माण पर खर्च की गई राशि से संबंधित पूरा रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

माप पुस्तिका समेत पूरा तकनीकी रिकॉर्ड होगा पेश

हाई कोर्ट ने सड़क निर्माण से जुड़े माप और माप पुस्तिका समेत सभी संबंधित दस्तावेज भी पेश करने को कहा है। न्यायालय अब केवल कागजी रिकॉर्ड के आधार पर सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर निर्भर नहीं रहना चाहता, बल्कि मौके पर वास्तविक स्थिति की जांच कराने की तैयारी में है।

सड़कें खोदकर जांचेगी तकनीकी टीम

न्यायालय ने संकेत दिया है कि सड़क निर्माण की गुणवत्ता की वास्तविक जांच के लिए अधिवक्ता की अध्यक्षता में एक कमीशन गठित किया जा सकता है। इसमें तकनीकी विशेषज्ञों की टीम भी शामिल होगी। यह टीम जरूरत पड़ने पर सड़कों की खोदाई कर उनकी मोटाई, निर्माण सामग्री और अन्य तकनीकी मानकों की जांच करेगी।

जांच में यह देखा जाएगा कि सड़कें स्वीकृत स्पेसिफिकेशन और निर्धारित तकनीकी मापदंडों के अनुरूप बनाई गई थीं या नहीं।

यह भी पढ़ें- ग्वालियर में छात्राओं ने दिखाई बहादुरी: मोबाइल झपटमार को दौड़कर पकड़ा, बीच सड़क लगाई जमकर क्लास; Video वायरल

निगम अधिकारियों की मौजूदगी के बिना होगी जांच

हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित कमीशन की जांच नगर निगम के किसी अधिकारी की मौजूदगी के बिना कराई जाएगी, ताकि जांच की निष्पक्षता बनी रहे। हालांकि, निगम की ओर से अधिवक्ता गौरव मिश्रा को कमीशन की कार्रवाई के दौरान मौजूद रहकर नगर निगम का पक्ष रखने की अनुमति दी जा सकती है।