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सड़क पर तड़प रहा था पैरों से लाचार घायल श्वान, मदद के लिए 500 किमी दौड़ी माधवी; भिंड पहुंचकर आश्रम में कराया भर्ती

Updated: Wed, 12 Aug 2026 04:06 PM (IST)

माधवी नाम की एक महिला ने भोपाल से भिंड तक 500 किलोमीटर का सफर तय किया ताकि एक घायल और पैरों से लाचार श्वान को इलाज मिल सके। उन्होंने श्वान को भिंड के ...और पढ़ें

घायल श्वान को गोद में लिए माधवी।

घायल श्वान को गोद में लिए माधवी।

HighLights

  1. भोपाल की माधवी ने घायल श्वान की मदद की।

  2. 500 किलोमीटर का सफर तय कर भिंड पहुंचीं।

  3. श्वान को इंसानियत आश्रम में भर्ती कराया गया।

डिजिटल डेस्क, ग्वालियर। इंसानियत केवल इंसानों तक सीमित नहीं होती, यह बात भोपाल की माधवी ने साबित कर दी। सड़क पर दर्द से तड़पते एक घायल श्वान को देखकर उन्होंने उसकी मदद का फैसला किया और उसे सुरक्षित इलाज दिलाने के लिए करीब 500 किलोमीटर का सफर तय कर भिंड पहुंच गईं। श्वान के पिछले दोनों पैर काम नहीं कर रहे थे और वह सड़क पर घिसटकर चलने को मजबूर था।

माधवी भोपाल के साजिदा नगर में रहती हैं। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले उन्होंने घर के बाहर एक श्वान को बेहद खराब हालत में देखा। उसके पिछले दोनों पैर निष्क्रिय थे और वह दर्द से कराहते हुए किसी तरह आगे बढ़ रहा था। उसकी हालत देखकर माधवी ने उसका इलाज कराने का निर्णय लिया।

अस्पताल ने इलाज की हामी भरी, लेकिन रखने से इंकार

माधवी ने भोपाल के एक पशु अस्पताल से संपर्क किया। अस्पताल प्रबंधन ने श्वान का उपचार करने की बात तो कही, लेकिन उसे अपने पास रखने में असमर्थता जताई। इसके बाद माधवी ने हार नहीं मानी और ऐसे स्थान की तलाश शुरू की, जहां घायल और बेसहारा पशुओं की इलाज के साथ देखभाल भी हो सके।

इसी दौरान इंटरनेट मीडिया के जरिए उन्हें भिंड के इंसानियत आश्रम के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने इंसानियत समिति के संचालक अनंत इंसानियत से संपर्क कर श्वान की पूरी स्थिति बताई।

मां और भाई के साथ 10 घंटे का सफर

आश्रम की ओर से श्वान को रखने और उपचार कराने की सहमति मिलने के बाद माधवी मंगलवार सुबह अपनी मां और भाई के साथ कार से भोपाल से भिंड के लिए रवाना हुईं। करीब 10 घंटे की लंबी यात्रा के बाद वह घायल श्वान को लेकर इंसानियत आश्रम पहुंचीं।

आश्रम पहुंचते ही श्वान को उपचार और देखभाल के लिए भर्ती कर लिया गया। वहां उसके इलाज की व्यवस्था शुरू की गई।

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आश्रम की सेवा देखकर भावुक हुईं

आश्रम में बेसहारा और घायल पशुओं के लिए की जा रही व्यवस्थाएं देखकर माधवी की मां भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि यहां जिस तरह बेजुबान पशुओं की सेवा और देखभाल की जा रही है, वह किसी मंदिर से कम नहीं है।

माधवी के इस प्रयास ने यह संदेश दिया कि किसी बेजुबान की तकलीफ को समझना और उसके लिए कदम उठाना ही सच्ची इंसानियत है। उनके 500 किलोमीटर के सफर ने न सिर्फ एक घायल श्वान को इलाज की उम्मीद दी, बल्कि संवेदनशीलता की एक मिसाल भी कायम की।