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    MP के दुर्लभ गिद्ध ने भरी 3000 किमी की अद्भुत उड़ान, रायसेन के हलाली से उड़कर पहुंचा उज्बेकिस्तान

    Updated: Sat, 09 May 2026 11:43 PM (IST)

    मध्य प्रदेश में रेस्क्यू और पुनर्वास किए गए एक दुर्लभ सिनेरियस गिद्ध ने हलाली डैम से उज्बेकिस्तान तक 3000 किमी से अधिक की उड़ान भरी है। यह घटना राज्य ...और पढ़ें

    दुर्लभ सिनेरियस गिद्ध (प्रतीकात्मक चित्र)

    दुर्लभ सिनेरियस गिद्ध (प्रतीकात्मक चित्र)

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    राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश अब गिद्ध संरक्षण के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रदेश से जुड़े एक दुर्लभ सिनेरियस गिद्ध की प्रेरणादायी उड़ान ने वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई है। रायसेन जिले के हलाली डैम से मुक्त किया गया यह गिद्ध 3 हजार किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर उज्बेकिस्तान पहुंच गया है।

    सिरोंज में घायलावस्था में मिला था गिद्ध

    यह दुर्लभ गिद्ध 19 दिसंबर 2025 को विदिशा जिले के सिरोंज क्षेत्र में घायल और बेहद कमजोर हालत में मिला था। वन विभाग की टीम ने इसका रेस्क्यू कर भोपाल स्थित वन विहार राष्ट्रीय उद्यान और बीएनएचएस के संयुक्त संचालन वाले केरवा वल्चर कंजर्वेशन ब्रीडिंग सेंटर में पहुंचाया था। यहां विशेषज्ञों की निगरानी में उसका उपचार और पुनर्वास किया गया।

    मुख्यमंत्री ने खुले आसमान में छोड़ा था

    करीब दो महीने की देखरेख और उपचार के बाद गिद्ध पूरी तरह स्वस्थ हो गया। इसके बाद 23 फरवरी 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उसे रायसेन के हलाली डैम क्षेत्र में प्राकृतिक आवास में मुक्त किया था। मुक्त होने के बाद यह गिद्ध लगभग एक महीने तक हलाली क्षेत्र में ही रहा और धीरे-धीरे खुद को प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप ढालता रहा। इसके बाद उसने लंबी दूरी की उड़ान शुरू की।

    जीपीएस से मिल रही लोकेशन

    वन विभाग द्वारा लगाए गए जीपीएस ट्रैकर से मिली जानकारी के अनुसार, यह गिद्ध 10 अप्रैल को हलाली डैम से उड़ान भरकर राजस्थान, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रास्ते 4 मई को उज्बेकिस्तान पहुंच गया। इस दौरान उसने 3000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की।

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    विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा न केवल सिनेरियस गिद्ध की अद्भुत जीवटता को दर्शाती है, बल्कि मध्य प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण और पुनर्वास की सफल रणनीति का भी बड़ा उदाहरण है।