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    कूनो की सरहद लांघ 250 किमी दूर तक विचरण कर रहे चीते, वन विभाग की चिंता बढ़ी, निगरानी व सुरक्षा की चुनौती

    Updated: Tue, 05 May 2026 07:52 PM (GMT+05:30)

    कूनो के तीन चीता शावक पार्क की सीमा से 250 किमी दूर तक विचरण कर रहे हैं, जिससे वन विभाग की चिंता बढ़ गई है। गर्मी में पानी की कमी और हाईवे पर दुर्घटना ...और पढ़ें

    कूनाे में चीता (फाइल फोटो)

    कूनाे में चीता (फाइल फोटो)

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    संक्षेप में पढ़ें

    वरुण शर्मा, ग्वालियर। चीता पुनर्स्थापना परियोजना के आगे बढ़ने के साथ चीतों का नित नया व्यवहार वन विभाग के सामने कई तरह की चुनौती भी प्रस्तुत कर रहा है। खुले जंगल में रहने के कारण चीते विचरण करते हुए नए-नए क्षेत्रों में पहुंच रहे हैं। मादा चीता आशा के तीन शावक केएपी-1, केएपी-2 और केएपी-3 फिलहाल कूनो से बाहर विचरण कर रहे हैं।

    पानी और हाईवे बने चुनौती

    केएपी-3 राजस्थान के झालावाड़, बारां होता हुआ कूनो से करीब 250 किमी दूर मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में पहुंच गया। केएपी-1 ग्वालियर के घाटीगांव में है तो केएपी-2 रणथंभौर क्षेत्र में है। चीता ट्रैकिंग टीम इनकी निगरानी कर रही है, लेकिन गर्मियों में सबसे बड़ी चिंता पानी को लेकर है।

    राजस्थान में पिछले दिनों चीता पानी की तलाश में घर में भी घुस गया था। दूसरा, यदि चीता हाईवे के पास होता है तो दुर्घटना का खतरा भी रहता है। हालांकि चीता ट्रैकिंग टीम व स्थानीय वन विभाग सक्रिय होकर उस समय वहां से गुजरने वाले ट्रैफिक को धीमा करवा देते हैं।

    ऐसे की जा रही चीतों की ट्रैकिंग

    बता दें कि चीता ट्रैकिंग में यह भी सामने आया कि चीता एक बार में लगभग 30 किमी चलकर कुछ घंटे आराम जरूर करता है और शिकार भी कर लेता है। चीतों की ट्रैकिंग इस तरह की जा रही है कि कूनो का दल और जिस बाहरी जिले में चीता पहुंच जाता है, वहां का स्थानीय वन विभाग भी निगरानी के लिए स्टाफ भेजता है।

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    हर मूवमेंट पर नजर

    चीते की कॉलर आइडी के माध्यम से निगरानी की जाती है जिसमें दल शिफ्ट भी बदली जाती है। चीता ट्रैकिंग टीम की ओर से चीता की निगरानी उसके मूवमेंट के आधार पर की जाती है, जब चीता काफी देर तक मूवमेंट नहीं करता तो टीम पास जाकर चीते को देखती है। आसपास अगर पानी की कोई उपलब्धता नहीं होती तो टीम द्वारा पानी की व्यवस्था की जाती है जिससे यदि चीता प्यासा है तो उसे पानी आसपास ही मिल सके।