MP की बदल रही आर्थिक तस्वीर, MSME को कर्ज में 36.5% उछाल; दो साल में 1.45 लाख करोड़ का ऋण
मध्य प्रदेश में मार्च 2026 तक बैंकों द्वारा 6.65 लाख करोड़ रुपये का कर्ज बांटा गया, जो राज्य में बड़े ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।
HighLights
MSME सेक्टर को कर्ज में 36.5% की महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज।
कुल बैंक ऋण में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी में कमी आई।
शिक्षा ऋण में दो वर्षों में 32.1% की उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
नमन मिश्रा, भोपाल। मध्य प्रदेश में एक बड़ा आर्थिक बदलाव करवट ले रहा है। इसकी एक झलक बैंक ऋण के आंकड़ों में झलक रहा है। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) के अनुसार मार्च 2026 तक प्रदेश भर की बैंक शाखाओं से कुल छह लाख 65 हजार 941 करोड़ रुपयों का कर्ज बांटा। इसमें कृषि क्षेत्र को एक लाख 95 हजार 580 करोड़ और मध्यम, लघु एवं सूक्ष्म उद्योग (एमएसएमई) सेक्टर को एक लाख 45 हजार 491 करोड़ का कर्ज मिला। एमएसएमई को दिया गया कर्ज दो साल पूर्व के मुकाबले 36.5 प्रतिशत अधिक है।
कृषि ऋण बढ़ा, लेकिन घटी हिस्सेदारी
इन आंकड़ों में कृषि क्षेत्र में कर्ज का आकार बड़ा दिखता है। दो वर्ष पूर्व की तुलना में इसका आकार भी करीब 20 प्रतिशत बढ़ा है, लेकिन कुल कर्ज में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी 30.77 प्रतिशत से घटकर 29.37 प्रतिशत रह गई है। यह कृषि क्षेत्र में कर्ज दर के स्थिर होते जाने का संकेत है।
एमएसएमई सेक्टर ने पकड़ी रफ्तार
वहीं एमएसएमई क्षेत्र में यह तेजी से बढ़ रहा है। मार्च 2024 में एमएसएमई कर्ज 1.06 लाख करोड़ था, जो मार्च 2026 में बढ़कर 1.45 लाख करोड़ हो गया। यानी इस क्षेत्र में बैंकों ने करीब 38,879 करोड़ रुपये अधिक कर्ज बांटे।
मार्च 2024 से मार्च 2026 के बीच हाउसिंग लोन 72 हजार 255 करोड़ से बढ़कर 90 हजार 523 करोड़ हो गया।
इन दो सालों में करीब 18 हजार 268 करोड़ यानी 25.3 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। हालांकि इस क्षेत्र में सालाना वृद्धि दर कमजोर हुई। 2024-25 में यह 13 प्रतिशत था तो 2025-26 में 10.8 प्रतिशत रहा। कुल कर्ज में हाउसिंग लोन की हिस्सेदारी भी लगभग स्थिर है।
बैंकर और अर्थशास्त्री डॉ. वीएन पाठक का कहना है कि इकोनॉमी को बेहतर करना है तो निवेश बढ़ाना होगा। अगर एमएसएमई में ज्यादा इन्वेस्ट किया जा रहा है तो यह बेहतर संकेत हैं। इसकी नियमित पड़ताल जरूरी है।
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शिक्षा ऋण में भी तेज वृद्धि
शिक्षा ऋण का आकार तीन हजार 629 करोड़ से बढ़कर चार हजार 793 करोड़ हो गया। यानी दो साल में एक हजार 164 करोड़ (32.1 प्रतिशत) की वृद्धि हुई है। यह क्षेत्र सालाना 15 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। कुल कर्ज में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी 0.72 प्रतिशत है, लेकिन इसकी तेज वृद्धि दर रुझान का संकेत दे रहा है।
पिछले तीन वर्षों में कर्ज का लेखा-जोखा
सेक्टर - मार्च 24 - मार्च 25 - मार्च 26
कृषि - 1,63,077 - 1,78,745 - 1,95,580
एमएसएमई - 1,06,612 - 1,20,082 - 1,45,491
शिक्षा - 3,629 - 4,180, - 4,793
हाउसिंग - 72,255 -81,709 - 90,523
कुल कर्ज - 5,29,951 - 5,96,554 - 6,65,941
(स्रोत: एसएलबीसी, सभी आंकड़े करोड़ रुपये में)
सरकार युवाओं को कौशल विकास, एमएसएमई और स्वयं सहायता समूहों के जरिये ऋण उपलब्ध करा रही है। इससे युवाओं को स्वरोजगार के अवसर मिल रहे हैं और सरकार पर सीधा वित्तीय बोझ भी कम रहता है। हालांकि इस क्षेत्र को बड़ी और बहुराष्ट्रीय कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। बाजार न मिलने और ब्याज के कारण कई छोटे उद्योगों के लिए कारोबार चलाना चुनौती बन रहा है।
- डॉ. देवेंद्र विश्वकर्मा, सचिव, मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ आर्थिक परिषद
