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MP में इंटर्न डॉक्टरों के समक्ष झुकी सरकार, स्टाइपेंड 50% बढ़ा; छात्रों पर बल प्रयोग मामले में दो पुलिसकर्मी लाइन अटैच

Published: Wed, 09 Sep 2026 03:12 PM (IST)Updated: Wed, 09 Sep 2026 04:14 PM (IST)

मध्य प्रदेश में सरकार ने इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड 50 फीसदी बढ़ाने का निर्णय लिया है। अब उन्हें प्रतिमाह 21500 ...और पढ़ें

इंटर्न डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल ने उप-मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल से मुलाकात की।

इंटर्न डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल ने उप-मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल से मुलाकात की।

HighLights

  1. इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड 50% बढ़ा, आंदोलन सफल।

  2. पुलिस बल प्रयोग मामले में दो पुलिसकर्मी लाइन अटैच।

  3. उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल से हुई वार्ता में बनी सहमति।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों और सरकार के बीच आखिरकार सहमति बन गई है। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल से मंत्रालय में इंटर्न्स, जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (जूडा) और मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन (एमटीए) के प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात के बाद स्टाइपेंड में वृद्धि के प्रस्ताव पर सहमति बनी। सरकार ने इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड 50 प्रतिशत बढ़ा दिया है। अब उन्हें प्रतिमाह 21,500 रुपए स्टाइपेंड मिलेगा।

छात्रों पर बल प्रयोग मामले की होगी जांच

बैठक में आंदोलन के दौरान छात्रों पर पुलिस द्वारा बल प्रयोग का मुद्दा भी उठा। प्रारंभिक जांच में दो पुलिसकर्मियों की भूमिका सामने आने पर उन्हें लाइन अटैच कर दिया गया है। पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए अलग से जांच टीम गठित की गई है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस कार्रवाई से घायल हुए छात्रों के समुचित इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने का भी आश्वासन दिया गया है।

जूडा और एमटीए के प्रतिनिधियों ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर संतोष व्यक्त किया। वहीं स्टाइपेंड बढ़ाने की घोषणा के बाद इंटर्न डॉक्टरों ने भी अपना आंदोलन खत्म कर दिया।

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तीन दिन से आंदोलन कर रहे थे इंटर्न डॉक्टर

बता दें कि स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग को लेकर राजधानी भोपाल में इंटर्न डॉक्टर लगातार तीसरे दिन बुधवार को भी प्रदर्शन कर रहे थे। कमला पार्क चौराहे पर धरने पर बैठे डॉक्टरों का आक्रोश सोमवार को पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज और वाटर कैनन के इस्तेमाल के बाद और बढ़ गया था।

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सीनियर डॉक्टर भी समर्थन में उतरे

आंदोलन को बुधवार तक सीनियर डॉक्टरों और जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन का भी समर्थन मिल गया। गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) भोपाल के सीनियर रेजिडेंट्स ने विरोध स्वरूप ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार किया, हालांकि मरीजों की सुविधा को देखते हुए इमरजेंसी सेवाएं जारी रखी गईं।

पुलिस कार्रवाई के विरोध में प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों ने काली पट्टी बांधकर काम किया। इस बीच भोपाल जीएमसी की डीन डॉ. कविता सिंह ने प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों से काम पर लौटने की अपील की थी।