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भोपाल में इंटर्न डॉक्टरों पर वाटर कैनन से मचा बवाल, डिप्टी सीएम ने दिए जांच के आदेश; 30 हजार स्टाइपेंड पर अड़े डॉक्टर

Published: Tue, 08 Sep 2026 03:17 PM (IST)

भोपाल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे इंटर्न डॉक्टरों पर वाटर कैनन के इस्तेमाल के बाद उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ...और पढ़ें

HighLights

  1. उपमुख्यमंत्री ने वाटर कैनन घटना की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए।

  2. इंटर्न डॉक्टर ₹30,000 मासिक स्टाइपेंड की मांग पर अड़े हैं।

  3. लिखित आदेश मिलने तक आंदोलन जारी रखने का डॉक्टरों का ऐलान।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। राजधानी भोपाल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों पर पुलिस द्वारा वाटर कैनन के इस्तेमाल का मामला अब तूल पकड़ गया है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान हुई इस पुलिस कार्रवाई पर उप मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कड़ा संज्ञान लेते हुए पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं।

वहीं, दूसरी ओर इंटर्न डॉक्टर अपने रुख पर कायम हैं। उनकी मांग है कि मासिक स्टाइपेंड को बढ़ाकर 30 हजार रुपये किया जाए। डॉक्टरों ने साफ कर दिया है कि जब तक मुख्यमंत्री की ओर से स्टाइपेंड वृद्धि को लेकर कोई आधिकारिक लिखित आदेश जारी नहीं किया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा। मंगलवार को भी उन्होंने प्रदर्शन करते हुए कमला पार्क रोड पर जाम लगा दिया।

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वाटर कैनन कार्रवाई की जांच डीसीपी को सौंपी

पुलिस आयुक्त कार्यालय भोपाल की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, 7 सितंबर को हमीदिया अस्पताल के गेट के पास इंटर्न डॉक्टरों के प्रदर्शन के दौरान वाटर कैनन के इस्तेमाल के मामले को उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने गंभीरता से लिया है।

पुलिस कार्रवाई के दौरान कुछ डॉक्टरों के घायल होने की बात भी सामने आई है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस उपायुक्त जोन-2 विकास सहवाल को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। वे सभी संबंधित पक्षों के बयान और घटनाक्रम की जांच कर अपनी रिपोर्ट जल्द पुलिस आयुक्त को सौंपेंगे।

बैरिकेड्स टूटे, सड़क पर इंटर्न डॉक्टरों का हंगामा

दरअसल, सोमवार को हमीदिया अस्पताल के इंटर्न डॉक्टरों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर मुख्यमंत्री निवास की ओर कूच करने की योजना बनाई थी। इसे देखते हुए पुलिस ने अस्पताल परिसर और आसपास के क्षेत्र में बैरिकेडिंग की थी।

आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स पार कर फतेहगढ़ की मुख्य सड़क पर पहुंचने का प्रयास किया। पुलिस ने उन्हें मोती मस्जिद चौराहे के पास रोक दिया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच तनावपूर्ण स्थिति बन गई। प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इस दौरान एक छात्र के घायल होने की सूचना भी सामने आई।

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हंगामे और प्रदर्शन का असर यातायात पर भी पड़ा और क्षेत्र में लंबे समय तक जाम जैसी स्थिति बनी रही।

14 हजार से 30 हजार रुपये स्टाइपेंड की मांग

वर्तमान में मध्य प्रदेश के इंटर्न डॉक्टरों को 14,337 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जा रहा है। प्रदर्शनकारी इसे बढ़ाकर कम से कम 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग कर रहे हैं।

इंटर्न डॉक्टर मोहित मिश्रा के अनुसार, करीब डेढ़ महीने पहले प्रशासन की ओर से स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर मौखिक आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया गया। डॉक्टरों का कहना है कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा और उन्हें सरकार के फैसले का आधिकारिक दस्तावेज चाहिए।

प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि जब उत्तर प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड 25 हजार रुपये तक किया जा सकता है तो मध्य प्रदेश के करीब 3,600 इंटर्न डॉक्टरों को इससे वंचित क्यों रखा जा रहा है।

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सागर से आने वाले छात्रों को रोकने का आरोप

इंटर्न डॉक्टरों ने प्रशासन पर आंदोलन को दबाने का आरोप भी लगाया है। उनका दावा है कि सागर से समर्थन देने भोपाल आ रहे मेडिकल छात्रों की बस को नादरा बस स्टैंड पर ही रोक दिया गया।

डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने पहले अपनी मांग संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके से सरकार के सामने रखी, लेकिन जब कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ तो उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

अब इंटर्न डॉक्टरों ने स्पष्ट कर दिया है कि मुख्यमंत्री की ओर से स्टाइपेंड बढ़ाने का आधिकारिक लिखित आदेश मिलने तक उनका आंदोलन खत्म नहीं होगा। ऐसे में एक तरफ वाटर कैनन कार्रवाई की जांच शुरू हो गई है, वहीं दूसरी तरफ सरकार और आंदोलनरत इंटर्न डॉक्टरों के बीच स्टाइपेंड को लेकर टकराव अभी जारी रहने के आसार हैं।