MP में 2027 के चुनावी रण के लिए कांग्रेस का नया प्लान, पहली बार बनेगी चुनाव प्रबंधन टीम; बूथवार कमजोरियां होंगी दूर
मध्य प्रदेश कांग्रेस ने 2023 और 2024 के चुनावों में हार के बाद संगठन और चुनाव प्रबंधन को मजबूत करने की रणनीति बनाई है। पार्टी पहली बार आगामी नगरीय निक ...और पढ़ें

मप्र कांग्रेस कमेटी कार्यालय (फाइल फोटो)
HighLights
कांग्रेस 2027 चुनावों के लिए नई रणनीति बना रही है।
पहली बार अलग चुनाव प्रबंधन टीम का गठन होगा।
बूथ स्तर पर कमजोरियों को दूर करने पर जोर।
राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश में लगातार दो बड़े चुनावों में मिली हार के बाद कांग्रेस अब संगठन के साथ-साथ चुनाव प्रबंधन को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। वर्ष 2023 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद पार्टी ने संगठन को बूथ स्तर तक नए सिरे से खड़ा किया है। अब आगामी नगरीय निकाय चुनाव से लेकर आगे के चुनावी मुकाबलों के लिए पहली बार अलग चुनाव प्रबंधन टीम गठित करने की तैयारी है।
मई-जून 2027 से प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव का सिलसिला शुरू होने की संभावना है। इसके मद्देनजर कांग्रेस भाजपा के मजबूत संगठनात्मक नेटवर्क का मुकाबला करने के लिए चुनाव प्रबंधन को सबसे ज्यादा प्राथमिकता देगी। प्रस्तावित टीम प्रदेश से लेकर संभाग स्तर तक काम करेगी और कांग्रेस के साथ सभी सहयोगी संगठनों को एक समन्वित ढांचे में लाकर चुनावी रणनीति को एक दिशा में आगे बढ़ाएगी।
इसकी विस्तृत रूपरेखा 11 जुलाई को भोपाल में होने वाली राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक में तैयार की जाएगी।
दो माह में संगठन का काम पूरा करने का लक्ष्य
कांग्रेस प्रदेश में संगठन सृजन की प्रक्रिया को अगले दो महीने में पूरा करने के बाद पूरी ताकत चुनावी तैयारियों में लगाने की योजना बना रही है। चुनाव प्रबंधन टीम की कमान वरिष्ठ नेताओं को सौंपी जाएगी। ये नेता अपनी टीम तैयार करेंगे और स्थानीय स्तर पर राजनीतिक, सामाजिक और जातिगत समीकरणों का आकलन कराएंगे।
जिन क्षेत्रों में पार्टी को कमजोरियां दिखाई देंगी, वहां स्थानीय परिस्थितियों के हिसाब से अलग रणनीति तैयार की जाएगी। इसके क्रियान्वयन के लिए सक्रिय और समर्पित कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी जाएगी।
टीम के कामकाज की संभागवार मासिक रिपोर्ट तैयार होगी। इसकी समीक्षा प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी करेंगे।
बूथ पर हार की वजह खोजेगी टीम
प्रस्तावित चुनाव प्रबंधन टीम का सबसे महत्वपूर्ण काम बूथ स्तर पर कांग्रेस की कमजोर कड़ियों को पहचानना और उन्हें मजबूत करना होगा। पार्टी ऐसे बूथों को चिह्नित करेगी, जहां लगातार चुनावों में उसे हार का सामना करना पड़ा है।
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इसके अलावा बूथवार भाजपा समर्थक और कांग्रेस समर्थक परिवारों का भी आकलन किया जाएगा। लगातार कमजोर प्रदर्शन वाले बूथों पर हार के कारणों की पड़ताल कर उन्हें दूर करने के लिए स्थानीय स्तर पर कार्ययोजना बनाई जाएगी।
कांग्रेस की कोशिश होगी कि चुनाव से काफी पहले इन बूथों पर संगठन और कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाई जाए, ताकि मतदान के समय पार्टी के पास मजबूत जमीनी नेटवर्क मौजूद हो।
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दतिया उपचुनाव से भी निकाला जाएगा सबक
कांग्रेस 11 जुलाई की बैठक में दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजों की बूथवार समीक्षा भी करेगी। इस चुनाव में पार्टी ने मौजूदा और पूर्व विधायकों समेत वरिष्ठ नेताओं को बूथ स्तर पर जिम्मेदारियां सौंपी थीं। नेताओं को दो से लेकर 30 बूथ तक के क्लस्टर का प्रभारी बनाया गया था।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के अनुसार बैठक में प्रत्येक बूथ के परिणाम का विश्लेषण किया जाएगा। जिन बूथों पर कांग्रेस प्रत्याशी को हार मिली, वहां हार के कारणों का पता लगाया जाएगा। साथ ही क्लस्टर और सेक्टर स्तर पर तैनात टीमों के कामकाज की भी समीक्षा होगी।
कांग्रेस का लक्ष्य अब केवल संगठन खड़ा करना नहीं, बल्कि बूथ स्तर पर भाजपा के मुकाबले प्रभावी चुनावी मशीनरी तैयार करना है। आगामी चुनावों में पार्टी की रणनीति कितनी कारगर साबित होती है, इसका पहला बड़ा परीक्षण नगरीय निकाय चुनाव में देखने को मिलेगा।