MP: 35 साल की सेवा फिर भी चौथा वेतनमान नहीं! मंत्रालय कर्मचारियों में उबाल, आंदोलन की चेतावनी
मध्य प्रदेश में 35 साल की सेवा पूरी कर चुके मंत्रालय कर्मचारियों को 2023 के आदेश के बावजूद चौथा समयमान वेतनमान नहीं मिला है। इससे नाराज कर्मचारी संघ न ...और पढ़ें

कर्मचारी हो रहे लामबंद (प्रतीकात्मक चित्र)
HighLights
35 साल सेवा पूरी करने वालों को चौथा वेतनमान नहीं।
2023 के आदेश के बावजूद मंत्रालय कर्मचारियों को लाभ नहीं।
कर्मचारी संघ ने आंदोलन की चेतावनी दी, जल्द निर्णय की मांग।
राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश में 35 साल की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों को चौथा समयमान वेतनमान देने का मामला एक बार फिर गरमा गया है। वर्ष 2023 में इसके लिए आदेश जारी होने के बावजूद मंत्रालय, विधानसभा और लोकभवन के कर्मचारियों को अब तक इसका लाभ नहीं मिल सका है। वहीं, ऐसे संवर्ग जिन्हें समयमान वेतनमान योजना के दायरे में नहीं माना जाता था, उन्हें इसका लाभ दिए जाने से कर्मचारियों में नाराजगी और बढ़ गई है।
मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ ने सरकार के रवैये पर सवाल उठाते हुए जल्द निर्णय नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। संघ का कहना है कि आदेश जारी होने के करीब तीन साल बाद भी पात्र कर्मचारियों को उनका हक नहीं मिला है।
आदेश जारी, लेकिन मंत्रालय के कर्मचारियों को लाभ नहीं
संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक ने बताया कि 35 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को चौथा समयमान वेतनमान देने का प्रावधान है। सामान्य प्रशासन विभाग ने वर्ष 2023 में सभी विभागों को इस संबंध में आदेश जारी किए थे। इसके बावजूद मंत्रालय सेवा के कर्मचारियों को अभी तक इसका लाभ नहीं दिया गया।
नायक के मुताबिक विधानसभा और लोकभवन के कर्मचारी भी इसी समस्या से जूझ रहे हैं। कर्मचारियों को न तो चौथा समयमान वेतनमान दिया जा रहा है और न ही विभाग की ओर से लिखित रूप से यह स्पष्ट किया जा रहा है कि उन्हें इसका लाभ क्यों नहीं मिलेगा।
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ज्ञापन और बैठकों के बाद भी नहीं निकला रास्ता
मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ का कहना है कि इस मामले को लेकर कई बार शासन को ज्ञापन सौंपे गए। अधिकारियों के साथ बातचीत भी हुई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। इससे कर्मचारियों का असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
संघ ने सरकार से मांग की है कि पात्र कर्मचारियों को चौथा समयमान वेतनमान देने के मामले में तत्काल निर्णय लिया जाए। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि जल्द सकारात्मक पहल नहीं हुई तो कर्मचारी आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
सहायक अनुभाग और अनुभाग अधिकारियों का मामला भी लंबित
कर्मचारियों से जुड़ा एक अन्य मामला भी करीब तीन साल से शासन स्तर पर अटका हुआ है। मंत्रालय सेवा के सहायक अनुभाग अधिकारी और अनुभाग अधिकारियों को अलग वेतनमान देने की अनुशंसा ब्रह्मस्वरूप समिति और अग्रवाल आयोग ने की थी। इसके आधार पर इन संवर्गों के लिए अलग वेतनमान स्वीकृत किए गए थे।
ये दोनों संवर्ग केवल मंत्रालय सेवा में ही होते हैं। अब इस संबंध में अंतिम निर्णय के लिए प्रकरण मंत्रिमंडल के अनुमोदन के लिए भेजा जाना है, लेकिन संघ का आरोप है कि पिछले तीन वर्षों से यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी है।
कर्मचारियों का कहना है कि एक ओर समान सेवा अवधि पूरी करने वाले अन्य संवर्गों को वेतनमान का लाभ मिल रहा है, वहीं मंत्रालय सेवा के कर्मचारी अपने अधिकार के लिए वर्षों से शासन के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में सरकार की ओर से जल्द फैसला नहीं हुआ तो यह मुद्दा बड़े कर्मचारी आंदोलन का रूप ले सकता है।