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'बिट्टू तबाही' की अनोखी पहल, BSc के छात्र ने अपनी मेहनत से चमकाई MP की अजनार नदी

Published: Sat, 05 Sep 2026 06:25 PM (IST)Updated: Sat, 05 Sep 2026 06:29 PM (IST)

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21 साल के बिट्टू तबाही की कहानी।

21 साल के बिट्टू तबाही की कहानी।

HighLights

  1. बीएससी छात्र बिट्टू तबाही ने अकेले अजनार नदी साफ की।

  2. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बिट्टू की पहल की सराहना की।

  3. प्रशासन अब नदी प्रदूषण रोकने को एसटीपी बनाएगा।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक सबका ध्यान खींच लिया है।

पूरी बात को ऐसे समझिए कि यहां रहने वाले 21 साल के बीएससी के छात्र सुरेंद्र सिंह चौधरी, जिसे सोशल मीडिया पर 'बिट्टू तबाही' के नाम से जाना जाता है, ने प्रदूषित अजनार नदी की सफाई का बीड़ा उठाया है।

अकेला ही उठाया था नदी की सफाई का बीड़ा

दिलचस्प बात यह है कि इस साल 26 जनवरी से इस मुहिम की शुरुआत करने वाले बिट्टू ने शुरुआत में इस नदी से कचरा और मलबा हटाने का काम लगभग अकेले ही किया। इस दौरान उन्हें भारी स्वास्थ्य जोखिमों का सामना करना पड़ा।

नदी की सफाई के दौरान उन्हें सांपों से भी पाला पड़ा और स्थानीय मंदिर के पास सफाई करते समय उनके अंगों में संक्रमण भी हो गया। तमाम मुश्किलों के बावजूद उनका जज्बा कम नहीं हुआ।

अब सीएम मोहन यादव ने की मुलाकात

सोशल मीडिया पर जब बात फैली तब चारों तरफ लोग बिट्टू की तारीफ में कसीदे पढ़ने लगे। ऐसे में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी बिट्टू से मुलाकात की। सीएम ने बिट्टू के इस सराहनीय कार्य की जमकर प्रशंसा की और कहा कि उन्होंने सिर्फ एक नदी की सफाई नहीं की है, बल्कि पूरे समाज को यह विश्वास दिलाया है कि बड़े बदलाव के लिए भीड़ की नहीं, बल्कि एक सच्ची पहल की जरूरत होती है।

Mohan Yadav met Bittu Tabahi (1)

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब एक अकेला युवा अपने दम पर नदी को बचाने का कड़ा संकल्प ले सकता है, तो हम सब मिलकर अपने जल स्रोतों को कितना सुंदर और जीवनदायी बना सकते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मध्य प्रदेश सरकार के 'जल गंगा संवर्धन अभियान' का असली मकसद भी यही है, जल स्रोतों का संरक्षण, उनका पुनर्जीवन और इसमें आम जनता की भागीदारी।

बिट्टू ने सफाई अभियान की शेयर की तस्वीरें

इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब, बिट्टू ने सोशल मीडिया पर इस अभियान की तस्वीरें शेयर कीं, जिसमें नदी की सफाई से पहले और बाद की स्थिति साफ दिखाई देती है। उनके इन 'बिट्टू तबाही' नाम से वायरल हुए फोटो ने लोगों का दिल जीत लिया और उनकी मेहनत रंग लाई।

अब प्रशासन और स्थानीय लोग भी आए आगे

बिट्टू की इस लगन को देखकर ब्यावरा नगर पालिका भी उनकी मदद के लिए आगे आई। नगर पालिका के सब-इंजीनियर रूपेश कुमार नेताम ने बताया कि पालिका इस अभियान में उनका पूरा साथ दे रही है और कचरा हटाने के लिए भारी मशीनें मुहैया कराई गई हैं। प्रशासन ने नदी से पुराना कचरा, मलबा और पॉलीथिन हटाने के लिए पोक्लेन मशीन तैनात की।

अधिकारी ने बताया कि बिट्टू की इस पहल से प्रेरित होकर स्थानीय नागरिक भी इस सफाई अभियान में जुड़ गए। मानसून से पहले नगर पालिका हर साल नदी और नालों की सफाई करती है, और मानसून के पानी ने भी इस सफाई में काफी मदद की। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि सोशल मीडिया पर बिट्टू द्वारा शेयर की गई 'पहले और बाद' की तस्वीरें पूरी तरह असली हैं।

असली चुनौती- गंदा पानी रोकने के लिए एसटीपी का प्रस्ताव

हालांकि गौर करने वाली बात यह है कि इस सफाई के बाद भी एक बड़ा संकट अभी बाकी है। अधिकारियों का कहना है कि नदी के प्रदूषण की असली जड़ इसमें मिलने वाला गंदा पानी है। ब्यावरा नदी में कुल पांच बड़े नाले सीधे गंदा पानी गिराते हैं।

इस समस्या का स्थाई समाधान निकालने के लिए नगर पालिका ने कमर कस ली है। सब-इंजीनियर रूपेश कुमार नेताम ने बताया कि गंदे पानी को रोकने के लिए लगभग 14.77 करोड़ रुपये की लागत से एक एसटीपी बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस प्लांट के बनने से नदी में गंदा पानी जाना बंद हो जाएगा और प्रदूषण की समस्या का जड़ से समाधान हो जाएगा।