भोपाल में 154 करोड़ का फ्लाईओवर 18 माह में उखड़ा, पहली तेज बारिश में खुली निर्माण गुणवत्ता की पोल; अब पैचवर्क से लीपापोती
भोपाल का 154 करोड़ रुपये का डॉ. भीमराव आंबेडकर फ्लाईओवर 18 महीने में ही खराब हो गया है, पहली बारिश में ही निर्माण गुणवत्ता की पोल खुल गई। जगह-जगह गड्ढे और सरिया दिखने के बाद लोक निर्माण विभाग ने जांच शुरू कर पैचवर्क कराया है।

आंबेडकर फ्लाईओवर पर गड्ढों की मरम्मत और सफाई करते हुए कर्मचारी। (फोटो- जागरण)
HighLights
भोपाल का 154 करोड़ का फ्लाईओवर 18 माह में खराब।
पहली बारिश में निर्माण गुणवत्ता की पोल खुली, गड्ढे बने।
लोक निर्माण विभाग ने जांच शुरू की, पैचवर्क जारी।
डिजिटल डेस्क, भोपाल। उत्तर प्रदेश में लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के जगह-जगह धंसने जैसे भ्रष्टाचार की झलक भोपाल में भी दिखी है। यहां 18 महीने पहले बना डा. भीमराव आंबेडकर फ्लाईओवर जगह-जगह से उधड़ने लगा है। इस ब्रिज के निर्माण पर 154 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। शहर के गणेश मंदिर और एमपी नगर क्षेत्र में जाम की समस्या को दूर करने के लिए इस फ्लाईओवर को 2019 में मंजूरी दी गई थी।
2020 में शुरू हुआ था निर्माण
उस समय इसकी लागत 140 करोड़ अनुमानित थी। करीब तीन किलोमीटर लंबे और 15 मीटर चौड़े पुल का निर्माण दिसंबर 2020 से शुरू हुआ। 23 जनवरी 2025 को इसका लोकार्पण हुआ, उस समय अधिकारियों ने इसे भोपाल का सबसे आधुनिक निर्माण बताया था। हालांकि नगरीय नियोजन के जानकार इसकी डिजाइन पर सवाल उठाते रहे हैं।
पहली तेज बारिश में खुली पोल
इस साल पहली भारी बारिश ने उसके निर्माण की गुणवत्ता की भी पोल खोल दी। पुल का डामर इस कदर उखड़ा कि जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं और लोहे के सरिए बाहर दिखने लगे हैं। लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता गोपाल सिंह खुद पुल पर पहुंचे।
रिपोर्ट के बाद हरकत में आया विभाग
अब कारणों की जांच की जा रही है। 12 अगस्त के अंक में दैनिक जागरण के सहयोगी प्रकाशन नईदुनिया ने इसपर रिपोर्ट प्रकाशित की थी। बुधवार दोपहर बाद लोक निर्माण विभाग और निर्माण कंपनी से जुड़े इंजीनियरों का दस्ता पुल पर पहुंचा। आनन-फानन में पैचवर्क से अनियमितता के दाग छिपाने की कोशिश शुरू हो गई।
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फ्लाईओवर की सड़क पर हुए गड्ढों को भरवा दिया गया है। साथ ही ब्रिज पर सफाई का काम जारी है। नियमित सफाई और मानिटरिंग के निर्देश दिए गए हैं।
- गोपाल सिंह, मुख्य अभियंता, ब्रिज, पीडब्ल्यूडी।

