भोपाल में 10 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे चयनित शिक्षक अभ्यर्थियों ने लिखा खून से पत्र, CM-शिक्षा मंत्री से पदवृद्धि की मांग
भोपाल में वर्ग-2 और वर्ग-3 शिक्षक भर्ती में पद बढ़ाने की मांग को लेकर 10 दिन से भूख हड़ताल कर ...और पढ़ें

चयनित अभ्यर्थियों ने खून से पत्र लिखा।
HighLights
भोपाल में शिक्षक भर्ती के लिए 10 दिन से भूख हड़ताल।
अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को खून से पत्र लिखा।
हजारों रिक्त पदों के बावजूद सीमित भर्ती का आरोप।
डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश में वर्ग-2 और वर्ग-3 शिक्षक भर्ती में पद बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। राजधानी के नीलम पार्क में 10 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे अभ्यर्थियों ने रविवार को मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के नाम अपने खून से पत्र लिखकर भर्ती में पद बढ़ाने की मांग रखी।
अभ्यर्थियों का कहना है कि इतने दिनों से आंदोलन चलने के बावजूद सरकार की ओर से कोई अधिकारी, मंत्री या प्रतिनिधि उनसे बातचीत करने नहीं पहुंचा है। उनका आरोप है कि लगातार अनदेखी के कारण उन्हें यह कदम उठाने को मजबूर होना पड़ा।
खाली पदों के बावजूद सीमित भर्ती
आंदोलनरत अभ्यर्थियों का दावा है कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में प्राथमिक शिक्षकों के हजारों पद लंबे समय से रिक्त हैं। इसके बावजूद शिक्षक भर्ती में अपेक्षाकृत कम पद जारी किए गए हैं।
अभ्यर्थियों ने स्कूल शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग में प्राथमिक शिक्षक के करीब 1.09 लाख पद रिक्त होने का दावा किया है। उनका कहना है कि वर्ष 2022 और 2023 में प्राथमिक शिक्षकों के माध्यमिक शिक्षक पद पर पदोन्नत होने के बाद प्राथमिक शिक्षक के पदों की संख्या और बढ़ी, लेकिन इसके अनुपात में भर्ती नहीं की गई। आंदोलनकारियों के मुताबिक 30 हजार से अधिक पात्र अभ्यर्थी पद बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
आरक्षण को लेकर भी सवाल
अभ्यर्थियों का कहना है कि प्राथमिक शिक्षक भर्ती में 13,089 पद जारी किए गए हैं। इनमें से करीब 3,200 पद विशेष शिक्षकों के लिए रखे गए हैं, जबकि कई पद अतिथि शिक्षकों के लिए निर्धारित किए जाने का उनका दावा है। अभ्यर्थियों का सवाल है कि जब विभाग में बड़ी संख्या में पद खाली हैं तो सभी पात्र अभ्यर्थियों को अवसर देने के लिए पदों की संख्या क्यों नहीं बढ़ाई जा रही है।
वर्ग-2 में भी कम पदों को लेकर नाराजगी
वर्ग-2 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने भी पदों की संख्या को लेकर नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि अलग-अलग विषयों और श्रेणियों में कहीं 40, 50 तो कहीं 70 जैसे बेहद कम पद जारी किए गए हैं, जबकि विभाग में बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं।
आंदोलनकारियों का दावा है कि वर्ग-2 में भी करीब 50 प्रतिशत पद खाली हैं। इसी आधार पर वर्ग-2 के अभ्यर्थी भर्ती में पद बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने सरकार से सवाल किया कि प्रदेश के मजदूर, किसान और मध्यम वर्गीय परिवारों के बड़ी संख्या में बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं। जब शिक्षा विभाग के पास बजट और रिक्त पदों की जानकारी उपलब्ध है, तो पर्याप्त संख्या में शिक्षक भर्ती क्यों नहीं की जा रही?
उनका कहना है कि यदि प्रदेश में 1.15 लाख से अधिक पद रिक्त होने का दावा सही है, तो सीमित संख्या में भर्ती निकालने का औचित्य सरकार को स्पष्ट करना चाहिए। अभ्यर्थियों ने यह भी आरोप लगाया कि टीवी बहसों में जिम्मेदार लोग सीधे सवालों का जवाब देने के बजाय अपनी बात रखने पर अधिक जोर देते हैं।
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खून से पत्र, बोले- अब धैर्य खत्म हो रहा
भूख हड़ताल कर रहे अभ्यर्थियों ने कहा कि लगातार अनदेखी के कारण बेरोजगार युवाओं में आक्रोश बढ़ रहा है। उनका कहना है कि 10 दिन तक भूख हड़ताल के बाद खून से पत्र लिखने की स्थिति पैदा होना सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संवाद की कमी को दर्शाता है।
उन्होंने सरकार से अपील की कि जो फैसले उसके अधिकार क्षेत्र में हैं, उन पर तत्काल कार्रवाई की जाए।
आंदोलनकारियों ने मांग की है कि मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री स्वयं अभ्यर्थियों से बातचीत करें और वर्ग-2 व वर्ग-3 शिक्षक भर्ती में विभाग के वास्तविक रिक्त पदों के आधार पर पद बढ़ाने का निर्णय लिया जाए।
