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धार भोजशाला विवाद : सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हाई कोर्ट मुस्लिम पक्ष की आपत्ति वाले हिस्से की वीडियोग्राफी देखकर ले निर्णय

Updated: Wed, 01 Apr 2026 09:50 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने धार के भोजशाला विवाद में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को निर्देश दिया है कि वह एएसआई सर्वे की वीडियोग्राफी में मुस्लिम पक्ष की आपत्तियों वाल ...और पढ़ें

धार भोजशाला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने दी अहम व्यवस्था।

धार भोजशाला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने दी अहम व्यवस्था।

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई कर रहे मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से कहा है कि वह सर्वे के दौरान भारत पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा की गई वीडियोग्राफी में मुस्लिम पक्ष द्वारा उठाई गई आपत्ति से संबंधित अंश को देखकर उन आपत्तियों पर विचार करेगा और निर्णय लेगा। शीर्ष अदालत ने इस निर्देश के साथ सर्वे के दौरान रिकॉर्ड की गई वीडियोग्राफी और रंगीन फोटो की प्रति उपलब्ध कराने की मांग वाली मुस्लिम पक्ष की अपील का निपटारा कर दिया।

हाई कोर्ट में सुनवाई पर रोक नहीं

ऐसे में साफ हो गया है कि हाई कोर्ट में दो अप्रैल को होने वाली सुनवाई होना लगभग निश्चित है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पर कोई रोक नहीं लगाई है। सुप्रीम कोर्ट की प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जोयमाल्या बाग्ची, और विपुल एम पंचोली की पीठ ने ये आदेश बुधवार को मुस्लिम पक्ष की अपील पर सुनवाई के बाद दिए।

दोनों पक्षों ने पेश कीं दलीलें

  • मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने कोर्ट से अनुरोध किया कि उन्हें सर्वे के दौरान की गई वीडियोग्राफी और रंगीन फोटो की प्रतियां उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे सर्वे को लेकर अपनी आपत्तियां हाई कोर्ट में दाखिल कर सकें।
  • हालांकि दूसरी ओर हिन्दू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से पेश वकील विष्णु शंकर जैन ने पीठ को बताया कि शीर्ष अदालत के आदेश के मुताबिक हाई कोर्ट एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर संज्ञान ले चुका है और उसकी प्रतियां पक्षकारों को दी जा चुकी हैं। मुस्लिम पक्ष सर्वे रिपोर्ट पर अपनी 470 पेज की आपत्तियां भी दाखिल कर चुका है।
  • जैन ने बताया कि मामले में गुरुवार को हाई कोर्ट में सुनवाई होनी है और हाई कोर्ट ने अभी मुस्लिम पक्ष की मांग खारिज नहीं की है।
  • वहीं सलमान खुर्शीद का कहना था कि उन्होंने सिर्फ प्रारंभिक आपत्तियां दाखिल की हैं, उन्हें वीडियोग्राफी और रंगीन फोटो उपलब्ध कराई जाएं ताकि वे पूरी तरह से अपनी आपत्तियां दाखिल कर सकें।
  • खुर्शीद ने कहा कि भोजशाला के सर्वे के दौरान एएसआई ने वीडियोग्राफी भी की थी। शीर्ष अदालत ने वहां खुदाई करने को मना किया था लेकिन एएसआई ने सर्वे के दौरान खुदाई की थी, जिस पर उनके पक्ष ने वीडियोग्राफी के दौरान आपत्ति उठाई थी, जो कि उसमें रिकॉर्ड होगी, इसीलिए वे वीडियोग्राफी की प्रति मांग रहे हैं और एक सप्ताह का समय दिया जाए वे अपना जवाब दाखिल कर देंगें।

सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट को आदेश दिया कि वह वीडियोग्राफी का वह अंश देखे और अन्य आपत्तियों के साथ उन आपत्तियों पर भी नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के मुताबिक विचार करे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट इसके बाद उचित निर्णय ले। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह मामले की मेरिट पर कोई राय प्रकट नहीं कर रहा है और हाई कोर्ट के समक्ष सारे मुद्दे विचार के लिए खुले हैं और पक्षकार हाई कोर्ट के सामने अपनी बात रख सकते हैं।

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मालूम हो कि एएसआई ने हाई कोर्ट के आदेश पर भोजशाला का सर्वे करके रिपोर्ट हाई कोर्ट में दाखिल कर दी है, जिस पर गुरुवार से नियमित सुनवाई होनी है।