रील में चमकी अजनार, जमीन पर क्या है सच? पढ़ें 'बिट्टू तबाही' के दावों की पड़ताल करती यह ग्राउंड रिपोर्ट
अजनार नदी के पुलों, किनारों, झाड़ियों में फंसा टनों कचरा कह रहा नगरीय निकाय के लापरवाही की कहानी। ब्यावरा के ...और पढ़ें

अजनार में, घाट पर, पुल के नीचे कचरे का अंबार। (फोटो- जागरण)
HighLights
ब्यावरा की अजनार नदी राजगढ़ की सबसे प्रदूषित नदी।
बिट्टू तबाही ने सोशल मीडिया पर नदी सफाई का दावा किया।
ग्राउंड रिपोर्ट में नदी में अब भी भारी प्रदूषण मौजूद।
पंकज श्रीवास्तव, (ब्यावरा से लौटकर)। ब्यावरा कस्बे के बीच से गुजरने वाली अजनार नदी राजगढ़ जिले की सबसे प्रदूषित नदी है। पिछले दिनों शहर के एक छात्र सुरेंद्र सिंह चौधरी उर्फ बिट्टू तबाही ने इंटरनेट मीडिया पर इसकी सफाई का दावा कर सनसनी फैला दी। उसकी रील बहुप्रशंसित और बहु प्रसारित हो रही है। दैनिक जागरण ने रविवार को ब्यावरा जाकर खुद इसकी पड़ताल की तो अलग तस्वीर दिखी।
गंदी नदी व्यावरा के लोगों की स्वच्छता के प्रति बेफिक्री और नगरीय निकाय की बेरुखी की साफ तस्वीर दिखा रही है.. इस नदी की साफ करने के लिए कोई एक बिट्टू काफी नहीं है, इसके लिए और बिट्टुओं के समर्पण और सरकार के सहयोग की जरूरत होगी।
जगह-जगह पड़ा कचरा
गंगा मंदिर के सामने के जिस हिस्से की तस्वीर बिट्टू ने डाली थी, एक नजर में देखने पर वह वैसी ही नजर आती है। लेकिन नदी की धारा के साथ नीचे उतरने पर सच उतराता हुआ दिखने लगता है। गंगा मंदिर की दीवार किनारे मेडिकल वेस्ट पड़ा हुआ। इसके अलावा अस्पताल रोड के पुल के खंभों, रेलिंग और डक्ट में टनों कचरा फंसा दिखता है। उससे नीचे डोल ग्यारस घाट के आसपास देसी शराब की पन्नियां व गंदगी पसरी पड़ी है।

इंदौर नाका क्षेत्र में स्थित छोटे पुल में यह कचरा फंसा हुआ है। यह सारा कचरा 10 अगस्त की बाढ़ में नदी के बहाव के साथ नीचे की ओर आया है। यह तस्वीर खुद बता रही है कि नदी को प्रकृति ने अपने तरीके से भी साफ किया है।
प्रशासन के सहयोग बिना संभव नहीं सफाई
बिट्टू तबाही ने इस रील के जरिए अजनार के प्रदूषण को राष्ट्रीय फलक पर जरूर पहुंचा दिया है। उसकी कोशिशों से स्वच्छता का संदेश गया है। गंगा मंदिर समिति के अध्यक्ष मुकेश मारू का तो कहना है कि वहां इतनी गंदगी रहती है इस तरह सफाई करना बिना प्रशासन के सहयोग के संभव नहीं है। नदी के किनारे रहने वाले श्याम दांगी बताते हैं कि रामेश्वर घाट के आसपास कुछ लोगों ने सफाई की थी, उसमें बिट्टू भी रहे होंगे, लेकिन उससे पूरी नदी साफ नहीं हुई। अभी बारिश के पानी की वजह से नदी कुछ साफ दिख रही है।

वर्षों से उपेक्षित है सुंदरीकरण की मांग
अजनार की स्वच्छता और सुंदरीकरण की मांग एक दशक पुरानी है। 2019 में पहली बार क्षेत्रीय विधायक ने विधानसभा में अजनार नदी के सुंदरीकरण का मुद्दा उठाया। लेकिन उन्हीं के सवाल पर दिसंबर 2021 में सरकार ने ऐसी किसी कार्ययोजना से इन्कार कर दिया। 2022 में मुद्दा उठा तो कहा गया कि चार गंदे नालों को नदी में जाने से रोकने की डीपीआर बन रही है, लेकिन यह डीपीआर कभी सामने नहीं आई। अब एक एसटीपी बनाने की स्वीकृति मिली है।

बिट्टू की कोशिशों के भी निशान
इस दावे-प्रतिदावे के बीच कुछ ऐसे लोग भी मिले जिन्होंने बिट्टू तबाही की कोशिशों की तस्दीक की। नगर पालिका अध्यक्ष के प्रतिनिधि पवन कुशवाहा ने बताया कि नगर पालिका समय समय पर अजनार की सफाई करती रही है। दो माह पहले बिट्टू ने उनसे मशीनरी मांगी जो हमने निश्शुल्क उपलब्ध कराई।
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जिन तीन घाटों को साफ करने के दावे किए जा रहे हैं उसे नगर पालिका, जिला प्रशासन व अजनार बचाओ समिति के माध्यम से पिछले सें कई वर्षों से हम करते आ रहे हैं। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत जेसीबी, पोकलेन लगाकर भी इसकी सफाई कराई गई थी। तब भी 70 प्रतिशत काम ही हो पाया। बिट्टू के बारे में हमें जानकारी नहीं है।
- इकरार अहमद, सीएमओ, ब्यावरा नपा
मैंने इस साल जनवरी में काम शुरू किया था और रक्षाबंधन तक नदी को काफी हद तक साफ कर दिया। इस दौरान लगातार पानी में रहने की वजह से मेरे पैरों में गंभीर संक्रमण भी हो गया था। सफाई के लिए गर्मियों में सुबह जल्दी पहुंच जाता था, जबकि सर्दियों में दोपहर में काम करता था।
- सुरेंद्र सिंह चौधरी उर्फ बिट्टू तबाही
