ब्रिटिशकाल में कैसी थी रियासतों की तस्वीर... 149 साल पुराने दस्तावेज ने खोले राज; नेपाल के राजा से ग्वालियर-भोपाल तक पूरा इतिहास दर्ज
1877 के दिल्ली दरबार के पहले ब्रिटिश शासकों द्वारा तैयार कराए गए रियासतों के इतिहास में सामने आई जानकारी। ज्ञान ...और पढ़ें

दस्तावेज में नेपाल के साथ ग्वालियर रियासत के बारे में वर्णन। (सौ- सौजन्य राज्य पुरातत्व संग्रहालय एवं अभिलेखागार)
HighLights
1877 दिल्ली दरबार का 149 साल पुराना दस्तावेज मिला।
ग्वालियर, भोपाल, नेपाल सहित 94 रियासतों का विवरण।
ज्ञान भारतम मिशन के तहत दुर्लभ पांडुलिपि की खोज।
शशिकांत तिवारी, भोपाल। ब्रिटिश साम्राज्य के अंतर्गत आने वाली रियासतों का लगभग डेढ़ सौ वर्ष पहले लिखा गया इतिहास सामने आया है। एक जनवरी 1877 को दिल्ली दरबार के समय तत्कालीन ब्रिटिश शासकों ने इसे तैयार कराया था। इसमें नेपाल, काबुल, बलूचिस्तान के शासकों का भी पूरा विवरण है। जिन राजाओं को दिल्ली दरबार में आमंत्रित किया गया था, उन्हीं का विवरण तैयार कराया गया था। इसमें उस समय के शासक की जीवनी, कार्य, ब्रिटिश सरकार से रिश्ते का विवरण है।
केंद्र सरकार के ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत पांडुलिपियों के सर्वेक्षण और संग्रहण के दौरान 130 पन्नों में लिखा इतिहास मिला है, जिसमें 94 रियासतों का विवरण है। रतलाम के जावरा में पुजारी संघ के अध्यक्ष महेश शर्मा के पास यह सुरक्षित था। इसके पहले जावरा की एक लाइब्रेरी में यह रखा था, जिसके बंद होने पर पुजारी ने अपने पास रखा था।
भोपाल से कहीं ज्यादा अमीर थी ग्वालियर रियासत
इस दस्तावेज के अनुसार, ग्वालियर रियासत की सालाना आय 85 लाख रुपये थी, जो कश्मीर के 84 लाख, नेपाल के 56 लाख, भोपाल रियासत के 24 लाख से अधिक है। ग्वालियर राजा और भोपाल के नवाब या बेगम व नेपाल के शासक को 21 तोपों की सलामी दी जाती थी। इसमें रियासत के प्रमुख अधिकारी और शासक को कितने तोपों की सलामी दी जाएगी, इसका भी उल्लेख है।
नेपाल के राजा का भी विस्तृत वर्णन
इस दुर्लभ दस्तावेज में नेपाल के राजा सुरेंद्र विक्रम शाह बहादुर का वर्णन भी है। इससे साफ है कि वह भी शामिल हुए होंगे। हालांकि, यह कहा जाता है कि नेपाल कभी किसी का गुलाम नहीं रहा। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं हो रहा है कि नेपाल के राजा को किस हैसियत से बुलाया गया था। मध्य प्रदेश से ग्वालियर, भोपाल आदि रियासतों के प्रमुख भी सम्मिलित हुए थे।
अपभ्रंश हिंदी में है दस्तावेज
इस दस्तावेज को अपभ्रंश हिंदी में लिखा गया है। इसमें उर्दू के शब्दों का भी खूब प्रयोग किया गया है। सबसे ऊपर नेपाल का इतिहास है। दरबार में शामिल होने जा रहे राजाओं के फोटो भी हैं। मध्य प्रदेश पुरातत्व विभाग से अनुबंधित भाषा विशेषज्ञ एस नईमुद्दीन ने मुख्य अंश का हिंदी में रूपांतरण किया है।
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किस रियासत या राज्य के बारे में क्या लिखा है
नेपाल
शासक महाराजा सुरेंद्र विक्रम शाह बहादुर 1812 ई. में गद्दी पर बैठे। क्षेत्रफल 54,000 वर्ग मील, जनसंख्या लगभग 52 से 56 लाख है। सालाना राजस्व 43 लाख रुपये है। ब्रिटिश सरकार इस राज्य से कोई कर (ट्रिब्यूट) नहीं लेती थी। 1857 ई. के विद्रोह के दौरान, गोरखपुर और अवध के इलाके इस राज्य को दिए गए थे।
ग्वालियर रियासत
महाराज जयाजी राव सिंधिया बहादुर (जाति से मराठा) सात फरवरी, 1843 को गद्दी पर बैठे। 21 तोपों की सलामी का सम्मान प्राप्त था। क्षेत्रफल 32,000 वर्ग मील और आबादी ढाई लाख थी। रियासत की सालाना आय 85 लाख रुपये थी। ब्रिटिश सरकार को सालाना 20 हजार रुपये का कर दिया जाता था। 5,000 पैदल सैनिक, 2,500 घुड़सवार सैनिक, 480 तोपची और दो ब्रिटिश तोपें थीं।
भोपाल रियासत
नवाब शाहजहां बेगम 1868 में गद्दी पर बैठीं। रियासत का क्षेत्रफल 6,764 वर्ग मील और आबादी छह लाख 63 हजार ,656 है। सालाना आय 24 लाख रुपये में ब्रिटिश सरकार को हर साल दो लाख रुपये दिए जाते थे। बेगम की सेना में 732 घुड़सवार, 3,428 पैदल सैनिक और 232 तोपची थे। वह दिल्ली दरबार में शामिल होने वाली पहली महिला शासक थीं।
जम्मू और कश्मीर राज्य
शासक महाराजा रणबीर सिंह बहादुर थे। क्षेत्रफल 25 हजार वर्गमील और जनसंख्या 1,5 लाख 37 हजार थी। ब्रिटिश सरकार को सालाना नज़राने में एक घोड़ा, बारह पश्मीना बकरियां और तीन जोड़ी दुशाला (बढ़िया शाल) शामिल हैं। सेना में 26,970 लोगों थे।
ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत पांडुलिपियों के संग्रहण और सर्वेक्षण के दौरान रियासतों का इतिहास मिला है, जो ब्रिटिश शासकों ने तैयार कराया था। इसमें मप्र की रियासतें भी शामिल हैं। इसमें दर्ज जानकारी इतिहास को समझने की की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है।
- मदन कुमार नागरगोजे, आयुक्त, पुरातत्व संचालनालय एवं अभिलेखागार, भोपाल
