ट्रेन से बाइक भेजने में कौन-कौन से डॉक्यूमेंट लगते हैं? 2 मिनट में समझिए रेलवे के सभी नियम
भारतीय रेलवे एक जगह से दूसरी जगह टू-व्हीलर भेजने की सुविधा देता है।

ट्रेन से साइकिल या मोटरसाइकिल ले जाने की सोच रहे हैं? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। ट्रेन से सफर करते समय हम अपने कपड़े वगैरह जैसी चीजें तो बैग में भरकर ले जाते हैं, लेकिन अगर साइकिल या मोटरसाइकिल भेजना हो, तो ट्रेन के क्या नियम हैं?
भारतीय रेलवे से आप अपने टू-व्हीलर को देश में कहीं भी आसानी से भेज सकते हैं। हालांकि, इससे जुड़े नियमों के बारे में पता होना चाहिए, वरना आप रेलवे के पार्सल ऑफिस में कन्फ्यूज होकर रह जाएंगे।
अगर आप भी स्टेशन पर होने वाले झंझटों और भागदौड़ से बचना चाहते हैं, तो यह आर्टिकल आपके लिए ही है। आइए समझते हैं ट्रेन से टू-व्हीलर भेजने का सही प्रोसेस और इसके जरूरी नियम।

(Image Source: AI-Generated)
साइकिल साथ ले जाने के नियम
- नहीं मिलती फ्री सुविधा: ट्रेन के सफर में साइकिल को आपके सामान्य सूटकेस या बैग की तरह 'फ्री लगेज' का हिस्सा नहीं माना जाता। आप किसी भी क्लास में सफर कर रहे हों, साइकिल को हमेशा एक अलग लगेज या पार्सल के तौर पर ही बुक करना होगा।
- कहां रखी जाती है साइकिल: आप साइकिल को अपने साथ पैसेंजर कोच में नहीं ले जा सकते। बुकिंग के बाद इसे ट्रेन के सबसे आगे या पीछे वाले गार्ड के डिब्बे में रखा जाता है। हालांकि, अगर आपके पास ऐसी फोल्डिंग साइकिल है जो एक छोटे बैग में आसानी से फिट हो जाए, तो कुछ खास शर्तों के साथ उसे केबिन में ले जाने की इजाजत मिल सकती है।
- बुकिंग मय: यात्रा वाले दिन अपनी ट्रेन छूटने से करीब दो-तीन घंटे पहले स्टेशन के पार्सल ऑफिस पहुंचें। वहां अपना कंफर्म टिकट और एक वैलिड आईडी कार्ड दिखाकर फीस भरें और लगेज की रसीद कटवा लें।
- बिना बुकिंग के पकड़े जाने पर कार्रवाई: अगर आप बिना रसीद कटवाए साइकिल को प्लेटफॉर्म या ट्रेन के डिब्बे में ले जाते हैं, तो चेकिंग स्टाफ इसे जब्त कर सकता है। इसके साथ ही आपको पार्सल चार्ज का कई गुना ज्यादा जुर्माना भी भरना पड़ सकता है।
बाइक पार्सल करने का पूरा प्रोसेस
- फॉर्म और जानकारी: बाइक पार्सल करने के लिए सबसे पहले पार्सल बुकिंग ऑफिस से एक फॉर्म लें। इसमें आपको अपना मोबाइल नंबर, डेस्टिनेशन और गाड़ी से जुड़ी सारी डिटेल्स भरनी होंगी। रेलवे अधिकारी इसके बाद आपकी बाइक का वजन और जांच करेंगे।
- ये डॉक्यूमेंट्स हैं बेहद जरूरी: पार्सल बुकिंग के वक्त आपके पास आधार कार्ड, चालू मोबाइल नंबर, बाइक की आरसी और फर्स्ट पार्टी इंश्योरेंस का होना जरूरी है। फर्स्ट पार्टी इंश्योरेंस इसलिए मांगा जाता है ताकि रास्ते में कोई नुकसान होने पर क्लेम किया जा सके। अगर बाइक किसी और के नाम पर है, तो केवल फोटोकॉपी से काम नहीं चलेगा, बल्कि आपको ओरिजिनल कागज या अथॉरिटी लेटर दिखाना होगा।
- पेट्रोल और पैकिंग: रेलवे सुरक्षा नियमों के तहत गाड़ी की टंकी का पेट्रोल पूरी तरह खाली होना चाहिए। पार्सल करने से पहले बाइक के साइड मिरर भी हटा लें। हैंडल और पूरी बॉडी को सुरक्षित रखने के लिए इसकी मजबूत पैकिंग करवानी होती है। स्टेशन पर मौजूद वेंडर पैकिंग के लिए गाड़ी के साइज के हिसाब से 300 से 600 रुपये तक चार्ज करते हैं।
भूलकर भी न खोएं रसीद, जानें डिलीवरी के नियम
- कितना आएगा खर्च: आपकी बाइक का किराया उसके वजन, तय की जाने वाली दूरी और ट्रेन की कैटेगरी पर निर्भर करता है। एक अनुमान के मुताबिक, 800 किलोमीटर दूर बाइक भेजने का कुल खर्च पार्सल और पैकिंग मिलाकर लगभग 3,000 रुपये के आसपास आ सकता है।
- रसीद ही सब कुछ है: पार्सल बुक करने के बाद मिलने वाली ओरिजिनल रसीद को बहुत हिफाजत से रखें। डेस्टिनेशन स्टेशन पर यही रसीद दिखाकर आपको आपकी बाइक या साइकिल वापस मिलेगी।
- डिलीवरी में न करें देरी: गाड़ी अपने डेस्टिनेशन पर पहुंचने के बाद उसे समय पर रिसीव कर लें। अगर आपकी बाइक 6 दिन से ज्यादा स्टेशन पर खड़ी रहती है, तो रेलवे आपसे एक्स्ट्रा चार्ज वसूलेगा।
- अलग ट्रेन से आ सकती है गाड़ी: यह बिल्कुल जरूरी नहीं है कि आपकी बाइक उसी ट्रेन से भेजी जाए जिसमें आप खुद सफर कर रहे हैं। अगर उस ट्रेन के ब्रेक-वैन में जगह नहीं है, तो रेलवे अपने हिसाब से गाड़ी को किसी दूसरी ट्रेन से पार्सल कर सकता है।
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