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    क्या इंटरनेट वाला प्यार असल जिंदगी के रिश्तों से कमजोर होता है? रिसर्च में पता चली सच्चाई

    Updated: Mon, 06 Apr 2026 08:46 AM (GMT+05:30)

    आज के डिजिटल दौर में इंटरनेट पर प्यार तलाशना बहुत आम बात हो गई है, लेकिन क्या डेटिंग ऐप्स के जरिए मिलने वाले कपल असल जिंदगी में सचमुच खुश रहते हैं? ...और पढ़ें

    ऑनलाइन प्यार का 'रियलिटी चेक': क्या इंटरनेट की दुनिया से बाहर टिक पाता है यह रिश्ता? (Image Source: AI-Generated)

    ऑनलाइन प्यार का 'रियलिटी चेक': क्या इंटरनेट की दुनिया से बाहर टिक पाता है यह रिश्ता? (Image Source: AI-Generated)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आजकल मोबाइल पर 'राइट स्वाइप' करके अपना पार्टनर ढूंढना एक आम बात हो गई है, लेकिन क्या स्क्रीन के जरिए मिला यह प्यार लंबे समय तक खुशी दे पाता है?

    ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने दुनियाभर के 6,600 से अधिक लोगों पर एक विस्तृत अध्ययन किया है। 'टेलीमैटिक्स एंड इंफॉर्मेटिक्स' पत्रिका में छपी इस रिसर्च के नतीजे बताते हैं कि जो लोग इंटरनेट के बजाय असल दुनिया में एक-दूसरे से मिलते हैं, वे अपने रिश्ते से कहीं ज्यादा संतुष्ट और खुश रहते हैं।

    Is Your Internet Soulmate a Mistake

    (Image Source: Freepik)

    असल जिंदगी की मुलाकातें क्यों हैं खास?

    इस शोध के सह-लेखक एडम बोड ने वाइस को बताया कि जिन लोगों की मुलाकात स्कूल, दफ्तर, दोस्तों के जरिए या इत्तेफाक से किसी जगह पर होती है, उनके बीच प्यार, जुनून और समर्पण की भावना काफी गहरी होती है। इसके उलट, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए बने जोड़ों में आपसी समझ, रिश्ते की गहराई और प्रेम की तीव्रता थोड़ी कम आंकी गई है।

    कॉमन बैकग्राउंड की कमी है एक बड़ी वजह

    डिजिटल दुनिया के रिश्ते असल जिंदगी के रिश्तों से क्यों पिछड़ रहे हैं, इसके पीछे एक बड़ा कारण 'कॉमन बैकग्राउंड' का होना है। जब हम किसी से अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में मिलते हैं, तो अक्सर हमारी संस्कृति, शिक्षा और जीवन के अनुभव काफी हद तक मेल खाते हैं। यह समानता रिश्ते की नींव को मजबूत बनाती है। वहीं, डेटिंग ऐप्स पर मिले लोगों के बीच इन साझा अनुभवों की कमी होती है, जिससे एक-दूसरे के साथ गहरा जुड़ाव महसूस करने में समय लगता है।

    Digital Intimacy

    (Image Source: Freepik)

    विकल्पों की भरमार और उलझन

    इस स्टडी में एक और अहम बात सामने आई है। आज के डेटिंग ऐप्स लंबे और मजबूत रिश्तों के बजाय शॉर्ट-टर्म रिश्तों को ज्यादा बढ़ावा दे रहे हैं। इसके साथ ही, ऐप्स पर मौजूद हजारों प्रोफाइल्स की वजह से यूजर्स हमेशा असमंजस में रहते हैं। उन्हें लगता है कि शायद बस एक 'क्लिक' करने पर उन्हें कोई और बेहतर इंसान मिल जाए। विकल्पों की इसी भरमार के कारण लोग स्थायी खुशी तलाशने के बजाय सिर्फ सोच-विचार और उलझन में ही फंसे रह जाते हैं।

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    Online dating success rates

    (Image Source: AI-Generated)

    हर उम्र के लोगों पर लागू होती है यह बात

    दिलचस्प बात यह है कि यह ट्रेंड सिर्फ युवाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि हर उम्र के लोगों में देखा जा रहा है। हालांकि अब ऑनलाइन डेटिंग को लेकर समाज में कोई हिचकिचाहट नहीं है, लेकिन आंकड़ों के मुताबिक पारंपरिक तरीके से बने रिश्ते आज भी ज्यादा सफल हो रहे हैं।

    क्या ऑनलाइन डेटिंग पूरी तरह असफल है?

    अध्ययन के अंत में शोधकर्ताओं ने यह स्पष्ट किया है कि ऑनलाइन मिलने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि रिश्ता हमेशा नाकाम ही होगा। अनगिनत ऐसे कपल्स हैं जिन्होंने इंटरनेट पर मिलकर एक बेहद प्यारा और मजबूत रिश्ता कायम किया है, लेकिन अगर बात लंबे समय तक चलने वाले और गहराई से जुड़े रिश्ते की हो, तो प्यार की शुरुआत करने का पुराना और पारंपरिक तरीका आज भी सबसे असरदार साबित होता है।

    Source: Telematics and Informatics

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