विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

बात-बात पर रोने और जिद करने लगा है बच्चा? थप्पड़ या डांट से नहीं, इन तरीकों से करें हैंडल

Published: Tue, 08 Sep 2026 06:08 PM (IST)

हर बार बच्चे की हठ सुनने के बजाय उसे कम करने की कोशिश करने में समझदारी है।

नन्हे बच्चों की जिद कम करने के टिप्स (Image Source: AI Generated)

नन्हे बच्चों की जिद कम करने के टिप्स (Image Source: AI Generated)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। जैसे-जैसे नन्हा शिशु चलने और बोलने लगता है, उसमें जिद की प्रवृति भी उतनी ही बढ़ जाती है। वह हर छोटी चीज को मांगने की जिद करता है, यह सोचकर कि वह पेरेंट्स का दुलारा है जो मांगेगा मिल ही जाएगा। ऐसे में अगर आप बच्चे की इस जिद से बहुत परेशान हैं और इसे कम करना चाहते हैं तो यहां बताए गए टिप्स आपके काम सकते हैं। 

कुछ भी रिएक्ट न करें 

हो सकता है यह बात आपको अटपटी लगे पर यह सच में किसी जादू की तरह काम कर सकती है। बच्चा जब भी किसी बात पर जिद करे और रोने लग जाए तो पेरेंट्स उसपर रिएक्ट करना ही बंद कर दें। न ही उन्हें लाड-प्यार देकर चुप कराएं और न ही दूसरा कोई दिलासा देकर बहलाने की कोशिश करें। 

5-6 मिनट तक उसपर किसी तरह का रिएक्ट न करें। आप पाएंगे कि वह अपने आप शांत हो जाएगा। ध्यान रहे यह तरीका तब नहीं अपनाना है जब बच्चे को ऐसा करने की बुरी आदत हो चुकी हो। 

शांत आवाज में बात करें 

बच्चे पर गुस्सा करने या हाथ उठाने के बजाय थोड़ा सा ब्रेक लेकर शांत आवाज में बात करना सबसे सही तरीका है। पेरेंट्स का गुस्सा बच्चे को अंदर से और भी ज्यादा उग्र स्वभाव वाला बना देता है, जिससे जिद कम होने के बजाय बढ़ती है। 

ना कहने से बचें और कई विकल्प दें 

जब भी बच्चा कोई जिद करे तो उसे ना कहने के बजाय उसके सामने उसके ही पसंदीदा विकल्प रख दें। मान लीजिए कि उसे कोई टॉय बहुत पसंद है, लेकिन वह किसी कार की जिद कर रहा है तो उसमे सामने दोनों चीजों की तुलना करें।  

बच्चे के ट्रिगर को पहचानें 

कई बार बच्चे पसंद से नहीं, बल्कि अपनी थकान और छिड़चिड़ेपन की वजह से भी ऐसा करते हैं। ऐसे में उनके ट्रिगर को पहचानें कि कहीं उनकी नींद या भूख तो इस जिद का कारण नहीं। उसके पैटर्न भी नोट करें कि कब वो ज्यादा जिद करता है, जैसे बाजार जाते समय या फिर स्कूल के समय। 

उनकी भावनाओं को समझें 

जब बच्चे को लगता है कि उसकी बात सुनी नहीं जा रही, तब वह और भी हठ करने लगता है। ऐसे में बच्चे की डिमांड को सुनकर उसपर अपनी बात भी रखें, उन्हें सारी स्थिति उनकी ही भाषा में समझाएं। उनकी बात भविष्य में सुने जाने का आश्वासन देना भी बेहतर विकल्प है।