प्यार है, पर 'शादी' से डर, भारतीय पुरुष आखिर कमिटमेंट से क्यों भागते हैं? एक्सपर्ट ने बताए कारण
भारतीय पुरुष प्यार में होने के बावजूद कमिटमेंट से कतराते हैं, जिसके पीछे कई सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कारण हैं। डॉ. मीनाक्षी मनचंदा के अनुसार, परिवार और ...और पढ़ें

पुरुषों को कमिटमेंट से क्यों डर लगता है? (AI Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज के बदलते समय में रिश्तों का रूप भी बदल रहा है। अक्सर यह देखा जाता है कि भारतीय पुरुष प्यार में होने के बावजूद कमिटमेंट यानी शादी या स्थायी रिश्ते के वादे से कतराते हैं। आखिर ऐसा क्यों है?
क्या वे प्यार नहीं करते, या इसके पीछे कुछ गहरे मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारण छिपे हैं? इस बारे में जानने के लिए हमने डॉ. मीनाक्षी मनचंदा (एसोशिएट डायरेक्टर, साइकायट्री, एशियन हॉस्पिटल) से बात की। आइए जानें इस बारे में एक्सपर्ट की क्या राय है।
परिवार और समाज का भारी दबाव
भारत में शादी या कमिटमेंट केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं होता, बल्कि दो परिवारों का मिलन माना जाता है। भारतीय पुरुषों के लिए कमिटमेंट का मतलब केवल एक पार्टनर के लिए वफादार होना नहीं, बल्कि परिवार की उम्मीदों का बोझ उठाना भी है। सामाजिक स्तर पर उन्हें एक परफेक्ट बेटे और आदर्श पति की दोहरी भूमिका निभानी पड़ती है। यह सामाजिक दबाव अक्सर उन्हें डरा देता है कि क्या वे सबकी उम्मीदों पर खरे उतर पाएंगे।
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फाइनेंशियल चिंता
कमिटमेंट से डरने का एक सबसे बड़ा कारण फाइनेंशियली स्टेबल न होने का डर है। भारतीय समाज में आज भी पुरुष को ही घर का फाइनेंशियल पिलर माना जाता है। पुरुष अक्सर आर्थिक रूप से पूरी तरह सुरक्षित होने के बाद ही कोई बड़ा वादा करना चाहते हैं। वे अपनी फाइनेंशियल कंडीशन को लेकर असुरक्षित महसूस करते हैं और उन्हें डर होता है कि शादी के बाद बढ़ते खर्चों को वे संभाल पाएंगे या नहीं। इसी डर के कारण, पार्टनर से प्यार करने के बावजूद, वे खुद को पूरी तरह कमिट करने में काफी समय लेते हैं।
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आजादी खोने का डर
एक बड़ा मनोवैज्ञानिक कारण व्यक्तिगत स्वतंत्रता खोने का डर है। कई पुरुषों को लगता है कि एक बार स्थायी रिश्ता जुड़ने या शादी होने के बाद उनकी लाइफस्टाइल बदल जाएगी। उन्हें डर होता है कि वे अपनी पसंद के काम, दोस्तों के साथ समय बिताना या अपने फैसले खुद लेना बंद कर देंगे। यह गलत फैसला लेने का डर उन्हें किसी भी बंधन में बंधने से रोकता है।
भावनात्मक डर
कमिटमेंट को लेकर पुरुषों के मन में जो धारणाएं बनी हुई हैं, वे अक्सर नकारात्मक होती हैं। वे रिश्तों में होने वाली अनबन, कानूनी उलझनों या भावनात्मक रूप से टूटने से डरते हैं। यह फेलियर का डर इतना गहरा होता है कि वे सुरक्षित रहने के लिए कमिटमेंट से दूर भागना ही बेहतर समझते हैं।
भारतीय पुरुषों में कमिटमेंट का डर अक्सर उनके पार्टनर के लिए कम प्यार की वजह से नहीं, बल्कि भविष्य की असुरक्षाओं की वजह से होता है। चाहे वह पैसे की चिंता हो या सामाजिक जिम्मेदारी का बोझ, ये सभी कारण उन्हें कोई भी ठोस वादा करने से पहले दो बार सोचने पर मजबूर कर देते हैं।