कुछ लोग मैसेज Seen करके क्यों छोड़ देते हैं? बेरुखी नहीं, इसके पीछे है साइकोलॉजी से जुड़े कारण
मैसेज सीन करके भी तुरंत जवाब न देने के पीछे मानसिक थकावट और ध्यान भटकने जैसे कई मनोवैज्ञानिक कारण हो सकते हैं।

मैसेज का रिप्लाई न देने के पीछे साइकोलॉजिकल कारण (AI Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपके साथ ऐसा हुआ है कि किसी ने आपका मैसेज सीन तो कर लिया, लेकिन उसका कोई जवाब नहीं दिया? या फिर कई दिनों बाद रिप्लाई आया? कई लोगों की ये आदत होती है कि वे या तो कई दिनों में जवाब देते हैं या मैसेज बस सीन करके छोड़ देत हैं। इसके कारण रिश्तों में तकरार हो सकती है।
दरअसल, सीन करके रिप्लाई न देने के पीछे साइकोलॉजी से जुड़े कुछ कारण छिपे होते हैं। आमतौर पर रिप्लाई न देना या देर से रिप्लाई करना रिश्तों में बेरुखी से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसके पीछे हमेशा रिजेक्शन या इग्नोर करने की वजह नहीं होती।
मानसिक थकावट और सीमित मानसिक क्षमता
कॉग्निटिव लोड थ्योरी के अनुसार, इंसान का दिमाग एक सीमित क्षमता तक ही काम कर सकता है। मैसेज पढ़ना बहुत आसान है, लेकिन उसका सही जवाब देने में मेंटल एनर्जी, फोकस और फैसले लेने की क्षमता लगती है। जब कोई व्यक्ति गाड़ी चला रहा हो, काम में बिजी हो, बच्चे को संभाल रहा हो या किसी मीटिंग में हो, तो वह नोटिफिकेशन देखकर मैसेज तो पढ़ लेता है, लेकिन उसका जवाब देने के लिए उस समय दिमाग के पास क्षमता नहीं होती। बाद में ध्यान दूसरी तरफ चला जाता है और रिप्लाई करना भूल जाते हैं। ज्यादा बिजी रहने वाले लोगों को दिन के अंत में अक्सर मश ब्रेन का सामना करना पड़ता है।
ध्यान का भटकना और भूलने की आदत
मोबाइल के तमाम नोटिफिकेशन तुरंत हमारा ध्यान भटका देते हैं। कई बार लोग चैट खोलते हैं, लेकिन उसी समय कोई दूसरा काम या कोई और नोटिफिकेशन उनका ध्यान अपनी ओर खींच लेता है। ADHD से पीड़ित या आसानी से भटकने वाले लोगों के साथ ऐसा अक्सर होता है। उनके दिमाग में मैसेज टू-डू लिस्ट में तो चला जाता है, लेकिन बाद में वे उसे भूल जाते हैं।
परफेक्ट जवाब की चाहत और झिझक
इमोशनल सवाल, प्लानिंग या सेंसिटिव मुद्दों से जुड़े मैसेज ज्यादा जरूरी महसूस होते हैं। ऐसे में लोग तुरंत रिप्लाई देने के बजाय थोड़ा समय लेते हैं, ताकि वे सही शब्द और टोन चुन सकें। परफेक्शनिज्म की आदत इस देरी को और बढ़ा देती है। सही जवाब देने की ये इच्छा ही कई बार रिप्लाई न करने की वजह बन जाती है। गलत मतलब निकालने का डर या लंबी बातचीत शुरू होने की घबराहट भी कई बार रिप्लाई न देने की वजह बन जाती है।
इमोशनल थकान और खुद का बचाव
स्ट्रेस, बर्नआउट और इमोशनल थकान में एक साधारण मैसेज भी बहुत भारी बोझ जैसा लगता है। ऐसी स्थिति में चुप रहना व्यक्ति के लिए मेंटल एनर्जी बचाने और नर्वस सिस्टम को शांत रखने का एक तरीका होता है। अवॉइडेंट अटैचमेंट स्टाइल, इंट्रोवर्ट्स और सोशल बैटरी खत्म महसूस होने पर लोगों को ज्यादा इमोशनल प्रेशर महसूस होता है। ऐसे में ये लोग खुद को प्रोटेक्ट करने के लिए मैसेज का रिप्लाई नहीं देते।
टालमटोल और गिल्ट साइकिल
जब किसी मैसेज का जवाब देने में देर हो जाती है, तो व्यक्ति के मन में गिल्ट और सेल्फ क्रिटिसिज्म पैदा होने लगता है। इस वजह से लोग रिप्लाई करने में झिझकने लगते हैं और मैसेज का रिप्लाई कभी आता ही नहीं। इसके अलावा, मतभेद या टकराव से बचने के लिए भी लोग कई बार जवाब देने से कतराते हैं।
सीनियर साइकोलॉजिस्ट डॉ. मोनिका शर्मा (दिल्ली)
