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पुराने जमाने में बुजुर्ग सिर्फ सफेद कपड़े ही क्यों पहनते थे? वजह सिर्फ सादगी नहीं, इसके पीछे छिपा है बड़ा राज

Published: Sun, 06 Sep 2026 03:06 PM (IST)

पुराने समय में बुजुर्गों द्वारा सफेद कपड़े पहनने के पीछे सिर्फ सादगी नहीं, बल्कि कई गहरे कारण थे।

बुजुर्गों के पहनावे में सफेद रंग का महत्व (Image Source: AI-Generated)

बुजुर्गों के पहनावे में सफेद रंग का महत्व (Image Source: AI-Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बचपन में आपने अपने दादा-दादी या बड़े-बुजुर्गों को हमेशा सफेद या बहुत हल्के रंग के सूती कपड़ों में देखा होगा, मगर क्या कभी आपके मन में यह सवाल आया है कि आखिर उम्र बढ़ने के साथ लोग सफेद रंग को ही क्यों चुनते थे?

दरअसल, यह सिर्फ कोई इत्तेफाक नहीं था, बल्कि इसके पीछे कई गहरी वजहें छिपी हुई हैं, जिसके बारे में हम इस आर्टिकल में आपको बताने जा रहे हैं। 

शांति और पवित्रता का प्रतीक

भारतीय संस्कृति में सफेद रंग को हमेशा से शांति, शुद्धता और सादगी का प्रतीक माना गया है। उम्र के उस पड़ाव पर जब इंसान अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियां पूरी कर लेता है, तो उसे मन की शांति की तलाश होती है। सफेद रंग स्वभाव को सौम्य बनाता है और मन को शांत रखने में मदद करता है।

मोह-माया से दूरी

पुराने समय में जीवन को चार आश्रमों में बांटा गया था। वानप्रस्थ और संन्यास आश्रम यानी बुढ़ापे में व्यक्ति को दुनियादारी की चमक-दमक से दूर होना होता था। चटक और गहरे रंग, जैसे- लाल, पीला, हरा उत्साह, जवानी और दुनियादारी के आकर्षण को दर्शाते हैं। इसलिए, मोह-माया से दूरी और जीवन में सादगी दिखाने के लिए बुजुर्ग सफेद रंग अपना लेते थे।

मौसम और आराम का विज्ञान

इस परंपरा के पीछे एक बहुत बड़ा वैज्ञानिक कारण भी है। भारत मुख्य रूप से एक गर्म देश है। हम सभी जानते हैं कि सफेद रंग सूरज की गर्मी को सोखने के बजाय वापस कर देता है, जिससे शरीर ठंडा रहता है। उम्र बढ़ने के साथ शरीर कमजोर होने लगता है और आराम की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। इसलिए सूती और सफेद कपड़े पहनना बुजुर्गों की सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद था।

अमीरी-गरीबी का भेद खत्म करना

सफेद रंग में कोई भेदभाव नहीं होता। चाहे कोई इंसान बहुत अमीर हो या गरीब, बुढ़ापे में सफेद कपड़े पहनने से समाज में एक समानता का भाव आता था। यह इस बात का भी गहरा संदेश था कि जीवन के आखिरी पड़ाव पर बाहरी दिखावा या कपड़ों की चमक कोई मायने नहीं रखती, असली चमक इंसान के कर्मों और उसके ज्ञान में होती है।

समय के साथ अब यह परंपरा काफी बदल गई है। आजकल के बुजुर्ग हर रंग पहनना पसंद करते हैं और जिंदगी को खुलकर जीते हैं, जो कि एक बहुत अच्छा और पॉजिटिव बदलाव भी है। हालांकि, पुराने समय में सफेद कपड़े पहनना जीवन को सादगी, समानता और शांति से जीने का एक बहुत ही खूबसूरत तरीका था।

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