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पुराने घरों में नहीं हुआ करते थे ड्रॉइंग रूम, फिर कैसे हुई इनकी शुरुआत? विक्टोरियन युग से जुड़ी है कहानी

Published: Fri, 04 Sep 2026 09:25 AM (GMT+05:30)Updated: Sat, 19 Sep 2026 02:02 PM (GMT+05:30)

पुराने घरों में ड्रॉइंग रूम नहीं हुआ करते थे। ब्रिटेन में महिलाओं की एक असुविधा को दूर करने के लिए इस कमरे का कॉन्सेप्ट आया।

घरों में कैसे बनने शुरू हुए ड्रॉइंग रूम? (AI Generated Image)

घरों में कैसे बनने शुरू हुए ड्रॉइंग रूम? (AI Generated Image)

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समय कम है?

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आजकल के घरों में ड्रॉइंग रूम एक अहम हिस्सा माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं एक समय था जब घरों में इस तरह का कोई कमरा नहीं हुआ करता था। 

जी हां, ड्रॉइंग रूम का कॉन्सेप्ट पुराने समय के घरों में था ही नहीं, तो फिर इन्हें बनाने की शुरुआत कैसे हुई? आखिर ऐसी क्या जरूर महसूस हुई, जो घरों में अलग से ड्रॉइंग रूम बनाया जाने लगा? इन सवालों का जवाब एक दिलचस्प कहानी में छिपा है। आइए जानें इस बारे में।   

अगल था घरों का ढांचा

मध्यकालीन यूरोप में आज की तरह अलग-अलग कामों के लिए अलग कमरे नहीं होते थे। एक ही बड़े हॉल में खाना, मेहमानों का स्वागत और सभी सोशल एक्टिविटीज होती थीं। समय के साथ घर व्यवस्थित होने लगे, तो सहूलियत के लिए अलग-अलग कमरे बनाने का आइडिया सामने आया। 

ऐसे ही सबसे पहले डाइनिंग रूम का कॉन्सेप्ट आया, जहां सभी लोग टेबल पर इकट्ठा होकर खाना खाते। हालांकि, इसके साथ समस्या थी कि खाना खत्म होने के बाद भी पुरुष टेबल से नहीं उठते थे। वे खाने के बाद भी डाइनिंग टेबल पर ही बैठकर आपस में बातें करते रहते और सिगार पीते। यह महिलाओं के लिए काफी परेशानी भरा था, क्योंकि वे इन चर्चाओं में हिस्सा नहीं ले पाती थीं।

विड्रॉइंग रूम से बना ड्रॉइंग रूम

इसलिए खाने के बाद महिलाएं डाइनिंग रूम छोड़कर दूसरे कमरे में चली जाती थीं। वे जिस कमरे में जाती थीं, यानी डाइनिंग रूम से विड्रॉ करती थीं, उसे विड्रॉइंग रूम कहा जाने लगा। समय के साथ ये नाम छोटा होकर केवल ड्रॉइंग रूम रह गया। यानी जिस कमरे को हम आज अपनी सोशल एक्टिविटीज के लिए इस्तेमाल करते हैं, वो असल में खाने के बाद महिलाओं के आराम करने और चाय-कॉफी पीने की जगह थी। 

विक्टोरियन दौर का भारतीय घरों पर असर

ब्रिटिश काल के दौरान विक्टोरियन लाइफस्टाइल और आर्किटेक्चर भारत पहुंचा। औपनिवेशिक काल में कई अमीर भारतीयों ने अपने बंगले विक्टोरियन स्टाइल में बनवाए, जिसमें भव्य ड्रॉइंग रूम भी बनवाया गया। 

मजेदार बात है कि ब्रिटेन में समय के साथ भाषा और सामाजिक व्यवस्था बदली, तो ड्रॉइंग रूम शब्द घरों से गायब हो गया। आज के समय में वहां इसे लिविंग रूम, सिटिंग रूम या लाउंज कहा जाता है। हालांकि, भारतीय अंग्रेजी में यह शब्द रह गया और आज भी ड्रॉइंग रूम शब्द का इस्तेमाल होता है।