ससुर-देवर के साथ जाने से दुल्हन का इनकार... दिलचस्प है इस सुपरहिट पंजाबी गाने में छिपी 'मुकलावा' रस्म की कहानी
वायरल पंजाबी गाना 'ठुमक ठुमक जाणीए' एक लोकगीत है, जो पंजाबी शादियों की रस्म 'मुकलावा' से जुड़ा है।

पंजाबी शादियों की रस्म से जुड़ा है ये गाना (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। नेहा भसीन का गाया गाना ‘ठुमक ठुमक जाणीए माहिए दे नाल’ तो आपने सुना ही होगा। ये गाना सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था और आज भी शादियों में इस गाने पर जमकर डांस किया जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं ये असल में एक पंजाबी लोकगीत है?
दरअसल, ये गाना नेहा भसीन के प्रोजेक्ट फोकटेल्स के तहत रिलीज हुआ था, जिसमें उन्होंने पंजाबी लोकगीतों को नए अंदाज में पेश किया है। ये लोकगीत पंजाबी शादियों की एक रस्म से जुड़ा है, जिसमें दुल्हन अपने ससुरालवालों के साथ जाने से इनकार करती है। आइए जानें इस लोकगीत की कहानी और क्यों ये इतना खास है।
पंजाबी शादियों की रस्म से जुड़ा है गीत
ये पंजाबी लोकगीत एक नई दुल्हन के मन के चुलबुलेपन और उसकी ससुराल जाने की शर्त को बयां करता है। इस गीत के जरिए ससुरालवालों के साथ उसके रिश्ते की भी झलक पेश करता है। ये गाना दुल्हन की विदाई या मुकलावा से जुड़ा है।
मुकलावा पंजाबी शादियों की एक रस्म है, जिसमें दुल्हन अपने घर से विदा होकर अपने पति के घर पहली बार जाती है। इस गीत में इसी रस्म की खट्टी-मीठी नोंक-झोंक को दिखाया गया है।
क्या कहता है ये गीत?
इस गाने में नई दुल्हन कह रही है कि उसको लिवाने के लिए सबसे पहले उसके ससुर आए और साथ में उसके लिए चूड़ियां लेकर आए हैं, लेकिन वो जाने से मना कर देती है। दूसरी बार उसके देवर आए हैं, जो उसके लिए लहंगा लेकर आए हैं, लेकिन वो उनके साथ जाने से भी इनकार कर देती है। अब तीसरी बार में उसका पति उसे लेने आया है, तो उसकी सारी शरारत खुशी में बदल जाती है और वो ठुमते हुए अपने पति के साथ ससुराल जाने के लिए राजी हो जाती है।
इस गीत की शुरुआत में पहाड़ियों और डोगरे का भी जिक्र है, जो पंजाब और हिमाचल व जम्मू-कश्मीर के पुराने सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाता है। पहाड़िए पहाड़ों में रहने वाले व्यक्ति को कहा जाता है और डोगरा जम्मू का एक समुदाय है। इन पंक्तियों में दुल्हन कह रही है कि उसकी जूती पहाड़िए के साथ जाएगी और मेरा पौला यानी सैंडल डोगरे के साथ जाएगी। हालांकि, दुल्हन ये पहाड़िए और डोगरा ऐसे ही किसी को नहीं कह रही है, बल्कि अपने ससुरालवालों को कह रही है कि मेरी जूती ही जाएगी तुम्हारे साथ, मैं नहीं आने वाली।
क्यों इतना खास है ये गीत
पंजाबी संस्कृति में दुल्हन का ये खास अंदाज उसके नखरों को दिखाता है और उसके ससुराल के साथ उसके रिश्तों की मिठास को जाहिर करता है। इस गीत की धुन इतनी प्यारी है कि एक बार सुनकर मन ही नहीं भरता। साथ ही, पंजाबी के ठेठ शब्द इसे और भी मजेदार बनाते हैं। नेहा भसीन ने इस गीत को नए अंदाज में गाकर पेश किया है, जो सुपरहिट हुआ था और आज भी शादियों की जान बना हुआ है।
