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पवन सिंह और खेसारी के गानों पर नहीं, जोगीरा की धुन पर होता है बिहार का ये लोक नृत्य; फगुआ में जमाता है रंग

Published: Thu, 24 Sep 2026 03:28 PM (GMT+05:30)Updated: Tue, 29 Sep 2026 08:34 AM (GMT+05:30)

फाल्गुन के महीने में बिहार में ढामर जोगीरा नृत्य किया जाता है, जिसमें फगुआ का आनंद देखने को मिलता है।

बिहार में होली पर किया जाता है ढामर जोगीरा नृत्य (AI Generated Image)

बिहार में होली पर किया जाता है ढामर जोगीरा नृत्य (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बिहार के डांस का नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहली तस्वीर पवन सिंह और खेसारी लाल के गानों पर होते ऑर्केस्ट्रा डांस की आती है। हालांकि, सच ये है कि यहां का डांस सिर्फ ऑर्केस्ट्रा तक सीमित नहीं है। बिहार के लोक नृत्यों में ढामर जोगीरा शामिल है, जो फाल्गुन के महीने में खासतौर से किया जाता है।

ढामर जोगीरा में स्त्री और पुरुष दोनों साथ मिलकर नृत्य करते हैं और फगुआ का आनंद लेते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि इस नृत्य की शुरुआत कैसे हुई? आइए जानें ढामर जोगीरा का इतिहास क्या है और इसकी खासियत क्या है। 

कैसे हुई ढामर जोगीरा नृत्य की शुरुआत?

ढामर जोगीरा की जड़े शास्त्रीय लोक संगीत से जुड़ी हैं। ढामर शब्द धमार ताल से निकला है, जो होली के खास अवसर पर गाए जाने वाले गीतों के लिए मशहूर है। जब शास्त्रीय संगीत की धमार शैली लोक जीवन में रची-बसी, तो इन गीतों पर किए जाने वाले नृत्य ने ढामर जोगीरा का रूप ले लिया। 

जोगीरा शब्द जोगी से आया है, जो होली में गाने वाली साधु-संतों की टोली से आया है। फाल्गुन के महीने में साधु-संत गांव में घूमकर प्रह्लाद और हिरण्यकशिपु की कहानी गाकर सुनाते। धीरे-धीरे इन गीतों में भक्ति रस के साथ-साथ शृंगार रस भी शामिल हुआ और आज के जोगीरा गीतों का जन्म हुआ।

क्या है ढामर जोगीरा नृत्य की खासियत?

ढामर जोगीरा नृत्य होली के उत्साह और उल्लास का प्रतीक है। इसमें शास्त्रीय धमार गायिकी भी है और होली का अल्हड़पन भी देखने को मिलता है। इस नृत्य की सबसे बड़ी खासियत है कि इसमें जाति, वर्ग या उम्र का कोई बंधन नहीं होता। पुरुष और महिलाएं एक साथ मिलकर इस नृत्य को करते हैं और होली का उत्सव मनाते हैं। 

ढामर जोगीरा में जोगीरा के बोल जोगीरा सारा रा रा रा सुनने को मिलते हैं। जोगीरा में हंसी-मजाक और नोंक-झोंक से भरे गीत भी होते हैं, जो इस नृत्य के गाने में सुनने को मिलते हैं। 

कैसे किया जाता है ढामर जोगीरा नृत्य?

इसमें नर्तक रंग-बिरंगे कपड़ों में सजते हैं और अबीर-गुलाल उड़ाते हुए नृत्य करते हैं। ढोलक, झाल और मंजीरा की धुन पर गायक गीत गाते हैं और नर्तक नृत्य करते हैं। नर्तक गोल घेरे में घूमकर हाथ-पैरों की खूबसूरत मूवमेंट के साथ नृत्य करते हैं।