सुंदरबन के घोड़ामारा द्वीप का अस्तित्व संकट में, 2042 तक लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा हो सकता है विलुप्त
सुंदरबन का घोड़ामारा द्वीप समुद्र में समा रहा है, जिससे 2042 तक इसका 40% हिस्सा विलुप्त होने का खतरा है। ...और पढ़ें

सुंदरबन के घोड़ामारा द्वीप का अस्तित्व संकट में (फाइल फोटो)
HighLights
घोड़ामारा द्वीप का 40% हिस्सा 2042 तक विलुप्त होने का खतरा।
एनजीटी ने केंद्र-राज्य अधिकारियों की उच्च स्तरीय समिति गठित की।
समिति मैंग्रोव संरक्षण और तटीय क्षरण पर रिपोर्ट देगी।
राज्य ब्यूरो, जागरण, कोलकाता। महानगर से सटे दक्षिण व उत्तर 24 परगना जिले के सुंदरबन का ऐतिहासिक घोड़ामारा द्वीप धीरे-धीरे समुद्र की लहरों में समाता जा रहा है। पर्यावरणविदों की हालिया चेतावनी ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है, जिसमें कहा गया है कि यदि वर्तमान दर से भू-क्षरण जारी रहा, तो वर्ष 2042 तक इस द्वीप का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह विलुप्त हो जाएगा।
इस गंभीर स्थिति का स्वतः संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दो दिन पहले केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय समिति गठित कर तीन महीने के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
8.759 वर्ग किमी का यह द्वीप अब सिमटकर मात्र 3.83 वर्ग किमीर रह गया
सुंदरबन क्षेत्र में भू-क्षरण एक विकराल समस्या बन चुकी है। जलवायु परिवर्तन, बढ़ता समुद्र का जल स्तर, बार-बार आने वाले चक्रवात और नदियों पर बांधों के निर्माण के कारण गाद जमने की प्रक्रिया प्रभावित हुई है, जिससे द्वीप अपनी जमीन खो रहे हैं।
आंकड़ों के अनुसार, 1969 से 2019 के बीच सुंदरबन ने कुल 250 वर्ग किलोमीटर भूमि गंवाई है। विशेष रूप से घोड़ामारा द्वीप, जो कभी 8.759 वर्ग किलोमीटर का था, अब सिमटकर मात्र 3.83 वर्ग किलोमीटर रह गया है।
न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति अफरोज अहमद की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी की। एनजीटी ने कहा कि राज्य सरकार ने तटबंधों के निर्माण और मरम्मत का कार्य तो किया है, लेकिन मैंग्रोव वनों के संरक्षण को लेकर केंद्र और राज्य दोनों ने ही कोई दीर्घकालिक ठोस कदम नहीं उठाए हैं।
गठित समिति में पर्यावरण मंत्रालय के डीजी (वन) और राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक शामिल होंगे। अदालत ने समिति से मैंग्रोव संरक्षण की विस्तृत योजना, तटीय क्षरण रोकने की अनुमानित लागत, फंड का स्रोत और परियोजना पूरी होने की समयसीमा के बारे में जानकारी मांगी है। मामले की अगली सुनवाई मई में होगी।
