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    'चीरहरण' से लेकर 'शकुनि का छल'... कैसे महाभारत के ये किस्से आज बन गए हमारी रोजमर्रा की बोलचाल का हिस्सा

    Updated: Sun, 09 Aug 2026 04:43 PM (IST)

    हम हर रोज अपनी आम बोलचाल की भाषा में कुछ ऐसी बातों का उपयोग करते हैं, जिनका महाभारत से खास संबंध है। ...और पढ़ें

    महाभारत से जुड़े हिन्दी मुहावरे (Image Source: AI Generated)

    महाभारत से जुड़े हिन्दी मुहावरे (Image Source: AI Generated)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। महाभारत सिर्फ महाकाव्य नहीं है, यह हमारी संस्कृति और भाषा से गहराई से जुड़ा हुआ है। तभी तो रोजमर्रा की बोलचाल में हम इसके कई शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। हम बात कर रहे हैं हजारों साल पुरानी इस गाथा से निकले कई मुहावरों की जो हमारी हिन्दी भाषा का हिस्सा हैं, पर हमने कभी गौर ही नहीं किया। आइए ऐसे ही कुछ रोज में उपयोग में आने वाले मुहावरों की बात करें। 

    आंख पर पट्टी बंधी होना  

    महाभारत में जब गांधारी ने अपने पति धृतराष्ट्र को दृष्टि बाधित देखा तो उन्होंने भी अपनी आंखों पर आजीवन पट्टी बांधने की प्रतिज्ञा ले ली। वहीं, धृतराष्ट्र दृष्टि बाधित होना उनके पुत्र मोह में अंधे हो जाने से भी जोड़कर देखा जाता है। यहीं से हिन्दी का आंख पर पट्टी बांधने का मुहावरा निकला। इसका मतलब होता है कि सच जानते हुए भी चीजों और परिस्थितियों को अनदेखा करते जाना या फिर किसी के प्रति जरूरत से ज्यादा मोह में अच्छे और बुरे के बीच का फर्क भूल जाना। 

    चीरहरण 

    महाभारत में युदधिष्ठिर ने जुआ हारा तो इसके बदले में दुशासन ने भरी सभा में बदले की आग में द्रौपदी का चीरहरण किया। आज जब भी किसी का पब्लिक में अपमान होता है, इस शब्द को मुहावरे के तौर पर इस्तेमा किया जाता है। 

    शकुनि की चाल 

    गांधार नरेश शकुनि ने कुरु वंश का नाश करने की ठान ली थी, इसके लिए छल-कपट वाली ऐसी चालें चलीं कि आज यह मुहावरा ही बन गया। आज किसी के धोखा देने, चतुर-चालाकी करने और षड्यन्त्र रचने जैसी बातों को शकुनि की चाल से जोड़कर देखा जाता है। 

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    चक्रव्यूह में फंसना 

    आपको महाभारत का वो दृश्य याद होगा जब अभिमन्यु चक्रव्यूह में प्रवेश कर गए थे पर उन्हें वहां से बाहर निकलने का रास्ता नहीं पता था। यही कारण है कि उनका चारों तरफ से घेरकर वध कर दिया गया था। इस दृश्य को हम आज के दौर में मुहावरे के तौर पर इस्तेमाल करते हैं, जब कोई व्यक्ति ऐसी मुश्किल परिस्थिति में फंस जाता है कि उसे बाहर निकलने का रास्ता ही नहीं मिलता। 

    कुरुक्षेत्र बन जाना

    कुल 18 दिनों तक चलने वाले महाभारत युद्ध को कुरुक्षेत्र में लड़ा गया था। पांडवों और कौरवों के बीच हुए इस युद्ध की स्मृतियां हम सभी के बीच भाषा के रूप में जीवित हैं। कहीं जमकर लड़ाई या बहस होती है तो लोग कुरुक्षेत्र कहने से गुरेज नहीं करते। 

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