क्या आपने सुना है 'कलगी तुर्रा'? जहां गीतों में होता है सीधा मुकाबला! जानिए MP के अनोखे लोक संगीत के बारे में
मध्य प्रदेश अपनी ऐतिहासिक धरोहरों के साथ-साथ अपनी समृद्ध संस्कृति के लिए भी जाना जाता है। यहां के लोक संगीत में अलग-अलग क्षेत्रों की जीवनशैली और आध्या ...और पढ़ें

मध्य प्रदेश के लोकगीतों में झलकती है वहां की संस्कृति (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारत का दिल कहलाने वाला मध्य प्रदेश अपनी ऐतिहासिक धरोहरों और प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ अपनी संस्कृति के लिए भी जाना जाता है। यहां की संस्कृति और जीवनशैली की झलक अलग-अलग क्षेत्रों में गाए जाने लोक संगीत में भी देखने को मिलती है।
मध्य प्रदेश के लोक संगीत की सबसे बड़ी खासियत है कि यहां अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग तरह का संगीत सुनने को मिलता है। आइए जानें मध्य प्रदेश के लोक संगीत के बारे में।
निमाड़ का गायन
निमाड़ क्षेत्र का लोक संगीत अपनी आध्यात्मिकता के लिए जाना जाता है। कलगी तुर्रा यहां का सबसे मशहूर गायन है, जो भगवान शंकर और माता पार्वती को समर्पित है। इसमें दो पक्षों के बीच सवाल-जवाब का संगीतमय मुकाबला होता। इसमें गायक मौके पर ही गीतों की रचना करते हैं। यहां निर्गुणी गायन का भी चलन है। यह मृदंग और झांझ के साथ नारदीय शैली में गाया जाता है।
मालवा के गीतों की मिठास
मालवा का लोक संगीत अपने शांत और संवाद की शैली के लिए जाना जाता है। भर्तृहरि गायन में राजा भरथरी और उनकी रानी पिंगला के वियोग और राजा के वैरागी बनने की कहानी को चिंकारा पर गाकर सुनाया जाता है। वहीं संज्या गीत पितृपक्ष के दौरान दीवार पर गोबर से संज्या बनाकर गाया जाने वाला पारंपरिक गीत है। इस क्षेत्र में बारिश के मौसम में महिलाएं बरसाती बारता औक हीड़ गायन गाती हैं।
बुंदेलखंडी भक्ति का स्वर
बुंदेलखंडी बोली में गाए जाने वाले गीतों में भक्ति और वीर रस शामिल होता है। आल्हा गायन वीर रस के लोकगीत हैं, जिनमें आल्हा और ऊदल के युद्ध की वीरता की कहानी को ढोलक और नगड़िया की थाप पर गाया जाता है। नर्मदा स्नान या त्योहारों के अवसर पर भगवान शिव और माता पार्वती के लिए भोला गीत गाया जाता है। राजा हरदौल की गाथा और दिवाली पर गाया जाने वाला दिवारी गायन इस क्षेत्र की पहचान हैं।
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बघेलखंड के गीत
बघेली बोली में गाए जाने वाले इन लोकगीतों में शृंगार रस की झलक देखने को मिलती है। हरबोले जाति के गायक वासुदेव गायन करते हैं, जो भगवान कृष्ण को समर्पित होते हैं। बिरहा सवाल-जवाब की शैली में गाया जाने वाला गीत है, जबकि बिदेसिया प्रेमी-प्रेमिका के वियोग को बयां करते हैं।