डिजिटल दौर में दस्तखत करना काफी नहीं! अगर ये काम नहीं आते, तो समझो पढ़े-लिखे होकर भी 'अंगूठाछाप' हैं आप
अगर आपके पास डिग्री है लेकिन इन चीजों का ज्ञान नहीं, तो अनपढ़ ही कहलाएंगे आप।

आज के दौर में डिजिटल साक्षरता जरूरी (Image Source)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज पढ़ने-लिखने की बुनियाद परिभाषा बिल्कुल बदल चुकी है। कहां पहले केवल हस्ताक्षर करना या अक्षरों को पढ़ पाना ही साक्षरता का पैमाना माना जाता था, पर अब इतना भर काफी नहीं है। एआई और स्मार्टफोन के इस डिजिटल दौर में अब वह व्यक्ति भी अनपढ़ है जिसे डिजिटल दुनिया का ज्ञान नहीं।
इस साल अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के 60 साल पूरे हो रहे हैं, ऐसे में आइए जानें ‘डिजिटल साक्षरता’ के बारे में, किन चीजों की जानकारी होना इन दिनों पढ़ा-लिखा होना है।
‘डिजिटल साक्षरता’ क्या है?
डिजिटल साक्षरता का मतलब है किताबी ज्ञान के अलावा तकनीक, इंटरनेट और डिजिटल टूल्स जैसे- एआई, सॉफ्टवेयर, एप्लीकेशन या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के विषय में सटीक जानकारी होना और उसे सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल कर पाना।
वहीं, यूनेस्को की माने तो जॉब्स और एंट्रेप्रेन्योरशिप के लिए डिजिटल तकनीक की मदद से सुरक्षित और सही जानकारी एक्सेस करना, उसे समझना, मैनेज करना और उसकी मदद से कुछ क्रिएट करना डिजिटल साक्षरता माना जाता है।
डिजिटल साक्षरता के लिए ये चीजें हैं जरूरी
आज के समय में ऐसी कई चीजें हैं जिनकी समझ आपको डिजिटली पढ़ा-लिखा बनाती है:
डिजिटल पेमेंट और बैंकिंग की समझ
अगर आप ऑनलाइन यूपीआई, मोबाइल एप्स और नेट बैंकिंग के माध्यम से सुरक्षित लेनदेन करना और ओटीपी की गोपनीयता बनाए रखना जानते हैं, तो आप डिजिटली साक्षर हैं।
सोशल मीडिया और कम्यूनिकेशन के माध्यमों का इस्तेमाल
ईमेल भेजना, सभी सोशल मीडिया एप्स के फंक्शन की सही जानकारी होना और इसके साथ ही इन एप्स पर अपनी प्राइवसी का खास ख्याल रखना बहुत जरूरी है। इसके अभाव में व्यक्ति न सिर्फ डिजिटल अरेस्ट का शिकार हो सकता है, उसे सोशल मीडिया की बुरी लत भी हो सकती है।
साइबर फ्रॉड से बचना
कैशलेस जमाने में जब चोरी जैसी आशंका कम होती जा रही हैं, तो वहीं धोखाधड़ी करने वालों ने नए पैंतरे ढूंढ निकाले हैं। इन दिनों साइबर फ्रॉड के बढ़ते मामले इसका सबसे बड़ा सबूत हैं। ऐसे में लोगों के लिए फर्जी कॉल्स, स्पैम मैसेज, फिशिंग लिंक्स जैसी धोखाधड़ी को पहचानना एक अनिवार्य शर्त बन चुकी है। अगर आप इनसब की पहचान करना नहीं जानते तो आप कितने भी पढ़े-लिखे हों, रहेंगे डिजिटली अनपढ़ ही।
झूठी वायरल खबरों पर भरोसा न करना
किसी व्यक्ति, किसी संस्थान या किसी चीज की छवि धूमिल करने के लिए झूठी खबरों को धड़ल्ले से वायरल किया जा रहा है। इसमें भी अफसोस की बात यह कि समान विचारधारा से संबंध रखने वाले लोग इनपर आंख मूंदकर विश्वास भी कर लेते हैं। आपको नहीं लगता कि किसी भी विषय की जानकारी का सत्यापन किया जाना बेहद जरूरी है? यही वजह है कि लोगों को डिजिटली साक्षर होना ही होगा।
डिजिटल दुनिया के गलत प्रभावों को समझना
कुछ लोगों में डिजिटली अवेलेबल रहने की ऐसी आदत बन चुकी है कि वो परिवार में रहकर भी अकेलेपन का शिकार हो रहे हैं। इन सब चीजों से सिर्फ वही बच सकता है, जिसे पता हो कि कब किस चीज का इस्तेमाल करना है।
