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जिस लोकगीत के बिना अधूरी हैं पंजाब की शादियां, उसी की धुन पर बने इस पॉप सॉन्ग का आज भी है जबरदस्त क्रेज

Published: Tue, 08 Sep 2026 07:01 PM (IST)

पंजाब के एक लोकगीत से निकले फेमस पॉप सॉन्ग पर हम आज भी थिरकते हैं, पर इसकी उत्पत्ति के बारे में नहीं जानते।

‘चिट्टा कुक्कड़’ लोकगीत की कहानी (Image Source: AI Generated)

‘चिट्टा कुक्कड़’ लोकगीत की कहानी (Image Source: AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। 'लैंबॉर्गिनी चलाई जाने ओ...' यह पंजाबी गाना तो आपने बहुत बार सुना होगा, पर क्या आप जानते हैं कि इस फेमस गाने के पीछे सदियों पुराना पंजाबी लोकगीत है? जी हां, हम बात कर रहे हैं ‘चिट्टा कुक्कड़’ लोकगीत की, जिसका पंजाब की समृद्ध संस्कृति से गहरा संबंध है। 

‘चिट्टा कुक्कड़’ लोकगीत की कहानी 

‘चिट्टा कुक्कड़’ पंजाबी संस्कृति का बेहद लोकप्रिय पारंपरिक लोकगीत माना जाता है। इस गाने को पंजाब के ग्रामीण अंचल में शादी-ब्याह जैसे खुशी के मौके पर गाए जाने का रिवाज है। वैसे तो इसकी उत्पत्ति को लेकर कोई सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन कहते हैं कि इस गीत को दूल्हा और दुल्हन की तरफ से आने वाले साथी जश्न का माहौल बनाने के लिए गाया करते थे। 

गीत के बोल में छिपी है पंजाबी संस्कृति की झलक

इस लोकगीत के बोल मे ही पंजाबी संस्कृति की खूबसूरत झलक देखने को मिलती है, आइए जानते हैं कैसे: 

ग्रामीण जीवन और नई शुरुआत का प्रतीक 

इस लाइन से मतलब है कि मुंडेर पर एक सफेद मुर्गा बैठा हुआ है। यह पंजाबी संस्कृति में पवित्रता और ग्रामीण जीवन का प्रतीक है। इसमेजन मुर्गे का सफेद रंग पवित्रता तो वहीं उसका मुंडेर पर बैठना गांव के कल्चर को दिखाना है। 

इस तरह ये बोल सुबह-सुबह दी जाने वाली मुर्गे की बांग और रोजमर्रा की जीवन से जुड़ी हलचल के बारे में बताते हैं। वहीं, शादियों में इसे गीत को गाए जाने का मतलब दूल्हा-दुल्हन के जीवन की नई शुरुआत से है। 

दूल्हा-दुल्हन की मीठी तकरार से जुड़े बोल 

इसके बाद लाइंस आती हैं कि हल्के नीले-बैंगनी दुपट्टे वाली लड़की, यह लड़का तुझपर फिदा है। इसमें काशनी रंग लैवेंडर के फूलों जैसा है, और लड़की ने इसी रंग के दुपट्टे को पहना हुआ है। फिर दूल्हा-दुल्हन के बीच प्यार भरी मीठी तकरार दिखाने के लिए ‘सदके तेरे ते’ का इस्तेमाल होता है। जिसमें उस लड़की को कहा जा रहा है कि वो लड़का तुझ पर अपना सब कुछ वार चुका है। 

टप्पा शैली में गाया गया

यह लोकगीत सेमी क्लासिकल टप्पा शैली में गाया गया है। बताते चलें कि टप्पा शैली में बोल चंचल और तेज होते हैं, इसमें ठुमरी की तरह रुक-रुक कर गीत नहीं गाते। वहीं, इन गीतों की लाइंस बहुत ही छोटी पर मीनिंगफुल होती हैं, जिसे सुनकर तुरंत थिरकने का मन करता है। 

इसी की धुन पर बना ‘लैंबॉर्गिनी’

आपने शायद कभी गौर न किया हो पर साल 2018 में आया पंजाबी पॉप गाना 'लैंबॉर्गिनी' भी चिट्टा कुक्कड़ की टप्पा धुन पर गया गया है। म्यूजिक कंपोजर्स ने सदियों पुराने इस लोकगीत को मॉडर्न टच देकर रैप के साथ अलग अंदाज दिया था।

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